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हाथरस केसः सीबीआई ने शुरू की जांच, दर्ज की एक आरोपी के खिलाफ एफआईआर, ये लगाईं धाराएं

Mon, 12 Oct 2020 05:13 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 12 Oct 2020 05:13 PM IST
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Hathras case cbi investigation starts file fir against one accused submits fir copy in cbi court ghaziabad
हाथरस कांड - फोटो : अमर उजाला

हाथरस कांड में सीबीआई ने अपनी जांच शुरू करते हुए एक आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसके साथ ही एफआईआर की एक कॉपी सीबीआई के न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवांक सिंह की कोर्ट में पेश कर दिया है।

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सीबीआई ने गांव के ही एक आरोपी संदीप कुमार सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। एफआईआर की कॉपी के अनुसार घटनाक्रम में मृतका के भाई ने बताया कि 14 सितंबर को उसकी बहन घास काटने गई थी। बगल में उसकी मां भी घास काट रही थी। थोड़ी दूर पर बाजरे के खेत में संदीप पुत्र गुड्डू ने जान से मारने की नियत से बहन का गला दबा दिया और मारने की कोशिश की।
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जब बहन चिल्लाई तो मां ने आवाज दी कि मैं आ रही हूं। इस पर संदीप उसे छोड़ कर भाग गया घटना सुबह 9:30 बजे की है। जानकारी के अनुसार पीड़िता के भाई के मौखिक बयान के आधार पर सीबीआई ने केस में सामूहिक दुष्कर्म की धारा जोड़ी है। 
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सीबीआई ने एफआईआर में जान से मारने के प्रयास की धारा 307, सामूहिक दुष्कर्म 376(d ), हत्या 302, तीन और एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

सीबीआई ने वेबसाइट से हटाई एफआईआर 
हाथरस दुष्कर्म मामले में सीबीआई ने अपनी वेबसाइट पर एफआईआर डालने के कुछ समय बाद हटा ली। इसकी ये वजह मानी जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार नाबालिग दुष्कर्म के मामले में एफआईआर को पुलिस द्वारा पब्लिक डोमेन में नहीं डाली जानी चाहिए।

हालांकि सीबीआई ने इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्रों के अनुसार हाथरस पीड़िता के नाम को एफआईआर में सफेद स्याही से छुपाया गया था। अनावश्यक विवाद से बचने के लिए  इसे पब्लिक डोमेन से हटाने का फैसल लिया गया है।


दिसंबर 2018 में न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को निर्देश दिया था कि दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में पीड़ितों की पहचान को उजागर नहीं किया जाए। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नाबालिगों के साथ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामलों में एफआईआर पुलिस द्वारा सार्वजनिक डोमेन में नहीं डाली जानी चाहिए। 

यहा मुद्दा कोर्ट में निर्भया मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया था। जिसमें कोर्ट ने देश में महिला सुरक्षा पर पहले कहते हुए ये फैसला सुनाया था। 

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