हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर को हरी झंडी, सोहना-मानेसर-खरखौदा ट्रैक पर 160 की रफ्तार से दौड़ेगी सेमी हाईस्पीड ट्रेन
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एनसीआर को रैपिड रेल के साथ अब हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर की सौगात भी मिलेगी। सफर को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को पलवल से सोनीपत वाया सोहना-मानेसर-खरखौदा कॉरिडोर योजना को मंजूरी दे दी।
इस ट्रैक पर सेमी हाईस्पीड ट्रेन 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। 121.7 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज रेल लाइन को पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य है। इस ट्रैक को डबल स्टेक कंटेनर को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा। इससे निजी कंपनियां डबल डेकर पैसेंजर ट्रेन भी इस पटरी पर उतार सकेंगी।
हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट की खासियत यह होगी कि ट्रैक दिल्ली को बाईपास कर बाहर-बाहर ही निकल जाएगी। इससे दिल्ली के रेल मार्गों पर यातायात का बोझ कम होगा। दिल्ली के स्टेशनों पर हर ओर से ट्रेन पहुंचने के कारण जो जाम की समस्या होती है, उससे छुटकारा मिलेगा। साथ ही अन्य जगहों से हरियाणा-पंजाब की तरफ जाने वाली ट्रेनों को दिल्ली को बाईपास कर चलाया जाएगा। इससे समय की बचत के साथ ट्रेनों को तेज रफ्तार भी मिल जाएगी। इस रूट से 20 हजार यात्री प्रतिदिन यात्रा कर सकेंगे।
इस योजना को हरियाणा सरकार के साथ रेल मंत्रालय और हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन लिमिटेड तैयार करेंगे। इससे हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब भी विकसित होगा, क्योंकि यह ट्रैक समर्पित माल गलियारे से भी जुड़ेगा। इस परियोजना का अनुमानित खर्च 5,617 करोड़ रुपये है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इससे रेलवे नेटवर्क पर दबाव कम हो जाएगा। ट्रैक वेस्टर्न पेरिफेरल कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे से सटा हुआ होगा। इस योजना से दिल्ली से निकलने वाले सभी मौजूदा रेलवे मार्गों और हरियाणा राज्य के साथ-साथ डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क से गुजरने वाले मार्गों को कनेक्टिविटी मिलेगी। इस परियोजना की कुल लंबाई 121.7 किमी है।
गुरुग्राम से ही लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेनें चलेंगी
उत्तर और दक्षिण भारत की यात्रा के लिए दिल्ली आने की समस्या से पंजाब, हरियाणा के लोगों को निजात मिलेगी। गुरुग्राम से ही विभिन्न दिशाओं में लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेनें चलेंगी। मानेसर, सोहना, फर्रुखनगर, खरखौदा और सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्रों में माल ढुलाई की सुविधा मिलेगी।
कई शहरों और गांवों का होगा विकास
पांच साल तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट की वजह से रोजगार भी सृजित होगा। रेलवे का अनुमान है कि इससे करीब 76.30 लाख मानव दिवस रोजगार मिलेगा। प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इस रूट पर पड़ने वाले कई शहरों और गांवों का भी विकास होगा। पूरा ट्रैक हरियाणा के कई ऐसे ग्रामीण शहरों तक पहुंचेगा, जहां यातायात का अब तक संकट है।
दिल्ली को कैसे बाईपास करेगी ट्रेन
अंबाला रेल मंडल के हरसाना कलां से अगर कोई ट्रेन या मालगाड़ी चलती है तो उसे दिल्ली आकर मथुरा जाने की जरूरत नहीं होगी। दिल्ली को बाईपास करते हुए हरसाना कलां से इस ट्रैक से चलने वाली ट्रेन सीधे पलवल के रास्ते मथुरा पहुंच जाएगी।
कहां बनेंगे टर्मिनस
इस पूरे रेल ट्रैक पर कुल 14 स्टेशन होंगे। इनमें तीन बड़े टर्मिनस गुरुग्राम, मानेसर, बिजवासन मुख्य होंगे। लिहाजा गुरुग्राम से चंडीगढ़, अमृतसर जाना भी आसान हो जाएगा।
इंटरचेंज स्टेशन
दिल्ली-मथुरा रेल लाइन पर असावटी इंटरचेंज होगा। इसी तरह दिल्ली-रेवाड़ी लाइन पर पाटली, दिल्ली-रोहतक लाइन पर असौदा, दिल्ली-अंबाला लाइन पर हरसाना कलां और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर पृथला मुख्य इंटरचेंज स्टेशन होगा।
ये होंगे मुख्य स्टेशन
तारकपुर, असौदा, मनधौती, बादली, सुल्तानपुर, पातील, मानेसर, डूंगरवास, सोहना, नूंह, झज्जर। हालांकि कैबिनेट की स्वीकृति के बाद अब कुछ बदलाव भी किया जा सकता है।