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Delhi NCR News: एमसीडी बजट पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
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पक्ष ने दिल्ली के विकास के लिए बजह को बताया बेहतरीन, विपक्ष ने दिखावटी करार दिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी के सदन में बृहस्पतिवार को बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर छींटाकशी, आरोप-प्रत्यारोप और नोकझोंक देखने को मिली। इस दौरान सदन का माहौल बार-बार गरमाता रहा और कई बार शोर-शराबे की स्थिति पैदा हुई। बैठक में 28 पार्षदों ने विचार रखे, लेकिन चर्चा के साथ-साथ सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे शब्दों का आदान-प्रदान भी होता रहा। सत्ता पक्ष जहां बजट को दिल्ली के विकास, स्वच्छता और हरित शहर के लक्ष्य से जोड़कर पेश कर रहा था, वहीं विपक्ष इसे जनता की जरूरतों से दूर और दिखावटी करार देता रहा।
सत्ता पक्ष के पार्षदों ने बजट की तारीफ करते हुए कहा कि यह निगम के राजस्व को मजबूत करने और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने वाला है। उन्होंने अवैध पार्किंग को लाइसेंस देने, पीपीपी मॉडल पर खेल परिसरों के निर्माण, हरित कचरे के बेहतर उपयोग, ग्रामीण इलाकों के लिए विशेष प्रावधान, महिला कर्मचारियों के लिए विश्राम गृह, हर वार्ड में जेसीबी और सुपर सकर मशीन तथा यूनीपोल सर्वे जैसे प्रस्तावों को गिनाते हुए इसे दूरदर्शी बजट बताया। इस दौरान विपक्ष की ओर से बार-बार टोका-टोकी की गई, जिस पर सत्ता पक्ष के पार्षदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
विपक्षी पार्षदों ने बजट पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इसमें सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, वेतन-पेंशन और बुनियादी सुविधाओं के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है। उनका कहना था कि बजट में न डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था मजबूत करने की योजना है, न ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने का कोई प्रावधान है। सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए विपक्ष पर केवल विरोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं, विपक्ष ने सड़कों की खराब हालत, गड्ढों, नालों की सफाई, पार्कों में कर्मचारियों की कमी और लावारिस पशुओं की समस्या जैसे मुद्दों को उठाया। विपक्ष ने बजट को जनता की प्राथमिकताओं से कटे होने का आरोप लगाया, तो सत्ता पक्ष ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर सकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज कर रहा है। चर्चा के दौरान अतिक्रमण के खिलाफ टास्क फोर्स बनाने और इसके लिए बजट में विशेष प्रावधान का सुझाव भी दिया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी के सदन में बृहस्पतिवार को बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर छींटाकशी, आरोप-प्रत्यारोप और नोकझोंक देखने को मिली। इस दौरान सदन का माहौल बार-बार गरमाता रहा और कई बार शोर-शराबे की स्थिति पैदा हुई। बैठक में 28 पार्षदों ने विचार रखे, लेकिन चर्चा के साथ-साथ सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे शब्दों का आदान-प्रदान भी होता रहा। सत्ता पक्ष जहां बजट को दिल्ली के विकास, स्वच्छता और हरित शहर के लक्ष्य से जोड़कर पेश कर रहा था, वहीं विपक्ष इसे जनता की जरूरतों से दूर और दिखावटी करार देता रहा।
सत्ता पक्ष के पार्षदों ने बजट की तारीफ करते हुए कहा कि यह निगम के राजस्व को मजबूत करने और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने वाला है। उन्होंने अवैध पार्किंग को लाइसेंस देने, पीपीपी मॉडल पर खेल परिसरों के निर्माण, हरित कचरे के बेहतर उपयोग, ग्रामीण इलाकों के लिए विशेष प्रावधान, महिला कर्मचारियों के लिए विश्राम गृह, हर वार्ड में जेसीबी और सुपर सकर मशीन तथा यूनीपोल सर्वे जैसे प्रस्तावों को गिनाते हुए इसे दूरदर्शी बजट बताया। इस दौरान विपक्ष की ओर से बार-बार टोका-टोकी की गई, जिस पर सत्ता पक्ष के पार्षदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
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विपक्षी पार्षदों ने बजट पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इसमें सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, वेतन-पेंशन और बुनियादी सुविधाओं के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है। उनका कहना था कि बजट में न डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था मजबूत करने की योजना है, न ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने का कोई प्रावधान है। सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए विपक्ष पर केवल विरोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं, विपक्ष ने सड़कों की खराब हालत, गड्ढों, नालों की सफाई, पार्कों में कर्मचारियों की कमी और लावारिस पशुओं की समस्या जैसे मुद्दों को उठाया। विपक्ष ने बजट को जनता की प्राथमिकताओं से कटे होने का आरोप लगाया, तो सत्ता पक्ष ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर सकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज कर रहा है। चर्चा के दौरान अतिक्रमण के खिलाफ टास्क फोर्स बनाने और इसके लिए बजट में विशेष प्रावधान का सुझाव भी दिया गया।
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