Gurugram: स्कूल में दृष्टिबाधित बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, परिजनों का विद्यालय प्रबंधन पर आरोप
बच्ची के पिता गोपाल प्रसाद वर्णवाल ने बताया कि बेटी का दाखिला एक महीने पहले ही कराया था। उनको बहुत खुशी थी और विश्वास था कि स्कूल में बच्ची को न सिर्फ अच्छी शिक्षा मिलेगी बल्कि शहर के अच्छे वातावरण में उच्च संस्कार भी मिलेंगे।
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बहरामपुर में दृष्टि बाधित बच्चों के लिए संचालित स्कूल में सात वर्षीय बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर पिटाई कर हत्या करने का आरोप लगाया है।
पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार दोपहर शव परिजनों को सौंप दिया गया। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, बच्ची की मौत उल्टी-दस्त के कारण हुई है। दूसरी ओर परिजनों ने सीधे तौर पर बच्ची की मौत के लिए स्कूल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिस-प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मूल रूप से झारखंड के देवघर निवासी गोपाल प्रसाद वर्णवाल ने बताया कि उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें से सात वर्षीय बड़ी बेटी जन्म से ही दृष्टिहीन थी। उनके बहनोई व अन्य रिश्तेदार गुरुग्राम में रहते हैं। उनके ही कहने पर अच्छी शिक्षा के लिए बड़ी बेटी का दाखिला बहरामपुर स्थित कैप्टन चंदन लाल स्पेशल मिडिल स्कूल फॉर दि ब्लाइंड में कराया था। बच्ची आए दिन अपने माता-पिता से स्कूल में मारपीट किए जाने की जानकारी देती थी।
बच्ची के शरीर पर थे चोट के निशान
बृहस्पतिवार को स्कूल की तरफ से बच्ची की तबीयत खराब होने व सेक्टर-15 के एक निजी अस्पताल में भर्ती किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद वह झारखंड से गुरुग्राम के लिए निकले। शुक्रवार सुबह जब अस्पताल में पहुंचे तो पता चला कि बच्ची को इलाज के लिए सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल ले जाया गया है। गोपाल प्रसाद नागरिक अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि बच्ची की मौत हो चुकी है।
गोपाल के मुताबिक, बच्ची को सिविल हॉस्पिटल के आपातकालीन विभाग में रखा गया था लेकिन वहां पर एक भी डॉक्टर नहीं था। वहीं, दूसरी तरफ ब्लाइंड स्कूल मैनेजमेंट ने उल्टी-दस्त के चलते बच्ची की मौत होने की बात कही है। परिजनों के मुताबिक बच्ची के पैर व गाल के नीचे चोट के निशान हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि बच्ची की मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई है।
22 जुलाई को ही कराया था दाखिला
बच्ची के पिता गोपाल प्रसाद वर्णवाल ने बताया कि दाखिले के वक्त उनको बहुत खुशी थी और विश्वास था कि स्कूल में बच्ची को न सिर्फ अच्छी शिक्षा मिलेगी बल्कि शहर के अच्छे वातावरण में उच्च संस्कार भी मिलेंगे। गोपाल प्रसाद के मुताबिक, पिछले 22 जुलाई को बच्ची का स्कूल में दाखिला कराया था तब से ही वह जब भी फोन पर बात करती तो वहां पर कार्यरत आया व अन्य कर्मचारियों के द्वारा मारने-पीटने की बात कहती थी। हालांकि उन्होंने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और सोचा कि पढ़ाई-लिखाई के लिए शिक्षक व अन्य स्कूल स्टाफ बच्चों को डराता होगा।