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हरियाणा चुनाव: अभी तो अपनों से दुश्वारियां
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 12 Sep 2014 01:43 PM IST
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फरीदाबाद की पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा के टिकट की घोषणा के बाद अब बचे क्षेत्रों में घमासान मचा हुआ है। दावेदारों को लगता है कि मोदी की हवा में उनकी एमएलए बनने की लालसा पूरी हो जाएगी, इसलिए वे टिकट के लिए साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपना रहे हैं।
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सभी दावेदार अपने-अपने राजनीतिक आकाओं के यहां दौड़ लगा रहे हैं, ताकि टिकट उन्हें हासिल हो सके। पार्टियों के अंदर अपने विरोधियों को मात देने के लिए एक से बढ़कर एक चालें चली जा रही हैं। इस समय लड़ाई दूसरों से नहीं अपनों से है।
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कोई टिकट की दावेदारी के बाद हवा का रुख भांपकर अपने दूसरे साथी की आलोचना में जुटा हुआ है तो कोई दूसरी पार्टी में छलांग लगाने की तैयारी में है। वैसे तो इस बीमारी से कोई दल नहीं बचा। लेकिन काडर बेस मानी जाने वाली भाजपा में अन्तर्विरोध के स्वर कुछ ज्यादा ही मुखर हो रहे हैं।
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तिगांव: कहीं परिवारवाद न हो जाए हावी
तिगांव सीट पर इस बार भाजपा में दावेदारी का दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं जहाजरानी राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने अपने बेटे देवेंद्र चौधरी को इस सीट के लिए आगे कर दिया है। इसलिए यह सीट तो परिवारवाद का शिकार होती नजर आ रही है।
यहां अन्य दावेदारों में संजय कौशिक, अजय बैसला, उमेश भाटी एवं ओम प्रकाश रक्षवाल हैं। इन कार्यकर्ताओं को अंदर से इस बात की टीस है कि कहीं सीट देवेंद्र चौधरी को मिली तो उनका राजनैतिक भविष्य क्या होगा। इस सीट पर अपने बेटे को टिकट दिलाना गुर्जर के लिए चुनौती है।
-खास बात: 2009-तिगांव सीट पर सिर्फ 818 वोट से जीती, 39,746 वोट मिले।
एनआईटी:
-भाजपा में यहां पर ज्यादातर वह नेता हैं जो चुनावी बादल छाने के बाद छह माह पहले जनता की समस्याओं को लेकर सक्रिय हुए हैं। धरना-प्रदर्शन करना शुरू किया है। प्रमुख दावेदारों में नीरा तोमर, सतीश फागना, वीर सिंह नैन, जगदीश भाटिया एवं डॉ. आरएन सिंह हैं।
कहा जा रहा है कि बड़खल से टिकट नहीं मिली इसलिए यहां पूर्व विधायक चंदर भाटिया भी चुनाव लड़ सकते हैं। इस क्षेत्र से नया नाम जुड़ा है राजस्थान के पूर्व विधायक अतर सिंह का। उनका जन्म यहां पाली गांव में हुआ था इसलिए वह यहां से दावा ठोक रहे हैं।
खास बात: 2009-एनआईटी सीट पर पार्टी को सिर्फ 6,956 वोट मिले।
फरीदाबाद शहरी:
-यहां पर पार्टी के फाइनेंसर एवं रणनीतिकार विपुल गोयल ने मैदान में कूदकर कई लोगों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। उनके संपर्क कृष्णपाल गुर्जर, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह एवं पूर्व अध्यक्ष नितिन गड़करी से अच्छे हैं। शाह और गड़करी दोनों उनके घर आ चुके हैं।
यहां से जिलाध्यक्ष अजय गौड़, पूर्व प्रत्याशी प्रवेश मेहता एवं पूर्व पार्षद धनेश अदलखा प्रमुख दावेदार हैं। टिकट की रंजिश में प्रवेश मेहता विपुल गोयल के खिलाफ कृष्णपाल गुर्जर के घर पर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
-खास बात: 2009-फरीदाबाद शहरी सीट पर पार्टी को 22,903 वोट मिले।
होडल:
यह विधानसभा क्षेत्र मथुरा (उत्तर प्रदेश) से सटा है। यहां पर भाजपा से टिकट के प्रमुख दावेदारों में हसनपुर के पूर्व विधायक और पार्टी बदलकर आए रामरतन हैं। दूसरी दावेदार चमेली देवी सोलंकी हैं। वह एक एनजीओ चलाती हैं। क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके पति मुकेश सोलंकी एचसीएस अधिकारी हैं।
-खास बात: 2009-होडल में पार्टी को सिर्फ 560 वोट मिले।