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हाथरस कांड़ : सफदरजंग अस्पताल के बाहर से हटाए गए प्रदर्शनकारी, हिरासत में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर

Tue, 29 Sep 2020 08:44 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Tue, 29 Sep 2020 08:44 PM IST
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Hathras case victim died in Delhi, protest outside Safdarjung Hospital
सफदरजंग अस्पताल के बाहर प्रदर्शन - फोटो : ANI

सफदरजंग अस्पताल में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को अब हटा दिया गया है। करीब साढ़े नौ बजे पुलिस परिजनों को लेकर रवाना हो चुकी है। जबकि अस्पताल में मौजूद भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं से भी धरना खत्म करने को लेकर अनुरोध किया गया। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

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जानकारी के मुताबिक पीड़िता का परिवार धरने पर नहीं था। परिवार वहां से जाना चाहता था। बाद में परिवार एसडीएम और सर्कल ऑफिसर के साथ वहां से निकल गए । एडीएम हाथरस भी वहां मौजूद थे। 
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उतर प्रदेश के हाथरस में दुष्कर्म की शिकार पीड़िता ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मंगलवार दम तोड़ दिया। शरीर में कई जगह गंभीर घाव और मल्टी फ्रैक्चर होने से पीड़िता को सोमवार गंभीर हालत में अलीगढ़ से दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया था, जहां उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, पीड़िता की हालत काफी गंभीर बनी हुई थी। सारी कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। वहीं, परिजनों का आरोप है कि दिल्ली एम्स में पीड़िता को भर्ती नहीं किया गया। अगर एम्स में समय पर उपचार मिल जाता तो वह जीवित होती। 

उधर, पीड़िता की मौत की खबर सुनकर सफदरजंग अस्पताल में लोग पहुंचने लगे। पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सफदरजंग अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया। देखते ही देखते रिंग रोड पर जाम लगा दिया गया। इसी बीच मौके पर पहुंचे भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर भी धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि पीड़िता के शव का पोस्टमार्टम एक मेडिकल बोर्ड की निगरानी में होना चाहिए।

दूसरी तरफ विजय चौक पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पीड़िता के इंसाफ के लिए प्रदर्शन किया। हालांकि, दिल्ली पुलिस के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। 

बीते 14 सिंतबर को हाथरस जिले की युवती के साथ उसके गांव के ही युवकों ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। पीड़िता का यूपी के अलीगढ़ जेएन मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा था। हालत नाजुक होने पर सोमवार को उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया। सफदरजंग अस्पताल में इलाज के बाद भी पीड़िता की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। वह जिंदगी और मौत लड़ती रही। आखिरकार मंगलवार सुबह आखिरी सांस के साथ वह जिंदगी की अपनी जंग हार गई।

पीड़िता की मौत से सदमे में आए परिजनों ने दोषियों को फांसी दिलाने की मांग की। साथ ही एम्स में भर्ती न होने की वजह से पीड़िता की मौत होने की बात भी कही। पीड़िता के भाई और पिता का कहना है कि पहले उतर प्रदेश में उनकी बच्ची के इलाज में देर हुई। जब सोमवार उसे दिल्ली एम्स लाया गया, लेकिन यहां उनको सफदरजंग अस्पताल में भेज दिया। अगर एम्स में इलाज मिल जाता तो उनकी बच्ची की जान बच जाती।

सफदरजंग अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पीड़िता की मौत के बाद अस्पताल में ही पोस्टमार्टम करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि पीड़िता के साथ काफी नृशंसता की गई थी। उसके हाथ और पैर में फ्रैक्चर था। गले पर भी चोट के गंभीर निशान थे। हालांकि, डॉक्टरों ने जीभ काटने की बात से इंकार किया है। जबकि आरोप पीड़िता की जीभ काटने के भी लगाए गए थे। सोमवार से ही पीड़िता की हालत काफी नाजुक बनी हुई थी। मंगलवार सुबह उसने दम तोड़ दिया।

उतर प्रदेश सरकार की वजह से हुई पीड़िता की मौत :चंद्रशेखर

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने कहा कि  उतर प्रदेश सरकार की वजह से पीड़िता की मौत हुई है। दोषियों को फांसी की सजा होनी चाहिए। किसी ने भी दलित पीड़िता के लिए आवाज नहीं उठाई है। मुख्यमंत्री योगी पीड़िता या उसके परिजनों से मिलने तक नहीं आए। यह मामला यहीं खत्म नहीं होगा। जब तक हमें न्याय नहीं मिलेगा तब तक हमारी लड़ाई चलेगी। अगर सरकार संज्ञान नहीं लेती है तो उतर प्रदेश को बंद कर दिया जाएगा। पीड़िता की जीभ काट दी गई, उसका एक हाथ पैर तोड़ दिया गया। यहां तक की रीढ़ की हड्डी तक तोड़ दी गई।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उतर प्रदेश में दुष्कर्म को लेकर एक सिलसिला चला हुआ है। अब तक दर्जनों ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। पीड़िता पिछले कई दिनों से अपनी जिंदगी के लिए लड़ रही थी। अगर समय रहते उसे बेहतर उपचार मिलता तो वह आज जिंदा होती। बड़ी शर्म की बात है कि एम्स के ज्यादातर बिस्तर खाली होने के बाद भी पीड़िता को वहां भर्ती नहीं किया गया। यूपी से परिवार एम्स में उपचार के लिए दिल्ली आया था लेकिन उसे सफदरजंग में भर्ती करा दिया गया। यह गंभीर लापरवाही है। 

कांग्रेस के पूर्व सासंद डॉ. उदित राज ने कहा कि उतर प्रदेश में दुष्कर्म के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसमें ज्यादातर पीड़िता दलित समाज से हैं। राज्य सरकार दलितों की आवाज को दबाने के साथ साथ पूरे समाज पर अन्याय कर रही है। उतर प्रदेश में तत्काल राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए। 

बता दें कि हाथरस दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद विजय चौक पर प्रदर्शन करने वाले महिला कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 

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