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गर्मी का सितम : भीषण तपिश पक्षियों को ले जा रही मौत के नजदीक
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 20 May 2016 01:24 AM IST
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गुड़गांव के पक्षी अस्पताल में उपचाराधीन पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
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परिंदे आपके चंद दानों और पानी के मोहताज हैं। गर्मी की तपिश उन्हें मौत के नजदीक ले जा रही हैं। आशियाना न सही उन्हें दाना-पानी जरूरी दीजिए, क्योंकि आपके डाले हुए चंद दानों व थोड़े से पानी से इन बेजुबानों की जिंदगी बच सकती है।
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गर्मी के सितम से केवल इंसान ही नहीं, परिंदे भी परेशान हैं। वह लू, डायरिया और सूखा रोग की चपेट में आ रहे हैं तो कई मौत के शिकार हो चुके हैं। गुड़गांव के एकमात्र चैरिटेबल बर्ड्स अस्पताल में हर दिन बीमार और जख्मी परिंदों को लेकर लोग पहुंच रहे हैं।
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अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, जख्मी परिंदों के मामले में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। हर दिन दो-चार पक्षी अस्पताल पहुंचने से पहले ही मर जाते हैं। घरों से बाहर निकले छज्जे और ओट में रहने वाले पक्षियों के लिए एसी की गर्मी खतरनाक साबित हो रही है।
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मई महीने में अब तक 250 से अधिक पक्षियों का इलाज किया गया है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे बीमार परिंदों की संख्या में इजाफा हो सकता है। इस अस्पताल में 200 बेड हैं, इन दिनों सभी फुल हैं।
अस्पताल में हर दिन लू, सूखा रोग, चिकन पॉक्स और डायरिया से पीड़ित करीब एक दर्जन पक्षी अस्पताल पहुंच रहे हैं। पक्षियों से प्रेम करने वाले लोग उन्हें अस्पताल पहुंचा जाते हैं। कई लोग डायरिया व लू से पीड़ित पक्षियों को लेकर आ रहे हैं।
गुड़गांव के पक्षी अस्पताल में पक्षी को दवा पिलाते डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
कम तापमान के आदी होते हैं पक्षी
चैरिटी बर्ड्स अस्पताल के डॉ. राजकुमार कहते हैं पक्षियों के लिए आदर्श तापमान 35 डिग्री सेल्सियस है। इससे अधिक तापमान घातक है। गर्मी की वजह से खुले में पक्षियों को पानी नहीं मिल रहा है।
जो मिल रहा है, वह काफी गर्म है। जिससे पक्षी बीमार पड़ रहे हैं। बीमार होने वाले पक्षियों में सबसे ज्यादा कबूतर हैं। घरों में शौकिया तौर पर पालने वाले पक्षियों में ऑस्ट्रेलियन व अफ्रीकन प्रजाति के बृजरी, कोकटल, लम्बर्ड और फ्रेंच चिडिय़ा हैं। ये पक्षी कम तापमान में रहने के आदी होते हैं। जब अचानक तापमान में इजाफा होता है तो अपने को इस माहौल में ढाल नहीं पाते और बीमार पड़ जाते हैं।
पेड़ की कमी भी दे रही है बीमारी
शहर में पेड़ों की संख्या में भी भारी कमी हो गई है जिससे पक्षियों को तेज धूप से बचना मुश्किल हो जाता है लिहाजा वे आसमान में लगातार उड़ते रहते हैं। जिससे गर्मी के कारण उनके शरीर में पानी की कमी हो जाती है और वे कमजोर होकर जमीन पर गिर जाते हैं।
कैसे करें पक्षियों की हिफाजत
डॉ. राजकुमार बताते हैं कि लोगों के थोड़े से प्रयास से पक्षियों को जीवनदान दिया जा सकता है। छत के छांव वाले हिस्से में मिट्टी के बर्तन में पानी रखें। हर दिन पानी बदल दें। साफ पानी रखें। जिससे पक्षी सेहतमंद रहे। अगर कोई गिरा हुआ या बीमार पक्षी मिले तो उसका सिर बाहर रखकर पानी में डाले। सिर पर हल्का बर्फ लगाएं। जिससे उसकी जान बच सकती है।
चैरिटी बर्ड्स अस्पताल के डॉ. राजकुमार कहते हैं पक्षियों के लिए आदर्श तापमान 35 डिग्री सेल्सियस है। इससे अधिक तापमान घातक है। गर्मी की वजह से खुले में पक्षियों को पानी नहीं मिल रहा है।
जो मिल रहा है, वह काफी गर्म है। जिससे पक्षी बीमार पड़ रहे हैं। बीमार होने वाले पक्षियों में सबसे ज्यादा कबूतर हैं। घरों में शौकिया तौर पर पालने वाले पक्षियों में ऑस्ट्रेलियन व अफ्रीकन प्रजाति के बृजरी, कोकटल, लम्बर्ड और फ्रेंच चिडिय़ा हैं। ये पक्षी कम तापमान में रहने के आदी होते हैं। जब अचानक तापमान में इजाफा होता है तो अपने को इस माहौल में ढाल नहीं पाते और बीमार पड़ जाते हैं।
पेड़ की कमी भी दे रही है बीमारी
शहर में पेड़ों की संख्या में भी भारी कमी हो गई है जिससे पक्षियों को तेज धूप से बचना मुश्किल हो जाता है लिहाजा वे आसमान में लगातार उड़ते रहते हैं। जिससे गर्मी के कारण उनके शरीर में पानी की कमी हो जाती है और वे कमजोर होकर जमीन पर गिर जाते हैं।
कैसे करें पक्षियों की हिफाजत
डॉ. राजकुमार बताते हैं कि लोगों के थोड़े से प्रयास से पक्षियों को जीवनदान दिया जा सकता है। छत के छांव वाले हिस्से में मिट्टी के बर्तन में पानी रखें। हर दिन पानी बदल दें। साफ पानी रखें। जिससे पक्षी सेहतमंद रहे। अगर कोई गिरा हुआ या बीमार पक्षी मिले तो उसका सिर बाहर रखकर पानी में डाले। सिर पर हल्का बर्फ लगाएं। जिससे उसकी जान बच सकती है।