पिता को तड़पा-तड़पा कर मारने वाले को मिली सजा
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दिल्ली हाईकोर्ट ने पिता की हत्या के लिए निचली अदालत से उम्रकैद की सजा पाए दोषी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस बात के ठोस साक्ष्य हैं कि दोषी मनमोहन ने संपत्ति के लिए पिता की गला घोंटकर हत्या की थी।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंद राजयोग व न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने हाल ही में दिए फैसले में मनमोहन के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है और घटना के समय वह घर पर नहीं था। याची ने कहा था कि निचली अदालत का फैसला ठीक नहीं है। अत: इसे खारिज किया जाए।
पिता को कर दिया बेदखल
खंडपीठ ने कहा कि परिस्थितियों व अन्य साक्ष्यों से स्पष्ट है कि दोषी के पास हत्या का काफी ठोस आधार था। जिस मकान में वह रह रहा था वह संपत्ति उसके पिता की थी और पिता ने उसे बेदखल कर दिया था।
पिता की मृत्यु के बाद उसे ही फायदा होना था। उसने पिता की हत्या के मामले को प्राकृतिक मौत ठहराने का प्रयास किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, चिरंजी लाल का नंद नगरी में मकान था और वह प्रथम मंजिल पर रहता था।
छोटा बेटा मनमोहन पत्नी के साथ भूतल पर रहता था। पहली पत्नी की मौत के बाद मनमोहन ने पिता व भाई की मर्जी के बिना दूसरा विवाह कर लिया। इससे उनमें मतभेद चल रहा था। इसी विवाद के चलते मनमोहन ने 19 जून 2007 को पिता की हत्या कर दी।