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महिलाओं ने निभाई आपातकाल में लोकतंत्र प्रहरी की भूमिका : सीएम

Sat, 28 Jun 2025 11:59 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 28 Jun 2025 11:59 PM IST
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Women played the role of democracy watchdog during emergency: CM
गुरुग्राम विवि में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में महिला मॉक पार्लियामेंट आयोजित
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आपातकाल में अत्याचार का विरोध करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया


अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र सेनानियों पर जितने अत्याचार हुए, उतने ही अत्याचार महिलाओं ने सहन किए और इस काले दौर का डटकर वीरता से सामना किया। महिलाओं ने राष्ट्रहित में जो लोकतंत्र प्रहरी के रूप में योगदान दिया, वह कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आह्वान किया कि लोकतंत्र के काले अध्याय को जन-जन तक पहुंचाया जाए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां इसे याद रखें और इसके प्रति सचेत रहें।
मुख्यमंत्री शनिवार को गुरुग्राम विश्वविद्यालय के सभागार में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित महिला मॉक पार्लियामेंट में संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मॉक पार्लियामेंट की कार्यवाही भी देखी। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण को समर्पित यह मॉक पार्लियामेंट सेशन आपातकाल के दौरान महिलाओं पर हुए अत्याचार को याद करते हुए उनके त्याग को सलाम करने का दिन है। उन्होंने आपातकाल में अत्याचार का विरोध करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित भी किया। सम्मानित होने वालों में प्रदेश अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संगठन महावीर भारद्वाज, एसबी गुप्ता और श्रीचंद गुप्ता शामिल रहे।
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सीएम ने कहा कि जब देश में आपातकाल लगाया गया उस समय न तो देश में कोई अस्थिरता थी और न ही कोई प्राकृतिक आपदा थी, परंतु कांग्रेस की सरकार द्वारा अपनी स्वार्थ पूर्ति व संकुचित मानसिकता के लिए देश के लोगों पर जबरदस्ती आपातकाल को थोपा गया। आज से 50 वर्ष पूर्व लगे आपातकाल में केवल राजनीतिक अधिकारों का ही हनन नहीं हुआ बल्कि महिलाओं की स्वतंत्रता, उनकी गरिमा, उनके अधिकारों पर सबसे क्रूर हमला हुआ।महिलाओं को जेलों में बंद किया गया। उनकी आवाज को दबाया गया और उन्हें घरों में कैद कर दिया गया। केवल इसलिए कि वे सरकार के अन्याय के खिलाफ बोलना चाहती थीं। यह वही समय था, जब लोकतंत्र के साथ नारी गरिमा का भी गला घोंटा गया। उन्होंने कहा कि महिला मॉक संसद जैसे महत्वपूर्ण और विचारशील कार्यक्रम का आयोजन उस दौरान हुए अमानवीय कृत्य को याद करने का दिन है। आपातकाल के बाद के आम चुनावों में महिलाओं ने पहले की अपेक्षा बढ़-चढ़कर भाग लिया।
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आपातकाल में संविधान को कुचलने का काम हुआ
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल में संविधान को रौंदने का काम किया गया। यह कोई साधारण विषय नहीं है। यह हमें उस दौर की याद दिलाता है, जब पूरे देश की आवाज को कुचलने की कोशिश की गई थी। यह उस दौर की बात है, जब संविधान को ताक पर रखकर एक परिवार की सत्ता को बचाने के लिए देश को जेल बना दिया गया था। आज जब इतनी जागरूक माताएं-बहनें बैठी हैं, तो मुझे पूरा विश्वास है कि इस देश की लोकतांत्रिक चेतना को कोई फिर से कोई कुचल नहीं सकता। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, विधायक तेजपाल तंवर, विधायक बिमला चौधरी, विधायक मुकेश शर्मा, कालका विधायक शक्ति रानी शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ोली, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष उषा प्रियदर्शी, गुरुग्राम की मेयर राजरानी मल्होत्रा, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल सहित डीसी अजय कुमार, सीपी विकास अरोड़ा, सहित लोकतंत्र सेनानी व अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
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