मां के पेट में बच्चे को आया हार्ट अटैक
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डॉक्टरों ने समय रहते पता चल जाने से गर्भ में पल रहे शिशु का हार्ट फेल होने से बचा लिया। अल्ट्रा साउंड से बच्चों की बीमारी का पता चल जाने पर डॉक्टरों ने मां के प्लेसेंटा के जरिए दवा देकर बच्चों की जान बचाई।
बीएलके सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल के चिल्ड्रेन हार्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक और विभाग के प्रमुख डॉ. विकास कोहली ने बताया कि सात महीने के गर्भ में हार्ट फेल के दो मामले को सफलतापूर्वक ठीक किया गया।
उन्होंने बताया कि गर्भस्थ शिशु की दिल की धड़कन को नियंत्रित करने के लिए मां के प्लेसेंटा के जरिए दवा दी जाती है।
अल्ट्रासाउंड से पता चला ये मामला
हरियाणा के सोनीपत निवासी कोमल अरोड़ा रूटीन चेकअप के लिए आई थीं। उनकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भ में मौजूद शिशु में हार्ट फेल की स्थिति का पता चला। लाइमा कौर चड्ढा के गर्भ में पल रहे शिशु में भी यही समस्या थी। दोनों मामलों में मां के प्लेसेंटा से दवा देकर बच्चे के हृदय रोग को ठीक किया गया।
डॉ. कोहली ने बताया कि यह कोई नया मामला नहीं है, लेकिन अब ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। समय से अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु की जानकारी मिलने पर उसकी बीमारी को दूर किया जा सकता है।
ऐसे मामले में बच्चे की धड़कन काफी तेज चलती है। हार्ट फेल होने का भी खतरा रहता है। ऐसे बच्चों का हार्ट बीट्स प्रति मिनट 200 बीपीएम होती है, जबकि एक सामान्य भ्रूण की धड़कन 120 से 160 बिट्स प्रति मिनट होती है।