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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी की गैर मौजूदगी में दिया गया तलाक अवैध

Fri, 09 Nov 2018 04:37 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 09 Nov 2018 04:37 AM IST
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High Court dismissed decision of one-sided divorce
दिल्ली हाईकोर्ट ने सहमति के आधार पर दिए गए एकतरफा तलाक के फैसले को खारिज कर दिया है। निचली अदालत ने 2007 में पति की दलीलें सुनने के बाद एकपक्षीय फैसला सुनाया था। अदालत के इस फैसले को पत्नी ने चुनौती दी थी, जिसका निबटारा 11 साल बाद हुआ है। 
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जस्टिस अनु मल्होत्रा ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि आपसी सहमति से तलाक याचिका में पति और पत्नी के बीच अलग होने की सहमति विवाद की शुरुआत से लेकर तलाक मंजूर होने तक बनी रहनी चाहिए। 
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निचली अदालत ने इस मामले में याची की गैर मौजूदगी में तलाक का फैसला सुनाया है। हालांकि महिला की अपील की सुनवाई के दौरान ही 2008 में उसके पति की मौत हो गई थी। उसकी ओर से उसके माता-पिता ने याची की दलीलों का जवाब दिया था।  
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महिला ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए दावा किया था कि उसकी गैर मौजूदगी में आपसी सहमति से तलाक की मंजूरी हिंदू मैरिज एक्ट का उल्लंघन, मनमाना व पक्षपातपूर्ण है।  

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि सहमति से तलाक की याचिका पर एक की गैरमौजूदगी पर तलाक के लिए आपसी सहमति की कल्पना कर लेना कानूनन अमानवीय नहीं है। 

हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के मुताबिक तलाक मंजूर होने तक उनके बीच आपसी सहमति का होना जरूरी है। निचली अदालत की जिम्मेदारी बनती है कि वह तलाक मंजूर करने से पहले यह सुनिश्चित करे कि उसमें दोनों पक्षों की सहमति शामिल हो।  
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