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एनसीआर के इस इलाके में ही दम तोड़ रही है पीएम की फसल बीमा योजना
दिनेश देशवाल/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 13 Jul 2016 12:09 AM IST
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- फोटो : Getty
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मेवात में फसल बीमा योजना दम तोड़ रही है। जगपाल, महेंद्र, मुकेश कुमार आलदोका, शिवचरण, महेश कुमार, मायाराम, छछेडा, भगत सिंह व हनीफ खान आदि किसानों के मुताबिक इस बारे में किसी अधिकारी ने कभी कोई जानकारी ही नहीं दी। जबकि यह जिला कृषि प्रधान है।
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मेवात में मौसम का संतुलन गड़बड़ाया रहता है। यहां कुछ फसल सूखे की चपेट में आकर खराब हो जाती हैं तो कुछ ज्यादा बारिश के पानी के कारण। इसलिए यह योजना मेवात के किसानों के लिए बेहद फायदेमंद हैं। लेकिन उन तक इस योजना की जानकारी नहीं पहुंची है। शायद इसीलिए कोई बैंक बताने के लिए तैयार नहीं कि इसके लिए कितने आवेदन आए।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. परमजीत सिंह व जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक राकेश भारद्वाज का कहना है कि किसान अपनी नजदीकी बैंक शाखा में जाएं और प्रबंधक से फसल बीमा योजना के तहत आवेदन के लिए कहें। जिसमें प्रबंधक उनकी पूरी मदद करेंगे और जरूरी जानकारी देंगे। यदि कोई प्रबंधक किसानों को इस कार्य में मदद नहीं करता है तो वह उनसे मिलें।
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मेवात जिले के किसानों की फसल का बीमा करने की जिम्मेदारी आईसीआईसीआई बीमा कंपनी को सौंपी गई हैं। जिले में खरीफ की फसल कपास, बाजरा, धान, मक्का तथा रबी की फसल चना, सरसों, गेहुं और जौ को बीमा के लिए शामिल किया गया है। किसान किसी भी नजदीकी बैंक की शाखा में जाकर अपनी इन फसलों का बीमा करा सकते हैं। बाजरा आदि के लिए उन्हें 31 जुलाई तक अपनी फसल के बीमा के लिए आवेदन करना होगा। जबकि गेहूं आदि की फसल के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथी 31 दिसंबर निर्धारित की गई है।
यदि किसी किसान की फसल प्राकृतिक आपदा के कारण खराब हो जाती है और उसने अपनी फसल का बीमा नहीं कराया है तो सरकार उसे मुआवजा नहीं देगी। फसल बीमा योजना ऋणी किसानों के लिए अनिवार्य है और जिस बैंक से उन्होंने लोन लिया हुआ है, उस बैंक में जाकर वे अपनी फसल का बीमा करा सकते हैं। जबकि जिन किसानों के पास लोन नहीं हैं, उनके लिए यह अनिवार्य नहीं है। लेकिन फसल खराब होने की स्थिति में यदि उसे मुआवजा लेना है तो यह जरूरी है कि वह अपनी फसल का बीमा कराए।
योजना के तहत जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लिया हुआ है, उनके लिए यह योजना अनिवार्य है। मेवात जिले में किसान क्रेडिट कार्ड से ऋणी किसानों की संख्या 10847 है। इन किसानों का फसल बीमा अनिवार्य रूप से होगा, जबकि जिन किसानों के पास लोन नहीं है, उनके लिए यह योजना स्वैच्छिक हैं।
इस योजना में किसान को केवल बीमा रकम की 2 प्रतिशत रकम भरनी है, जबकि बाकी रकम सरकार बीमा कंपनी को देगी। कपास की फसल के लिए किसान को 1200 रुपये प्रति हेक्टेयर(ढाई एकड़) बीमा रकम देनी होगी और उसकी फसल का 60 हजार रुपये का बीमा हो जाएगा। धान के लिए 1250 रुपये में 62500 रुपये, बाजरा के लिए 550 रुपए में 27500 रुपये तथा मक्का की फसल के लिए 500 रुपये में 25 हजार रुपये प्रति हेक्टयेर फसल का बीमा होगा।