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दिल्ली के एरोसिटी में हुआ था टीकाकरण
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गुरुग्राम। साइबर सिटी में कोरोना का फर्जी टीकाकरण करने वाले अस्पताल का भंडाफोड़ होने के बाद परत दर परत नया खुलासा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में अब सामने आया है कि अस्पताल की ओर से 53 लोगों का टीकाकरण किया गया है। इनमें से अधिकांश का दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट के नजदीक एरोसिटी में टीकाकरण हुआ था। वहां पर गुरुग्राम के चिरंजीवी अस्पताल ने किससे सांठगांठ कर टीकाकरण करवाया है, किस अस्पताल में टीकाकरण हुआ या किसी होटल का सहारा लिया गया। इन तमाम मामलों की जांच पुलिस कर रही है।
इस बीच जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल ने चार सेशन में लोगों को वैक्सीन लगाई है। पहला सेशन 26 जून को, दूसरा 30 जून, तीसरा एक जुलाई और चौथा चार जुलाई को किया गया है। टीकाकरण के बाद चिरंजीवी अस्पताल के नाम से सर्टिफिकेट दिए गए थे। इनमें से 21 लोगों को कोविशील्ड की पहली और 32 लोगों को दूसरी डोज दी गई है। इस मामले का खुलासा एक महिला की ओर से की गई शिकायत में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच में किया था। सोमवार को सीएमओ के निर्देश पर टीकाकरण प्रभारी एमपी सिंह ने थाना सदर में चिरंजीवी अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
ये है स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट
टीकाकरण की इजाजत दो तरह से ही थी। या तो कोई अस्पताल अपने स्तर पर वैक्सीन की खरीद करता या फिर सरकार के पास पैसा जमा कर वैक्सीन ले सकते थे। लेकिन इन दोनों ही नियमों का पालन नहीं किया गया।
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- विरेंद्र यादव, सिविल सर्जन
नोडल अधिकारी डॉ. एमपी सिंह की शिकायत पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में तमाम पहलुओं पर जांच की जा रही है। एरोसिटी में कहां टीकाकरण किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है।
- प्रीतपाल सिंह, एसीपी, क्राइम ब्रांच
अस्पताल कर्मचारियों को ठहरा रहा जिम्मेदार
चिरंजीवी अस्पताल के निदेशक डॉ. अमरीश सोनी की माने तो टीकाकरण की जिम्मेदारी जिस कर्मचारी को दी गई थी, उससे पूछताछ की जा रही है। डॉक्टर का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी। जब अस्पताल प्रबंधन से इस संबंध में पूछा गया कि 53 लोगों को जो टीके लगे वह कहां से आए तो कि तो प्रबंधन की इस मामले पर अलग ही सफाई थी। उनके अनुसार, कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में जब फ्रंट लाइन वारियर्स और जब 45 वर्ष से ऊपर के लोगों को वैक्सीनेशन किया जा रहा था तो बची हुई वैक्सीन खराब न हो इसलिए अस्पताल ने 45 वर्ष उम्र से नीचे के उन लोगों को भी वैक्सीन लगाई थी जो उस दायरे में नहीं आते थे जिनको उस समय सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जा सकते थे और अब उन्हें सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं जोकि गलत हुआ है।
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इस बीच जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल ने चार सेशन में लोगों को वैक्सीन लगाई है। पहला सेशन 26 जून को, दूसरा 30 जून, तीसरा एक जुलाई और चौथा चार जुलाई को किया गया है। टीकाकरण के बाद चिरंजीवी अस्पताल के नाम से सर्टिफिकेट दिए गए थे। इनमें से 21 लोगों को कोविशील्ड की पहली और 32 लोगों को दूसरी डोज दी गई है। इस मामले का खुलासा एक महिला की ओर से की गई शिकायत में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच में किया था। सोमवार को सीएमओ के निर्देश पर टीकाकरण प्रभारी एमपी सिंह ने थाना सदर में चिरंजीवी अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
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ये है स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट
टीकाकरण की इजाजत दो तरह से ही थी। या तो कोई अस्पताल अपने स्तर पर वैक्सीन की खरीद करता या फिर सरकार के पास पैसा जमा कर वैक्सीन ले सकते थे। लेकिन इन दोनों ही नियमों का पालन नहीं किया गया।
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- विरेंद्र यादव, सिविल सर्जन
नोडल अधिकारी डॉ. एमपी सिंह की शिकायत पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में तमाम पहलुओं पर जांच की जा रही है। एरोसिटी में कहां टीकाकरण किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है।
- प्रीतपाल सिंह, एसीपी, क्राइम ब्रांच
अस्पताल कर्मचारियों को ठहरा रहा जिम्मेदार
चिरंजीवी अस्पताल के निदेशक डॉ. अमरीश सोनी की माने तो टीकाकरण की जिम्मेदारी जिस कर्मचारी को दी गई थी, उससे पूछताछ की जा रही है। डॉक्टर का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी। जब अस्पताल प्रबंधन से इस संबंध में पूछा गया कि 53 लोगों को जो टीके लगे वह कहां से आए तो कि तो प्रबंधन की इस मामले पर अलग ही सफाई थी। उनके अनुसार, कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में जब फ्रंट लाइन वारियर्स और जब 45 वर्ष से ऊपर के लोगों को वैक्सीनेशन किया जा रहा था तो बची हुई वैक्सीन खराब न हो इसलिए अस्पताल ने 45 वर्ष उम्र से नीचे के उन लोगों को भी वैक्सीन लगाई थी जो उस दायरे में नहीं आते थे जिनको उस समय सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जा सकते थे और अब उन्हें सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं जोकि गलत हुआ है।