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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Heavy metal levels in vegetables grown along the Yamuna banks up to 97 times the permissible limit.

Delhi NCR News: यमुना किनारे उगी सब्जियों में मानक से 97 गुना तक भारी धातु

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 09:21 PM IST
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डीयू के अध्ययन में निकेल, क्रोमियम, कैडमियम और सीसा की चिंताजनक मात्रा मिली
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किसानों और बाजार में सब्जियों की नियमित जांच की सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
दिल्ली। दिल्ली में यमुना नदी के प्रदूषण का असर नदी किनारे उगाई जाने वाली सब्जियों पर भी पड़ रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के एक अध्ययन में इन सब्जियों में निर्धारित सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक भारी धातुएं पाई गई हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, प्रदूषित पानी से सिंचाई के कारण पौधों की जड़ें मिट्टी और पानी में मौजूद धातुओं को अवशोषित कर रही हैं, जो सब्जियों के जरिए मानव शरीर तक पहुंच सकती हैं। अध्ययन ऐलिसेवियर प्रकाशन की पत्रिका एनर्जी नेक्सस में प्रकाशित हुआ है।
शोध दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. दीनबंधु साहू के नेतृत्व में किया गया। इसमें धर्मेंद्र कुमार, संजुक्ता साहू और शिवांकर अग्रवाल ने भी योगदान दिया। शोध में यमुना के सीमित हिस्से, खासकर कालिंदी कुंज और गीता कॉलोनी के आसपास के कृषि क्षेत्रों को शामिल किया गया।
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प्याज में निकेल 65 तो पालक में 97 गुना ज्यादा
अध्ययन में प्याज में निकेल निर्धारित सीमा से 65 गुना और पालक में 97 गुना अधिक पाया गया। सफेद मूली में क्रोमियम 11 गुना, पालक में 12 गुना और सरसों में 22 गुना अधिक दर्ज किया गया। लाल मूली में मोलिब्डेनम 340.06 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम और क्रोमियम 36.58 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक मिला। मेथी में जिंक 177.72 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम, धनिया में निकेल 19.91 और कैडमियम 1.59 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम पाया गया। सरसों में सीसा 5.86 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। शोध में भारी धातुओं के संपर्क से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम का आकलन करने के लिए हैजर्ड इंडेक्स भी देखा गया। शोधकर्ताओं ने इसे चिंताजनक स्तर पर पाया और लंबे समय तक ऐसी सब्जियों के सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई।
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प्रदूषित इलाकों में खेती पर निगरानी की सिफारिश
अध्ययन में अधिक प्रदूषित इलाकों में ऐसी फसलों की खेती रोकने की सिफारिश की गई है, जो भारी धातुओं को अधिक मात्रा में अवशोषित करती हैं। शोधकर्ताओं ने खेतों की मिट्टी और बाजार में पहुंचने वाली सब्जियों की नियमित जांच कराने तथा नालों के प्रदूषित पानी को नदी और खेतों तक पहुंचने से पहले उपचारित करने के नियम सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है।
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कोट
हमारे अध्ययन में यमुना किनारे की मिट्टी और सब्जियों में भारी धातुओं का प्रदूषण चिंताजनक स्तर पर मिला है। बिना साफ किए नाले और यमुना के पानी से सिंचाई होने पर ये धातुएं पौधों के जरिये सब्जियों में पहुंच रही हैं।

-प्रो. दीनबंधु साहू, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग
लेड और कैडमियम का लंबे समय तक संपर्क नर्वस सिस्टम, किडनी और बच्चों के विकास को प्रभावित कर सकता है। हालांकि हर सब्जी या पूरी दिल्ली को खतरे में मानना सही नहीं होगा, क्योंकि प्रदूषण का स्तर जगह के अनुसार बदलता है। सब्जियों को अच्छी तरह धोना और साफ पानी से सिंचाई पर निगरानी जरूरी है।
-डॉ. नीरज निश्चल, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, एम्स
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