{"_id":"6457ee665b7b944df20ab324","slug":"why-death-does-not-come-overnight-the-play-tickles-the-audience-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-4808-2023-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: मौत क्यों रात भर नहीं आती नाटक ने दर्शकों को गुदगुदाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: मौत क्यों रात भर नहीं आती नाटक ने दर्शकों को गुदगुदाया
विज्ञापन
पालम विहार स्थित एमफी थिएटर में किया गया मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। पैसे की तंगी के चलते आत्महत्या करने जा रहे व्यक्ति को अचानक जब बहुत सारा पैसा मिल गया तो खुशी के चलते उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसलिए परिस्थितियों से निराश होने की अपेक्षा दैनिक जीवन में ही खुशियां तलाश करने का संदेश देता है प्रताप सहगल का लिखा नाटक मौत क्यों रात भर नहीं आती।
दर्शकों और नाट्य प्रेमियों की बेहद मांग पर पालम विहार स्थित एमफी थिएटर कला स्थली में वरिष्ठ रंग कर्मी आशुतोष सहलत के सानिध्य में छह मई को नाटक का मंचन हुआ। नाटक का निर्देशन गुरुग्राम के वरिष्ठ रंगकर्मी फिल्म एवं टीवी कलाकार मोहन कांत ने किया। नाटक ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया, इसकी कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार के व्यक्ति की है जो कर्ज के बोझ तले, अपने परिवार की जरूरतों को पूरा न कर पाने की वजह से आत्महत्या करने का निर्णय लेता है। आत्महत्या के विभिन्न तरीकों को अपनाने की कोशिश करता है लेकिन हर तरीके में विफल रहता है। आत्महत्या के विभिन्न तरीकों को अपनाने की प्रक्रिया से हास्य उत्पन्न होता है और दर्शक उसका आनंद लेते हैं, परंतु भाग्य की विडंबना देखिए जिन पैसों की वजह से वह आत्महत्या करना चाहता है लेकिन नहीं मर पाता। जब आकस्मिक लाभ की वजह से उसे 80 लाख का धन मिलता है तो उस खुशी से उसकी हृदयाघात से मौत हो जाती है।
इस में अभिनय करने वालों में मुख्य भूमिका में गुरुग्राम के ही वरिष्ठ रंगकर्मी एवं टीवी, फिल्म कलाकार हर्ष कुमार, आदिति जैन और स्वयं मोहन कांत रहे। अन्य भूमिकाओं में सूरज कुशवाह और हर्षित गुप्ता ने अभिनय किया | नाटक का मंचन सफल रहा, दर्शकों ने खूब आनंद लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। पैसे की तंगी के चलते आत्महत्या करने जा रहे व्यक्ति को अचानक जब बहुत सारा पैसा मिल गया तो खुशी के चलते उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसलिए परिस्थितियों से निराश होने की अपेक्षा दैनिक जीवन में ही खुशियां तलाश करने का संदेश देता है प्रताप सहगल का लिखा नाटक मौत क्यों रात भर नहीं आती।
दर्शकों और नाट्य प्रेमियों की बेहद मांग पर पालम विहार स्थित एमफी थिएटर कला स्थली में वरिष्ठ रंग कर्मी आशुतोष सहलत के सानिध्य में छह मई को नाटक का मंचन हुआ। नाटक का निर्देशन गुरुग्राम के वरिष्ठ रंगकर्मी फिल्म एवं टीवी कलाकार मोहन कांत ने किया। नाटक ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया, इसकी कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार के व्यक्ति की है जो कर्ज के बोझ तले, अपने परिवार की जरूरतों को पूरा न कर पाने की वजह से आत्महत्या करने का निर्णय लेता है। आत्महत्या के विभिन्न तरीकों को अपनाने की कोशिश करता है लेकिन हर तरीके में विफल रहता है। आत्महत्या के विभिन्न तरीकों को अपनाने की प्रक्रिया से हास्य उत्पन्न होता है और दर्शक उसका आनंद लेते हैं, परंतु भाग्य की विडंबना देखिए जिन पैसों की वजह से वह आत्महत्या करना चाहता है लेकिन नहीं मर पाता। जब आकस्मिक लाभ की वजह से उसे 80 लाख का धन मिलता है तो उस खुशी से उसकी हृदयाघात से मौत हो जाती है।
विज्ञापन
इस में अभिनय करने वालों में मुख्य भूमिका में गुरुग्राम के ही वरिष्ठ रंगकर्मी एवं टीवी, फिल्म कलाकार हर्ष कुमार, आदिति जैन और स्वयं मोहन कांत रहे। अन्य भूमिकाओं में सूरज कुशवाह और हर्षित गुप्ता ने अभिनय किया | नाटक का मंचन सफल रहा, दर्शकों ने खूब आनंद लिया।
विज्ञापन