हाईकोर्ट का निर्देश: जैन की जमानत का फैसला करते समय इसका ध्यान रखें, ईडी ने कहा- पद का फायदा उठा रहे मंत्री
केजरीवाल सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन को 30 मई को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उन्हें 13 जून को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था वह तब से न्यायिक हिरासत में हैं। आज तक 46 दिन हो गए हैं, उन्होंने बीमारी का बहाना बनाकर खुद को अस्पताल में भर्ती कराया।
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उच्च न्यायालय ने गुरुवार को निचली अदालत को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार मंत्री सत्येंद्र जैन की अंतरिम जमानत पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के लोक नायक अस्पताल (एलएनजेपी अस्पताल) से प्राप्त मेडिकल रिपोर्ट पर विचार न करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने जैन को नोटिस जारी कर ईडी की याचिका पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। ट्रायल कोर्ट में जैन की अंतरिम जमानत पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) या राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल जैसे स्वतंत्र अस्पतालों में जैन की चिकित्सा जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई 17 अगस्त तय की है। अदालत ने कहा कि निर्देश दिया जाता है कि विशेष न्यायाधीश एलएनजेपी की मेडिकल रिपोर्ट पर सुनवाई की अगली तारीख तक विचार नहीं करेंगे।
ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने तर्क दिया कि जैन अपने मंत्री पद का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जैन को गिरफ्तार हुए 46 दिन हो गए हैं लेकिन उन्होंने एक दिन भी जेल में नहीं बिताया है। उन्होंने कहा 46 दिनों से उन्होंने मंत्री होने का फायदा उठाया है।
उन्होंने पहले 20 दिन जेल की डिस्पेंसरी में बिताए और उसके बाद से 26 दिन से एलएनजेपी में भर्ती हैं। उन्होंने ने पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी की घटना का भी हवाला दिया जहां कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती नहीं करने के बजाय एम्स भुवनेश्वर ले जाने का निर्देश दिया था।
ईडी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है जिसमें दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन का मेडिकल परीक्षण कराने और दिल्ली सरकार के लोक नायक अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी गई है। जांच एजेंसी ने कहा है कि जैन का चिकित्सकीय मूल्यांकन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) या राम मनोहर लोहिया अस्पताल जैसे स्वतंत्र अस्पताल द्वारा किया जाना चाहिए, क्योंकि जैन की मेडिकल रिपोर्ट दिल्ली के सरकारी अस्पताल से सही नहीं आ सकती। उन्होंने कहा जैन दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री हैं और उनकी तस्वीर लोक नायक अस्पताल की वेबसाइट के साथ-साथ जैन द्वारा सम्मानित अतिथि के रूप में उद्घाटन के उपलक्ष्य में अस्पताल में पट्टिका पर भी बनी हुई है।
याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि जब जांच अधिकारी (आईओ) लोक नायक अस्पताल में यह सुनिश्चित करने के लिए गए कि जैन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अवकाश न्यायाधीश के सामने पेश हों, तो वह बिना किसी परेशानी के रोगी के बिस्तर पर सो रहे थे और यहां तक कि पैरामीटर मॉनिटर बंद था। इतना ही नहीं उसकी निगरानी किसी भी चिकित्सा उपकरण द्वारा नहीं की जा रही थी। याचिका में कहा गया है कि उनकी पत्नी कमरे में मौजूद थीं। जब आईओ कमरे में पहुंचे तो जैन ने तुरंत ऑक्सीजन मास्क पहना, बीपी उपकरण बेल्ट और मॉनिटर चालू था।