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हेरा-फेरी के लेखक ने खोला राज, परेश रावल का किरदार उनके ही किसी अपने से है प्रेरित
Sat, 14 Sep 2019 03:17 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Sat, 14 Sep 2019 03:17 PM IST
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- फोटो : लाल सिंह
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आज की दुनिया मोबाइल और गूगल में मानो कैद सी हो गयी है, जबकि हमारी नजरों के सामने ऐसे ऐसे किरदार होते हैं जो आपको पूरी कहानी दे जाते हैं। बशर्ते हमारी आंख और कान खुले हों, क्योंकि ज्यादातर फिल्मों में हम उन्हीं किरदारों को लेते हैं जो हमारे आसपास घूमते फिरते हैं, न कि गूगल से।
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कंप्यूटर हमें जानकारी तो दे सकता है लेकिन वो उन किरदार को क्रिएट नहीं कर सकता जो आपको आसपास नजर आते हैं। जैसे कि हेराफेरी का किरदार लिखते हुए मुझे उन्हीं के सेक्रेटरी का ख्याल आया और मैंने परेश रावल से कहा की आप अपने सेक्रेटरी को ध्यान से देखे क्योंकि अगला किरदार आपका यही है।
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यह कहना था ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल के अंतिम दिन स्क्रीनप्ले राइटर आनंद एस. वर्धन का जिन्होंने हेरा फेरी, आवारा पागल दीवाना, खिलाडियों का खिलाड़ी जैसी कई मनोरंजक फिल्में लिखी हैं।
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इस अवसर पर रवांडा के उच्चायुक्त अर्नेस्ट रवामुको, पनामा के मिशन दूतावास के उपप्रमुख रिकार्डो ए ब्रना, उज़्बेकिस्तान के मिशन दूतावास के उपप्रमुख अजामोन मंसूरोव, लेखिका कुमकुम चड्ढा, सीनियर लॉयर अनूप बॉस और प्रसिद्ध लेखक गंगा प्रसाद विमल उपस्थित हुए।
इस अवसर पर संदीप मारवाह ने सभी छात्रों को संबोधित करते हुए कहा की यह लोग जो मंच पर बैठे हैं, इनके अंदर ज्ञान रुपी गंगा बह रही है। अब इनसे जो ले सकते हो ले लो क्योंकि यह तुम्हारा सीखने का टाइम है और न सिर्फ सुनो उसे समझो भी, मुझे बड़ी खुशी है कि छात्रों ने तीन दिवसीय इस फेस्टिवल में बढ़चढ़कर भाग लिया और कार्यक्रम को सफल बनाया।
अजामोंन मंसूरोव ने कहा की भारत और उज़्बेकिस्तान के साहित्य के शब्द मिलते जुलते हैं और हमारे देश में अब भारत की कई युनिवर्सिटी खुल गई है, साहित्य के बारे में मैं यह कहना चाहता हूं कि फिल्म और साहित्य किन्हीं दो देशों को जोड़ने का बहुत अच्छा साधन है।
रिकार्डो ए ब्रना ने कहा कि कविता और साहित्य कभी आप रटकर नहीं लिख सकते और न कोई स्कूल आपको यह सब सीखा सकता है यह सब आपके सोल में होता है, जिसे आप शब्दों का रूप दे देते हैं।
अर्नेस्ट रवामुको ने कहा कि एबिलिटी हमारे अंदर की गहराईयों में छिपी होती है बस हमें उसे निकालना आना चाहिए। इस अवसर पर लेखिका कुमकुम चड्ढा की पुस्तक 'द मैरीगोल्ड स्टोरी' का विमोचन किया गया, साथ ही प्रसिद्ध लेखक गंगा प्रसाद विमल को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाज़ा गया।