फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   High Court Bio-Metric Attendance in Colleges

हाईकोर्ट ने कॉलेजों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस, सिस्टम के खिलाफ याचिका पर मांगा जवाब

Mon, 11 Mar 2019 02:29 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: vivek shukla Updated Mon, 11 Mar 2019 02:29 AM IST
विज्ञापन
High Court Bio-Metric Attendance in Colleges
Bio Metric

दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉलेजों में आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लगाने के खिलाफ दायर याचिका पर आयुष मंत्रालय से जवाब मांगा है। आयुष मंत्रालय के इस फैसले को उत्तराखंड के एक आयुर्वेदिक कॉलेज द्वारा चुनौती दी गई है।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने इस मामले में आयुष मंत्रालय और केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) से इस याचिका के जवाब में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 23 मई को तय की है। यह याचिका उत्तराखंड के उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज की ओर से दायर की गई, जिसमें गत 9 जनवरी को कॉलेजों में आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने को लेकर लिए गए फैसले को खारिज करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया कि बैठक में कॉलेज के कर्मचारियों और छात्रों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लागू करने का फैसला लिया गया था।
विज्ञापन


वहीं, याचिका में आयुष मंत्रालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के फैसले का उल्लंघन बताया गया है, क्योंकि न्यायालय ने आधार को लेकर दिए गए अपने फैसले में कहा था कि किसी भी व्यक्ति पर इसके इस्तेमाल को लेकर दबाव नहीं डाला जा सकता। बैठक में मंत्रालय ने सीसीआईएम को इस सिस्टम के तहत कॉलेजों में औचक निरीक्षण के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिका में बताया गया कि इस बैठक में लिए गए फैसलों को सभी आयुर्वेदिक कॉलेजों को नहीं भेजा गया और ना ही इस फैसले को आयुष मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह साफ किया कि अगर अगली सुनवाई से पहले मंत्रालय द्वारा इस विषय पर कोई भी फैसला लिया जाता है तो मंत्रालय को याचिका पर हुई कार्यवाही का पालन करना होगा।


याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी और सिद्ध महाविद्यालयों में भी निरीक्षण करने के लिए मंत्रालय ने कई निर्देश पारित किए हैं जो कानून के विपरीत हैं, इन निर्देशों को पांच साल के लिए अनुमति दी गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed