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Delhi NCR News: यमुना सफाई मामले में हाईकोर्ट सख्त, समयपुर बादली के पुनर्विकास प्लान को लेकर दिए निर्देश
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अदालत ने कहा- सरकार को वहां जाकर निरीक्षण करना होगा, कोर्ट पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकते
25 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना नदी की सफाई से जुड़े मामले में डीडीए, दिल्ली सरकार, एमसीडी व डीएसआईआईडीसी को समयपुर बादली क्षेत्र की सीमा चिह्नित करने व नया पुनर्विकास प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह व न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि 25 गैर-अनुरूप क्षेत्रों की योजनाएं जमा हो चुकी हैं, लेकिन समयपुर बादली व फिरनी रोड, मुंडका के दो क्षेत्र बाकी हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों का पुनर्विकास बेहद जरूरी है, ताकि अनुपचारित सीवेज यमुना में न बहे। अदालत ने कहा कि पुनर्विकास कार्य कई आदेशों के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाया। डीएसआईआईडीसी ने योजनाएं एमसीडी को, एमसीडी ने डीडीए को भेजीं, लेकिन डीडीए के जवाब न देने से मामला अटका है। कोर्ट ने डीडीए को 31 अगस्त को अन्य एजेंसियों के साथ बैठक कर सीवर लाइन व स्टॉर्मवॉटर ड्रेन बिछाने के अनुमोदन की समय-सीमा तय करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉलोनी के पुनर्विकास में विस्तारित क्षेत्रों को भी शामिल किया जाए। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि डीडीए, उद्योग मंत्रालय, एमसीडी और डीएसआईआईडीसी याचिका में दिए गए बिंदुओं पर विचार करें और समयपुर बादली की पूरी सीमा चिह्नित कर नया प्लान बनाएं।
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अदालत ने कहा, सरकार को वहां जाकर निरीक्षण करना होगा। आप जिम्मेदारी एक-दूसरे पर नहीं डाल सकते। कोर्ट आपके लिए यह काम नहीं कर सकता। फिरनी रोड के लिए डीएसआईआईडीसी को एजेंसी की टिप्पणियों पर आगे बढ़ने का आदेश दिया गया। मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
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25 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना नदी की सफाई से जुड़े मामले में डीडीए, दिल्ली सरकार, एमसीडी व डीएसआईआईडीसी को समयपुर बादली क्षेत्र की सीमा चिह्नित करने व नया पुनर्विकास प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह व न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि 25 गैर-अनुरूप क्षेत्रों की योजनाएं जमा हो चुकी हैं, लेकिन समयपुर बादली व फिरनी रोड, मुंडका के दो क्षेत्र बाकी हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों का पुनर्विकास बेहद जरूरी है, ताकि अनुपचारित सीवेज यमुना में न बहे। अदालत ने कहा कि पुनर्विकास कार्य कई आदेशों के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाया। डीएसआईआईडीसी ने योजनाएं एमसीडी को, एमसीडी ने डीडीए को भेजीं, लेकिन डीडीए के जवाब न देने से मामला अटका है। कोर्ट ने डीडीए को 31 अगस्त को अन्य एजेंसियों के साथ बैठक कर सीवर लाइन व स्टॉर्मवॉटर ड्रेन बिछाने के अनुमोदन की समय-सीमा तय करने का आदेश दिया।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉलोनी के पुनर्विकास में विस्तारित क्षेत्रों को भी शामिल किया जाए। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि डीडीए, उद्योग मंत्रालय, एमसीडी और डीएसआईआईडीसी याचिका में दिए गए बिंदुओं पर विचार करें और समयपुर बादली की पूरी सीमा चिह्नित कर नया प्लान बनाएं।
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अदालत ने कहा, सरकार को वहां जाकर निरीक्षण करना होगा। आप जिम्मेदारी एक-दूसरे पर नहीं डाल सकते। कोर्ट आपके लिए यह काम नहीं कर सकता। फिरनी रोड के लिए डीएसआईआईडीसी को एजेंसी की टिप्पणियों पर आगे बढ़ने का आदेश दिया गया। मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।