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भ्रष्टाचार में लिप्त शख्स को सजा देना जरूरी: HC
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 07 Nov 2014 02:44 AM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार एक गंभीर अपराध है और इसमें लिप्त व्यक्ति को सजा देना जरूरी है, ताकि दूसरों को भी सबक मिल सके।
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कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में एमसीडी के जूनियर इंजीनियर मुकेश मीणा को मिली सजा के फैसले को उचित ठहराते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी अवैध निर्माण रोकने की है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अवैध निर्माण की आड़ में वे रिश्वत ले।
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हालांकि अदालत ने 12 वर्ष चले मुकदमे के आधार पर मुकेश को निचली अदालत से मिली तीन साल की सजा को 18 माह कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गौतमपुरी निवासी मुरारी को एमसीडी के स्लम विभाग से प्लॉट मिला था। इस पर निर्माण करने के एवज में जूनियर इंजीनियर ने 8 मार्च 1992 को मुरारी से 10 हजार रुपये रिश्वत मांगी। मुरारी की शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण शाखा ने मुकेश को गिरफ्तार कर लिया था।
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इस मामले में निचली अदालत ने 24 मार्च 2008 को उसे तीन वर्ष कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। मुकेश ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बुधवार को न्यायमूर्ति मुरलीधर ने मामले में दोषी ठहराए गए मुकेश मीणा के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है।
अदालत ने कहा दोषी के पास से रिश्वत के पांच हजार रुपये बरामद किए गए थे। इससे स्पष्ट है कि उसने रिश्वत ली थी। न्यायमूर्ति मुरलीधर ने कहा कि इस मामले में ट्रायल व अपील में 12 वर्ष बीत गए। ऐसे में वे लंबी अवधि के ट्रायल के आधार पर याची की सजा को घटाकर 18 माह करते हैं। हालांकि अदालत ने जुर्माने की राशि को माफ करने या घटाने से इनकार कर दिया।