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गुरुग्राम में फिर से बढ़ने लगी कोरोना मरीजों की संख्या, उड़ी प्रशासन व व्यापारियों की नींद
Sat, 29 Aug 2020 05:44 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Sat, 29 Aug 2020 05:44 PM IST
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- फोटो : PTI
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अगस्त के तीसरे सप्ताह में जांच को लेकर बरती गई ढिलाई अब शहरवासियों पर भारी पड़ने लगी है। जांच की संख्या कम होने पर संक्रमितों की जल्द पहचान नहीं हो पाई और इसी वजह से अचानक से मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई। स्थिति यह है कि अब प्रतिदिन 100 से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं, जबकि स्वस्थ होने वालों की संख्या इससे कम रहती है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही व्यापारियों व दुकानदारों की भी नींद उड़ गई है।
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दरअससल करीब 5 माह बाद अगस्त के पहले सप्ताह से स्थिति काफी सुधरने लगी थी, व्यापारियों को भी उम्मीद थी कि अब व्यापार की संभावनाएं बढ़ेंगी तो प्रशासनिक अधिकारी भी चैन की सांस लेने लगे लेकिन अगस्त के तीसरे सप्ताह से स्थिति फिर से बिगड़ने लगी। इसको देखते हुए सरकार ने फिर से सप्ताह में दो दिन लॉकडाउन की घोषणा कर दी। ऐसे में व्यापारी व दुकानदार व्यवसाय को लेकर खासे चिंतित नजर आ रहे हैं।
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वहीं, लॉकडाउन को लेकर शासन-प्रशासन में जिस तरह से असमंजस की स्थिति है, उसको देखते हुए भी व्यापारियों में तनाव का माहौल है। दरअसल पहले सप्ताह के अंत में शनिवार व रविवार को लॉकडाउन की घोषणा की गई और बाद में इसे सोमवार व मंगलवार को कर दिया गया। ऐसे में व्यापारियों को लग रहा है कि लॉकडाउन के दिनों को कहीं और न बढ़ा दिया जाए।
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सामाजिक कार्यक्रमों को बताई बढ़ोतरी की वजह :
कोरोना के बढ़ते मामलों पर जिला प्रशासन सीधे तौर पर जवाबदेही से बचता नजर आ रहा है। प्रशासन इसके लिए सामाजिक कार्यक्रमों व पार्टियों को जिम्मेदार ठहरा रहा है। स्थिति यह है कि अगस्त के शुरुआती दिनों में 108 दिन में कोरोना मरीजों की संख्या दोगुनी हो रही थी जबकि अब यह समयावधि घटकर महज 80 दिन ही रह गई है।
स्थिति सुधरते ही जांच को लेकर की गई थी लापरवाही :
अगस्त के पहले सप्ताह में कोरोना के मामले में जिले की स्थिति काफी सुधरने लगी थी और यही देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग भी जांच को लेकर लापरवाह हो गया। नतीजा यह हुआ कि स्थिति फिर से बिगड़ने लगी। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अगस्त के तीसरे सप्ताह में दूसरे सप्ताह के मुकाबले। प्रतिदिन 363 लोगों की जांच कम हुई। वहीं, पहले सप्ताह के मुकाबले तीसरे सप्ताह में प्रतिदिन 315 लोगों की जांच कम हुई। अगस्त के पहले सप्ताह में प्रतिदिन 2052 लोगों और कुल 14362 लोगों की जांच हुई जबकि दूसरे सप्ताह में प्रतिदिन 2100 लोगों की और कुल 14699 लोगों की जांच की गई। वहीं, तीसरे सप्ताह में यह संख्या काफी कम हो गई और प्रतिदिन 1737 लोगों के हिसाब से महज 12162 लोगों की ही जांच हो पाई।