रोज दिल्ली में पांच लड़कियां होती हैं रेप की शिकार
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दिल्ली पुलिस लाख दावे करे लेकिन यह हकीकत है कि आज भी राजधानी में औसतन पांच लड़कियां रोजाना दुष्कर्म की शिकार हो रही हैं। वहीं छेड़छाड़ की घटनाओं पर गौर करें तो प्रतिदिन नौ लड़कियां शर्मसार होती हैं।
हालांकि दिल्ली पुलिस आयुक्त इसे सकारात्मक बताते हुए कहते हैं कि 16 दिसंबर 2012 की घटना के बाद महिलाओं के लिए उठाए गए कदम की वजह महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। यही वजह है कि वह बिना डरे पुलिस थाने पहुंचकर अपने साथ हुए अन्याय को दर्ज करवा रही हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 2015 के शुरुआती दो माह (जनवरी और फरवरी) में दुष्कर्म के करीब 300 मामले दर्ज किए गए। वहीं छेड़छाड़ के 500 मामले सामने आए।
जागरुकता की वजह से दर्ज हो रहे हैं मामले
2012 से पूर्व के आंकड़ों पर गौर करें तो छेड़छाड़ और दुष्कर्म की घटनाएं बेहद कर्म दर्ज की जाती थीं। लेकिन 16 दिसंबर 2012 में निर्भया गैंगरेप के बाद उठाए गए कदमों की वजह से महिलाएं बड़ी संख्या में शिकायत दर्ज कराने लगीं।
यही वजह थी कि 2013 और 2014 के आंकड़ों में इजाफा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दुष्कर्म के 96 फीसदी मामलों में उनके जानकारों का हाथ होता है। केवल चार फीसदी महिलाएं अनजान लोगों का शिकार होती हैं।
मामले पर दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने बताया कि राजधानी की हर लड़की को आत्मरक्षा के गुर सीखे। इसके लिए उन्होंने 2015 में करीब एक लाख लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देने की घोषणा की है। बस्सी ने कहा उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि शुरुआती दो माह में 26 हजार लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।