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Delhi NCR News: नहीं भीगेगा किसानों का अनाज, तैयार होंगे दो नए शेड
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- हर साल खुले में भीगता है अनाज, मंडी में अभी 7 से 10 और शेड की जरूरत बता रहे आढ़ती
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली। नरेला अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे रखे किसानों के अनाज को अब बारिश से बचाने की तैयारी है। दिल्ली कृषि विपणन बोर्ड ने मंडी में दो नए स्टील शेड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब 11.35 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन शेडों से किसानों और आढ़तियों को बारिश के दौरान अनाज बचाने के लिए तिरपाल के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।
सरकार ने शेड़ों के निर्माण को आवश्यक सार्वजनिक सेवा से जोड़ते हुए ठेकेदार पर कड़े प्रावधान लागू किए हैं। नौ महीने में काम पूरा करना होगा। निर्माण बीच में रोकने या जानबूझकर देरी करने पर आवश्यक सेवा अधिनियम के तहत एफआईआर और कानूनी कार्रवाई तक की जा सकेगी। नरेला अनाज मंडी दिल्ली की प्रमुख अनाज मंडियों में शामिल है। यहां हर मौसम में बड़ी मात्रा में गेहूं, धान, बाजरा, दलहन और तिलहन पहुंचता है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब से आने वाला अनाज यहां पहुंचने के बाद दिल्ली के साथ दूसरे राज्यों में भी भेजा जाता है। ऐसे में मंडी में बारिश से अनाज बचाने की व्यवस्था केवल किसानों और आढ़तियों के लिए ही नहीं, बल्कि दिल्ली की खाद्यान्न आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
मंडी में अभी भी कम पड़ रहे शेड
नरेला मंडी की नई व्यवस्था 1986 में बवाना रोड के पास करीब 33 एकड़ में विकसित की गई थी। मंडी का संचालन एपीएमसी नरेला करता है और शाहदरा व नजफगढ़ को छोड़कर दिल्ली का बड़ा हिस्सा इसके अधिकार क्षेत्र में आता है। यहां करीब चार शेड पहले बनाए जा चुके हैं, जबकि एक और शेड प्रस्तावित था। आढ़तियों का कहना है कि मौजूदा जरूरत के मुकाबले ये पर्याप्त नहीं हैं। उनके मुताबिक मंडी में अभी करीब 7 से 10 और शेडों की जरूरत है।
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21 सितंबर से शुरू होगा काम
बोर्ड के प्रोजेक्ट के मुताबिक दोनों शेडों का निर्माण 21 सितंबर से शुरू किया जाना है। ठेकेदार को पूरी परियोजना नौ महीने के भीतर पूरी करनी होगी। यानी निर्माण की शुरुआत के साथ ही समयसीमा तय कर दी गई है। बोर्ड ने काम को लेकर ऐसी शर्तें रखी हैं, जिनसे निर्माण एजेंसी के लिए समय पर काम पूरा करना अनिवार्य होगा। ये काम पिछले कई साल से लंबित रहा है।
काम तेज हो इसलिए मजदूरों के लिए भी नियम
शेड के निर्माण में लगने वाले मजदूरों के वेतन को लेकर भी बोर्ड ने ठेकेदार की जवाबदेही तय की है। हर महीने की 6 तारीख तक श्रमिकों के बैंक खातों में सीधे वेतन भेजना होगा। ठेकेदार भुगतान नहीं मिलने का बहाना बनाकर मजदूरों का वेतन नहीं रोकेगा। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि काम तेजी से पूरा हो। निर्माण स्थल पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा के लिए भी नियम बने हैं। शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक महिलाएं काम नहीं करेंगी। दो नए शेड बनने से किसानों और आढ़तियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली। नरेला अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे रखे किसानों के अनाज को अब बारिश से बचाने की तैयारी है। दिल्ली कृषि विपणन बोर्ड ने मंडी में दो नए स्टील शेड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब 11.35 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन शेडों से किसानों और आढ़तियों को बारिश के दौरान अनाज बचाने के लिए तिरपाल के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।
सरकार ने शेड़ों के निर्माण को आवश्यक सार्वजनिक सेवा से जोड़ते हुए ठेकेदार पर कड़े प्रावधान लागू किए हैं। नौ महीने में काम पूरा करना होगा। निर्माण बीच में रोकने या जानबूझकर देरी करने पर आवश्यक सेवा अधिनियम के तहत एफआईआर और कानूनी कार्रवाई तक की जा सकेगी। नरेला अनाज मंडी दिल्ली की प्रमुख अनाज मंडियों में शामिल है। यहां हर मौसम में बड़ी मात्रा में गेहूं, धान, बाजरा, दलहन और तिलहन पहुंचता है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब से आने वाला अनाज यहां पहुंचने के बाद दिल्ली के साथ दूसरे राज्यों में भी भेजा जाता है। ऐसे में मंडी में बारिश से अनाज बचाने की व्यवस्था केवल किसानों और आढ़तियों के लिए ही नहीं, बल्कि दिल्ली की खाद्यान्न आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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मंडी में अभी भी कम पड़ रहे शेड
नरेला मंडी की नई व्यवस्था 1986 में बवाना रोड के पास करीब 33 एकड़ में विकसित की गई थी। मंडी का संचालन एपीएमसी नरेला करता है और शाहदरा व नजफगढ़ को छोड़कर दिल्ली का बड़ा हिस्सा इसके अधिकार क्षेत्र में आता है। यहां करीब चार शेड पहले बनाए जा चुके हैं, जबकि एक और शेड प्रस्तावित था। आढ़तियों का कहना है कि मौजूदा जरूरत के मुकाबले ये पर्याप्त नहीं हैं। उनके मुताबिक मंडी में अभी करीब 7 से 10 और शेडों की जरूरत है।
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21 सितंबर से शुरू होगा काम
बोर्ड के प्रोजेक्ट के मुताबिक दोनों शेडों का निर्माण 21 सितंबर से शुरू किया जाना है। ठेकेदार को पूरी परियोजना नौ महीने के भीतर पूरी करनी होगी। यानी निर्माण की शुरुआत के साथ ही समयसीमा तय कर दी गई है। बोर्ड ने काम को लेकर ऐसी शर्तें रखी हैं, जिनसे निर्माण एजेंसी के लिए समय पर काम पूरा करना अनिवार्य होगा। ये काम पिछले कई साल से लंबित रहा है।
काम तेज हो इसलिए मजदूरों के लिए भी नियम
शेड के निर्माण में लगने वाले मजदूरों के वेतन को लेकर भी बोर्ड ने ठेकेदार की जवाबदेही तय की है। हर महीने की 6 तारीख तक श्रमिकों के बैंक खातों में सीधे वेतन भेजना होगा। ठेकेदार भुगतान नहीं मिलने का बहाना बनाकर मजदूरों का वेतन नहीं रोकेगा। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि काम तेजी से पूरा हो। निर्माण स्थल पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा के लिए भी नियम बने हैं। शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक महिलाएं काम नहीं करेंगी। दो नए शेड बनने से किसानों और आढ़तियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।