हड़ताल के बाद पटरी पर लौटी चिकित्सा-व्यवस्था
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो दिनों की हड़ताल के बाद बुधवार सुबह दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर काम पर लौट आए। बिना इलाज के लौट रहे मरीजों को बुधवार सुबह राहत मिली। हर दिन की तरह मरीज अस्पताल पहुंचने शुरू हुए और इलाज के लिए पंजीकरण कराया। वार्ड में भर्ती मरीजों की भी जांच शुरू हो गई और बीमारी की गंभीरता को देखते हुए जिन मरीजों को सर्जरी की जानी है, अब उनकी सर्जरी की तारीख तय की जा रही है।
सभी अस्पतालों में सुबह 9 बजे से ओपीडी सेवा शुरू हो गई और आपातकालीन सेवा पहले की तरह से सामान्य तरीके से चली। कई अस्पतालों में बैठकें चलीं और इस पर राय बनाई गई कि जिनकी सर्जरी टालनी पड़ी, उन मरीजों को कैसे नई तारीख दी जाए। वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि एक-दो दिन में हड़ताल से गड़बड़ हुई स्थिति को सुधार लिया जाएगा।
गाजियाबाद की पसौंडा इलाके की रहने वाली गुलशमा लोक नायक अस्पताल में बेटी का इलाज कराने पहुंचीं। उन्होंने बताया कि नौ बजे नंबर लगा लिया था और करीब 11 बजे तक डॉक्टर ने मरीज भी देख लिया। बच्ची को सीटी स्कैन के लिए डॉक्टर ने कहा था वह भी हो गया है अब रिपोर्ट दिखानी है। उन्होंने कहा कि आज रिपोर्ट दिखा पाना संभव नहीं लग रहा है।
15 अगस्त तक मिलेगी यहां सारी दवाएं
नंद नगर से पत्नी का इलाज कराने पहुंचे जय प्रकाश ने बताया कि दो दिनों से चिकित्सकों की हड़ताल थी इस वजह से बुधवार को इलाज कराने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि नंबर लगा लिया है अब डॉक्टर के आने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्नी को ट्यूबरक्यूलोसिस है और इसके लिए शाम में ओपीडी लगती है।
चांदनी चौक इलाके से चाची का इलाज कराने आए आरिफ ने कहा कि हड़ताल की वजह से आज अस्पताल में भीड़ ज्यादा है। नंबर लगाने के बाद दो घंटे से इलाज के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. पंकज सोलंकी का कहना है कि रेजिडेंट डॉक्टरों को भरोसा है कि सरकार तय समय-सीमा में उनकी मांगों को पूरा कर देगी। एमसीडी अस्पतालों में रेजिडेंट को आ रही दिक्कत को दूर करने के लिए एमसीडी के एडीशनल कमिशनर और भारत सरकार के अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों की समस्या को दूर करने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव के साथ बैठक हुई। कहा गया है कि तय समय से मांग पूरी होगी।
डॉ. सोलंकी ने कहा कि अस्पतालों की सुरक्षा को 30 दिनों के अंदर पुख्ता कर लिया जाएगा कुछ अस्पतालों में अब भी से दिल्ली पुलिस की तैनाती की गई है। नर्सिंग अर्दली और नर्सिंग वार्डली के रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए छह माह का समय दिया गया है।
15 अगस्त तक सभी अस्पतालों में सौ फीसदी जेनेरिक दवा उपलब्ध करा दी जाएंगी। पेरिफेरल अस्पतालों में बंद पड़े आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर को तीन माह में शुरू करने का निर्णय लिया गया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि रेजिडेंसी स्कीम को भी जल्द से जल्द लागू किया जाएगा।
मरीजों के लिए हड़ताल और उन्हीं को दिक्कत
रेजिडेंट डॉक्टर्स का कहना है कि मरीजों को इलाज में कोई दिक्कत न हो और उन्हें सभी तरह की दवाइयां अस्पताल में मिल पाएं, इसीलिए हड़ताल करने का निर्णय लिया गया था। दिल्ली सरकार ने डॉक्टरों की इन मांगों को पहले ही दिन मान लिया था, लेकिन डॉक्टर हड़ताल पर नहीं लौटे। हड़ताल की वजह से दिक्कतें हुई और उसी स्थिति में डॉक्टर काम पर लौट आए।
शाम होने के बाद मामूली रुप से गंभीर मरीज आने पर भी बाहरी दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली के अस्पतालों से मरीजों को बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। इसकी वजह से इन अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ जाता है।
अब निर्णय लिया गया है कि इन अस्पतालों से मरीज को सोच-समझ कर रेफर किया जाएगा, क्योंकि इन अस्पतालों में आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर को जल्द शुरू करने का निर्णय लिया गया है। रेफर करने से अंबेडकर, डीडीयू और जीटीबी अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ जाता है, इसी वजह से इन अस्पतालों में हड़ताल भी ज्यादा होती है।