केजरी के जाने से शीला की हेल्पलाइन भी फंसी
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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की महत्वाकांक्षी योजना 'वूमन इन डिस्ट्रेस' हेल्पलाइन 181 को खुद ही हेल्प की जरूरत आन पड़ी है।
यह हेल्पलाइन 16 दिसम्बर 2012 को वसंत विहार गैंगरेप की घटना के बाद तत्कालीन पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार और तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने महिलाओं को संकट से बचाने और तुरंत मदद उपलब्ध कराने के लिए शुरू की थी। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि महिला हेल्पलाइन की कर्मचारियों को पिछले दो महीने से सैलरी नहीं दी गई। साथ ही 31 दिसम्बर 2013 के बाद से उनका रिन्युअल भी नहीं किया गया।
हेल्पलाइन में नियुक्त किए सारे कर्मचारी आउटसोर्स प्रक्रिया के तहत चुने गए थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में किसी की सरकार न होने की वजह से अब उन्हें सैलरी मिल पा रही।
उपराज्यपाल को लिखी चिट्ठी
हेल्पलाइन की प्रमुख और महिला अधिकार कार्यकर्ता खदीजा फारूकी ने उपराज्यपाल नजीब जंग को पत्र लिखकर सभी वर्करों की सैलरी देने और समय-समय पर हेल्पलाइन के रिव्यू की मांग की है।
पत्र में लिखा है कि हमें पिछले दो महीने से सैलरी नहीं मिल रही है साथ ही सितंबर 2013 के बाद से हेल्पलाइन का कोई रिव्यू भी नहीं किया गया। उन्होंने लिखा कि सभी वर्करों का भविष्य अंधेरे में है। यह भी बताया कि पूर्व सीएम शीला दीक्षित द्वारा अस्पतालों और अदालतों में 'क्राइसिस सेल' श़ुरू करने व किसी भी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 181 के कर्मचारियों को तीन मोबाइल वैन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया।
हेल्पलाइन में फोन कॉल अटेंड करने के लिए 12 महिलाओं की टीम बनाई गई थी। ये सभी महिलाएं या तो कमजोर वर्ग से हैं या फिर किसी हिंसा की शिकार व अकेले परिवार चलाने वाली हैं। इनके अलावा चार सुपरवाइजर भी काम करते हैं।
अगली सरकार तय करेगी भविष्य
फारूकी ने लिखा कि उनकी टीम ने हेल्पलाइन चलाने के लिए दिन-रात एक करके मेहनत की। साथ ही वे लोग 7 लाख से ज्यादा कॉल रिसीव करने के साथ ही एक नया एडवांस कंप्यूटर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम बनाने की भी कोशिश कर रही हैं। 7 लाख में से 75 हजार अपराध बहुत ही जघन्य होते हैं।
दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकरी ने बताया कि हेल्पलाइन को एक महीने का एक्सटेंशन मिल सकता है। इसे 31 मार्च तक रिन्यू करने का निर्णय लिया गया है। दिल्ली में कोई सरकार न होने की वजह से हेल्पलाइन का कॉन्ट्रैक्ट एक साल के लिए रिन्यू नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन और इसके कर्मचारियों का भविष्य अगली सरकार पर ही निर्भर करता है। इसके अलावा इस हेल्पलाइन को एंटी करप्शन और कंज्यूमर ग्रीवांस रिड्रेशल के यूनीफाइड हेल्पलाइन सिस्टम से जोड़ने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।