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पक्के नहीं हर्बल रंगों से मनेगी होली, गुलाब, मोगरा जैसे खुशबू वाले रंग की है मांग
Tue, 12 Mar 2019 06:15 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 12 Mar 2019 06:15 PM IST
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रंगों के त्योहार होली को आने में कुछ ही दिन शेष हैं। होली पर मस्ती और एक दूसरे को रंग लगाने के लिए लोग अभी से तैयारियों में जुट गए हैं। ऐसे में बाजार में रंगों की दुकानें भी सज गई हैं। इस बार लोग होली पर मस्ती करने के साथ ही अपनी त्वचा का भी ध्यान रखेंगे। इसके लिए इस बार हर्बल गुलाल की मांग ज्यादा है। बाजार में गुलाब, मैजिक रंग और ब्रांड के साथ कई हर्बल रंग उपलब्ध हैं। इनमें गुलाब, मोगरा और लैवेंडर की खुशबू है।
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रंगों के इस त्योहार में हर्बल रंग और गुलाल की डिमांड बढ़ी है। वहीं मिलावटी और केमिकल वाले रंगों से लोगों ने दूरी बनानी शुरू कर दी है। कारोबारियों की मानें तो केमिकल मिले रंगों की बिक्री आधे से भी कम हो गई है। महंगा होने के बावजूद ग्राहक हर्बल रंग और गुलाल को खासा तवज्जो दे रहे हैं। बाजार में केमिकल वाले रंग 25 से 150 रुपये के मिल रहे हैं। साधारण गुलाल 55 से 85 रुपए प्रति किलो मिल रहा है। वहीं हर्बल कलर 180-220 रुपए प्रति डिब्बी और गुलाल 120 से 160 रुपए किलोग्राम बिक रहा है।
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घटी पक्के रंगों की मांग
व्यापारी संदीप व लालचंद ने बताया कि हर साल पक्के रंग की मांग कम होती जा रही है। इस बार तो इनकी मांग पिछले साल से आधी रह गई है। सभी लोग त्वचा को लेकर जागरूक हो गए हैं। बिक्री कम होने का कारण माल भी कम मंगवाया जा रहा है।
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त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं अप्राकृतिक रंग
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज मेहता ने बताया कि अप्राकृतिक रंग त्वचा को हानि पहुंचा सकते हैं। इससे केमिकल रंगों से त्वचा पर चकत्ते, खुजली, लाल दाने बन जाते हैं। इन रंगों में कांच और स्टोन के टुकड़े रहते हैं। जब इनको त्वचा पर रगड़ कर लगाया जाता है तो यह निशान बना देते हैं। इस लिए इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।