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ईंट भट्ठों पर हाे रहा है बचपन से खिलवाड़, पीने का पानी तक है मुहाल

Mon, 19 Dec 2016 11:57 AM IST
यूनुस अलवी/अमर उजाला, गुरुग्राम
यूनुस अलवी/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Mon, 19 Dec 2016 11:57 AM IST
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 Hae is messing up on childhood
ईंट भट्ठों में झुलसता बचपन - फोटो : अमर उजाला

मेवात जिला के टाईं गांव स्थित ईंट भट्ठे पर बच्चों‍ के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। जहां पर बच्चों को शिक्षा देने के बजाय उनसे मजदूरी कराई जा रही है। भट्ठे पर ईंटों को पकाने के लिए प्रतिबंधित सामानों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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भट्ठे से निकलने वाले धूंए से लोगों का जीना मुहाल हो रहा है। भट्ठा संचालक के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय जिला प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। गांव के प्रमुख लोगों का आरोप है कि इसकी शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। गांव के लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वह इस मामले को अदालत में लेकर जाएंगे।
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 टाईं निवासी मोहम्मद आरिफ ने बताया कि नियम के अनुसार ईंट भट्ठों पर शौचालय, पीने का पानी, बच्चों के शिक्षा का इंतजाम होना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नहीं हैं।

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खुले में शौच के लिये जाते हैं

 Hae is messing up on childhood
ईंट भट्टों में झुलसता बचपन - फोटो : अमर उजाला

भट्ठा मालिक दावा करता है कि उनके यहां सभी सहूलियतें मौजूद हैं जबकि मामला सारा उलट है। उनका आरोप है कि भट्ठे पर टायर का बुरादा, कार्बन पाउडर और नमक का भी इस्तेमाल किया जाता है जो कि कानूनन अपराध है। जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है।

 टाई गांव के आमीन का कहना है कि इस भट्ठे से काफी नुकसान हो रहा है। यह गांव के बहुत नजदीक है। जब यह भट्ठा बनाया जा रहा था तब उन्होंने और गांव के लोगों ने काफी विरोध किया था, लेकिन उनको यह कहकर चुप करा दिया था कि यह बिजली का भट्ठा बन रहा है और पूरी तरह प्रदूषण रहित होगा लेकिन यहां जो सामान इस्तेमाल किया जाता है उससे काफी नुकसान हो रहा है।

समाज सेवी जमील, महमूद खान और इस्लाम उर्फ काला निवासी टाई का कहना है कि सरकार की योजनाओं में हर भट्ठे पर शौचालय होने चाहिए लेकिन टाई के इस भट्ठे पर भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान का मजाक उड़ रहा है।

भट्ठों पर रहने वाले लोग खुले में शौच के लिये जाते हैं। उनका कहना है कि भट्ठों पर रहने वाले लोग अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, वे भी मेवात को खुले में शौचमुक्त बनाने का हिस्सा बनना चहाते हैं। लेकिन यहां पर पीने के पानी, शौचालय, बच्चों को  पढ़ाने के लिए अध्यापकों की सुविधा नहीं हैं।  

उनका कहना है कि प्रशासन ने इस भट्ठे के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो उनको मजबूर होकर अदालत का दरवाजा खटखटाना पडे़गा।

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