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विदेशी नागरिकों को ठगने वाले दो फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़
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गुरुग्राम। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने शुक्रवार शाम सेक्टर-35 में एक ही इमारत में चल रहे दो और फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इन कॉल सेंटरों में अमेरिकी नागरिकों से ठगी की जाती थी। यहां कार्यरत कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर पर वायरस भेजते थे और बाद में कंप्यूटर खराब होने पर उसे ठीक करने के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। इससे पहले भी शहर में कई फर्जी कॉल सेंटर पकड़े जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के प्रभारी डीएसपी इंद्रजीत यादव को सेक्टर-35 में एक इमारत में दो फर्जी कॉल सेंटर चलाए जाने की सूचना मिली थी। इस आधार पर एक टीम का गठन कर मौके पर भेजा गया। टीम पहले बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल पर पहुंची, जहां उनोलो टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्जी कॉल सेंटर का संचालन किया जा रहा था। सेंटर का संचालक दिल्ली निवासी रोशन थामस मौके पर नहीं मिला, लेकिन उसके दो पार्टनर दिल्ली के ही रहने वाले मनीष एवं सुनील त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके कब्जे से दो लैपटाप एवं छह लाख 48 हजार रुपये बरामद किए गए।
इसके बाद टीम इसी बिल्डिंग में इंडोसॅाफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम से चलाए रहे अन्य कॉल सेंटर में पहुंची। टीम ने पाया कि इस सेंटर के पास भी संचालन की अनुमति नहीं है। यहां पर भी कॉल सेंटर का संचालक बिहार निवासी राहुल नदारद मिला। पूछताछ के बाद मौके पर मौजूद राहुल के साथी जिगर व हंसराज को गिरफ्तार कर लिया गया। इनके कब्जे से चार सीपीयू एवं दो लैपटॉप बरामद किए गए। जांच में पता चला कि कॉल सेंटर के कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर सिस्टम में पहले वायरस भेजते थे। फिर फोन करके तकनीकी सहायता देने की बात करते थे, जिनसे बात हो जाती थी उनसे 100 से 500 डॉलर तक वसूलते थे। पूर्व में भी इसी तरह के कई अन्य फर्जी कॉल सेंटर पकड़े जा चुके हैं जो अमेरिकी नागरिकों को ठगने का काम किया करते थे।
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मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के प्रभारी डीएसपी इंद्रजीत यादव को सेक्टर-35 में एक इमारत में दो फर्जी कॉल सेंटर चलाए जाने की सूचना मिली थी। इस आधार पर एक टीम का गठन कर मौके पर भेजा गया। टीम पहले बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल पर पहुंची, जहां उनोलो टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्जी कॉल सेंटर का संचालन किया जा रहा था। सेंटर का संचालक दिल्ली निवासी रोशन थामस मौके पर नहीं मिला, लेकिन उसके दो पार्टनर दिल्ली के ही रहने वाले मनीष एवं सुनील त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके कब्जे से दो लैपटाप एवं छह लाख 48 हजार रुपये बरामद किए गए।
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इसके बाद टीम इसी बिल्डिंग में इंडोसॅाफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम से चलाए रहे अन्य कॉल सेंटर में पहुंची। टीम ने पाया कि इस सेंटर के पास भी संचालन की अनुमति नहीं है। यहां पर भी कॉल सेंटर का संचालक बिहार निवासी राहुल नदारद मिला। पूछताछ के बाद मौके पर मौजूद राहुल के साथी जिगर व हंसराज को गिरफ्तार कर लिया गया। इनके कब्जे से चार सीपीयू एवं दो लैपटॉप बरामद किए गए। जांच में पता चला कि कॉल सेंटर के कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर सिस्टम में पहले वायरस भेजते थे। फिर फोन करके तकनीकी सहायता देने की बात करते थे, जिनसे बात हो जाती थी उनसे 100 से 500 डॉलर तक वसूलते थे। पूर्व में भी इसी तरह के कई अन्य फर्जी कॉल सेंटर पकड़े जा चुके हैं जो अमेरिकी नागरिकों को ठगने का काम किया करते थे।
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