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बेटी के देवर को मारने वालों को जीवनदान
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 09 Mar 2014 06:47 PM IST
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हत्या व हत्या की कोशिश के मामले में मौत की सजा पाने वाले पांच दोषियों की सजा को हाईकोर्ट से जीवनदान मिला है। कोर्ट ने सभी पांच दोषियों को मिली मौत की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया है। हाईकोर्ट ने यह फैसला दोषियों को मिले मृत्युदंड पर संदर्भ व दोषियों की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के बाद सुनाया है।
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जिला अदालत ने दोषियों के अपराध को दुलर्भतम मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर अपनी मोहर नहीं लगाई। मामला बल्लीमारान इलाके में 2008 का है। प्रेम विवाह करने वाली एक लड़की के परिजनों ने उसके पति के भाई को गोलियों से भून दिया था।
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जस्टिस एस मुरलीधर व जस्टिस मुक्ता की खंडपीठ ने हांलाकि दोषियों मोहम्मद सलीम, शाहीन जरगम अली, साजिद वसीम, शब्बीर कासिम व शाहीन अब्बास को हत्या का दोषी माना लेकिन उन्हें मिली मौत की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया। अभियोजन कोर्ट यह साबित करने में नाकाम रहा कि यह मामला दुर्लभतम श्रेणी का है।
खंडपीठ ने कहा कि यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला ऑनर किलिंग का भी नहीं है। कोर्ट ने इन दोषियों को मृतक की हत्या व उसके भाई को जान से मारने की कोशिश के आरोप में मिली 10 साल की सजा को बरकरार रखा है।
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खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि पेश सबूतों व हालातों के मद्देनजर इस मामले को ऑनर किलिंग नहीं कहा जा सकता। यह वारदात लड़की की शादी के डेढ़ साल बाद हुई थी। दोनों परिवार एक ही इलाके में रहते थे। दोनों परिवारों के बीच सात जुलाई 2008 से पहले कोई लड़ाई झगड़ा होने का साक्ष्य नहीं है।
मामले को दुलर्भतम न मानते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसा मामला नहीं है जिसमें दोषियों को मौत की सजा दी जा सके। इसके मद्देनजर दोषियों को मिली मौत की सजा को रद किया जाता है। दूसरी ओर सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।
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अभियोजन के मुताबिक मोहम्मद सलीम व जरगाम अली लड़की के चाचा हैं जबकि साजिद व शब्बीर उसके भाई हैं और अब्बास उसका चचेरा भाई है। यह लोग सुन्नी समुदाय से संबंध रखते हैं। दूसरी ओर लड़की का पति सादिक शिया समुदाय से है।
इन आरोपियों को सात जुलाई 2008 को पता चला कि सादिक उनकी बेटी के साथ अपने पुश्तैनी घर पर रहने आया है। वह जबरदस्ती उसे पकड़कर अपने साथ एक मस्जिद में ले गये जहां दूसरे आरोपी उनका इंतजार कर रहे थे।
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मामले की जानकारी मिलने पर सादिक के भाई तारिक व तैय्यब उनका पीछा करते हुए मस्जिद में पहुंच गए जहां दोनों से बहस शुरू हो गई। इसके बाद दोषियों ने तारिक व तैय्यब पर हमला किया और देशी तमंचों से गोली चला दी। इस गोलीबारी में तैय्यबी की मौत हो गई थी जबकि तारिक गंभीर रूप से घायल हो गया था।