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हाईकोर्ट ने रंगदारी और हनी ट्रैप मामले में रिपोर्ट मंगाने का पुलिस आयुक्त को दिया निर्देश, ये था पूरा मामला

Fri, 25 Sep 2020 06:16 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 25 Sep 2020 06:16 PM IST
सार

- महिला ने बिकनी पहने तस्वीरें भेजकर आरोपी को दिया था प्रलोभन, फंसाने के बाद मांगे पांच लाख

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high court ask delhi police commissioner report of honey trap and ransom case
फाइल फोटो - फोटो : social media

विस्तार

हाईकोर्ट ने रंगदारी और हनी ट्रैप मामलों में सभी थानों से रिपोर्ट मंगाने तथा कार्रवाई के लिए स्टैंडिंग आर्डर पास करने का निर्देश दिल्ली पुलिस आयुक्त को दिया है। हाईकोर्ट ने कहा जिस तरह प्रलोभन को स्वीकार करना उचित नहीं है, उसी तरह रंगदारी के लिए प्रलोभन देना भी स्वीकार्य नहीं है। 

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न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने कहा अगर पुलिस आयुक्त को लगता है कि प्रलोभन देकर रंगदारी के मामले 2020 में हुए हैं तो वह इनमें आरोपियों को प्रताड़ित किए बिना कार्रवाई के लिए स्टैंडिंग आर्डर जारी करें। हाईकोर्ट ने यह आदेश दुष्कर्म मामले में आरोपी व्यवसायी को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए दिया है। आरोपी का कहना था कि रंगदारों ने नियोजित तरीके से दुष्कर्म के मामले में फंसाया था।
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न्यायमूर्ति ने कहा इस मामले में पीड़िता और आरोपी के फोटोग्राफ और चैट देखने से साफ है कि आरोपी को प्रलोभन दिया गया और वह उसमेें फंस गया। इस नजरिये से आरोपी को कोर्ट से संरक्षण मिलना चाहिए। इसलिए अगर आरोपी को गिरफ्तार करने की जरूरत पड़ती है तो उसे 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ा जाएगा। वहीं दूसरी आरोपी केस की जांच में पुलिस का सहयोग करेगा और पीड़िता तथा गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा। 

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वहीं हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह पड़ताल करें कि क्या शिकायतकर्ता और उसकी पड़ोसी ऐसे अन्य मामलों में भी शामिल हैं? अगर ऐसा है तो उनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा वह सभी थानों से ऐसे मामलों में रिपोर्ट मंगवाएं और इस बाबत चार सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय करते हुए आदेश की कॉपी पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया है। 

अभियोजन के अनुसार पीड़िता ने निजी सहायिका की नौकरी के सिलसिले में 24 अगस्त को आरोपी को मैसेज किया था। उसने अपनी लोकेशन भी भेजी थी। इसके बाद आरोपी कथित रूप से शराब की बोतल लेकर पहुंचा था। वहां शराब पीने के बाद पीड़ित से दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अपनी पड़ोसन को मदद के लिए बुलाया। जब पड़ोसन वहां आई तो उसने आरोपी को पीड़ित के घर से आरोपी को भागते हुए देखा। 

बचाव पक्ष के अधिवक्ता विकास पाहवा ने अभियोजन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि व्हाट्सएप चैट के अनुसार महिला ने एक जॉब पोर्टल से उनके मुव्वकिल का नंबर हासिल किया था और निजी सहायिका की नौकरी के बारे में पूछा था। जब आरोपी ने इसकी सहमति दी तो महिला ने प्रोफेसनल ड्रेस में फोटो भेजने के बजाय उसने बाथिंग सूट और बिकनी वाली तस्वीरें उसे भेजीं। उसके बाद महिला ने उनके मुव्वकिल की किसी भी बात का विरोध नहीं किया। 

पाहवा ने कहा कि पूरी चैट में कहीं भी वेकेंसी, वेतन या वर्किंग ऑवर का जिक्र नहीं है, बल्कि महिला ने उनके मुव्वकिल को प्रलोभन देने के लिए स्वीम पूल में बिकनी वाली तस्वीरें भेजीं। इसके बाद महिला ने आरोपी को अपने घर बुलाया और उससे पांच लाख रुपये मांगे और जब उसने दिए तो उस पर दुष्कर्म का आरोप लगा दिया। जब उसे एफआईआर के बारे में पता चला तो उसने पुलिस के पास जाकर अपनी बात रखी और आवेदन भी दिया लेकिन महिला व उसकी सहयोगी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

पाहवा ने कहा इन दिनों प्रचलित ऐसे मामलों को तीन श्रेणी में रखा जा सकता। एक, सोशल मीडिया के जरिये अजनबी लोगों से संपर्क करो। दूसरे, अगर वह शख्स जवाब देता है तो इसका मतलब उसकी दिलचस्पी है, उसके बाद उसे तस्वीरें तथा वीडियो भेजकर उसे प्रलोभन दो। तीसरे जब वह शख्स फंस जाए तो उसे घर बुलाकर उसकी वीडियो बनाकर उस पर झूठा आरोप लगाकर धमकी दो और तब पैसे की डिमांड करो।

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