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यूपी: मजहबी प्रार्थना करवाने का आरोप लगा हेडमास्टर को किया निलंबित, छात्रों ने स्कूल जाना किया बंद

Tue, 22 Oct 2019 09:03 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 22 Oct 2019 09:03 AM IST
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Headmaster suspended for Iqbal poem, resentment among students
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : demo

एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल की स्थानीय इकाई की शिकायत पर निलंबित कर दिया गया। मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले का है। संगठनों का आरोप है कि छात्र सुबह की प्रार्थना में सांप्रदायिक गीत गा रहे थे। शुरुआती जांच में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) उपेंद्र कुमार ने जांच में पाया कि स्कूल में बच्चे सुबह की प्रार्थना में कोई सांप्रदायिक नहीं बल्कि 'लब पे आती है दुआ' नाम की कविता गाते थे।

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कविता 'लब पे आती है दुआ' को अल्लामा इकबाल के नाम से प्रसिद्ध मोहम्मद इकबाल ने 1902 में लिखा थी। इकबाल ने ही प्रसिद्ध पंक्ति 'सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा' को भी लिखा है।
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अंग्रेजी अखबार के अनुसार, प्राथमिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा है कि शुरुआती जांच में पाया गया कि प्रधानाध्यापक एक अलग प्रार्थना सुन रहे हैं। लेकिन बाद में यह पाया गया कि वह इकबाल द्वारा लिखी गई देशभक्ति की कविता ही प्रार्थना में गाई जाती थी। बीएसए और डीएम ने तथ्यों की जांच किए बिना ही जल्दबाजी में प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया।
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उन्होंने शिक्षा निदेशालय से रिपोर्ट मांगी है और प्रधानाध्यापक अली के निलंबन को जल्द ही रद्द कर दिया जाएगा। उन्होने कहा कि हम सभी स्कूलों को एक सामान्य नोटिस भी जारी करेंगे कि सुबह की सभा में केवल उन्हीं प्रार्थनाओं का पाठ किया जाए जो शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित हैं।

प्राथमिक शिक्षा के उप निदेशक अशोक कुमार ने कहा कि वे सिर्फ मामले की जांच कर रहे थे। कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा की गई थी। हम इस मामले की जांच कर जल्द ही रिपोर्ट सौंपेंगे। विहिप के जिला प्रमुख अंबरीश मिश्रा ने मामले पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

विरोध करने वाले छात्रों के समूह का नेतृत्व करने वाले पांचवीं कक्षा के एक छात्र ने कहा कि जब हमने इस कविता को अपनी उर्दू किताब में पढ़ा तो यह हमें अच्छी लगी। मुस्लिम और हिंदू छात्रों ने अपने प्रधानाध्यापक से इसे सुनाने की अनुमति मांगी और उन्होंने उनको मना नहीं किया। उन्होंने छात्रों को वैकल्पिक दिनों में इसे गाने की अनुमति दे दी।

समूह में मौजूद एक कक्षा चार के छात्र ने कहा कि हमें  'लब पे आती है दुआ' और 'वो शक्ति हमें दो दयानिधि' सुनाने की अनुमति देने पर अगर उनको निलंबित कर दिया गया है तो इसको हमारे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के लिए सरकार की भी गलती है। तो क्या सरकार को निलंबित कर देना चाहिए?

इस बात को मुद्दा बनाते हुए कक्षा पांच के छात्र ने बताया कि मोदीजी ने खुद ही तो कहा है कि हिंदू और मुसल्मान एक ही हैं तो हम इन कविताओं का पाठ नहीं कर सकते क्या? इस कविता का अर्थ पूछने पर छात्रों ने उसका समर्थन करते हुए कहा कि हां यह एकता के बारे में लिखी गई कविता है।

अली के निलंबन के बाद नए प्रधानाध्यापक रेहान हुसैन ने बताया कि छात्र उनके निलंबन और अनुपस्थिति से खुश नहीं हैं। अली की मौजूदगी में प्रतिदिन लगभग 150 छात्र स्कूल आते थे जबकि गुरुवार को सिर्फ पांच छात्र ही स्कूल आए थे।  

ब्लॉक शिक्षा प्रमुख ने बताया कि छात्रों का अली से बहुत लगाव था। उनकी उपस्थिति अली से जुड़ी हुई थी। कई छात्रों के माता-पिता के अनुसार, अली के निलंबन के बाद से उनके बच्चे परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम आने वाले दिनों में उपस्थिति में सुधार की उम्मीद करते हैं।

कक्षा चार में पढ़ने वाले 13 वर्षीय छात्र की मां कृष्णा देवी (45) ने कहा कि उन्होंने छात्रों को यह नहीं बताया कि उन्हें निलंबित क्यों किया गया है। मेरा बेटा वास्तव में हेडमास्टर को पसंद करता है और जब से वह हटा दिए गए हैं, तब से उसने खाना बंद कर दिया है। राजेश कुमार (38) के बेटे कक्षा दो और पांच कक्षा में पढ़ते हैं। पेशे से वह बढई हैं। उनका कहना है कि सभी बच्चे हेडमास्टर की हर समय प्रशंसा करते रहते हैं। वे कहते हैं कि वह अपनी जेब से स्कूल के लिए पैसा खर्च करते थे।

बीईओ ने कहा कि अली ने नियमित रूप से स्कूल के बुनियादी ढांचे पर अपना पैसा खर्च किया। उन्होंने लगभग 65,000 रुपये का एक प्रोजेक्टर खरीदा और एक स्मार्ट क्लासरूम शुरू किया। वह स्कूल के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए नियमित रूप से अपने वेतन से योगदान देते थे। अगर विभाग उसे किसी काम के लिए 5,000 रुपये देता था और अगर काम के लिए 7,000 रुपये की आवश्यकता होती थी, तो वह अपनी जेब से पैसे जोड़ लिया करते थे।

अली 2011 में स्कूल में शामिल हुए थे। उन्होंने दावा किया कि प्राथमिक विद्यालय में 71 छात्रों को दाखिला दिया गया था। मैंने स्कूल को ईंट-ईंट से बनाया है। स्कूल में छात्रों के बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। अब एक स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध है। मैं अपनी जेब से नियमित रूप से खर्च करता हूं क्योंकि मैं छात्रों से प्यार करता हूं।

कौन हैं प्रधानाध्यापक फारुख अली ?

अली सात भाई-बहन हैं। जब वह कक्षा 4 में थे तब उनकी मां की मृत्यु हो गई थी। उनके पिता सब्जियां बेचा करते थे। उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण मेरे लिए शिक्षा पूरी करना आसान नहीं था।

अली को 2009 में अपना बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (BTC) मिला और वह पहली बार बीसलपुर ब्लॉक के सरकारी प्राइमरी स्कूल में तैनात हुए। वह 2011 में घीसपुर में प्राथमिक विद्यालय में तैनात थे।

 
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