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Gurugram News: बिजली बिलों के बकायेदारों पर सख्ती
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डिफॉल्टर परिसरों पर नए कनेक्शन से बिजली लेने के मामलों के जांच के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दक्षिण एवं उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने बिजली बिलों की बकाया राशि की वसूली और डिफॉल्टर उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगम प्रबंधन ने ऐसे मामलों की जांच के निर्देश दिए हैं, जिनमें स्थायी रूप से बिजली कनेक्शन काटे जाने (पीडीसीओ) के बाद बकाया राशि वाले परिसरों में नए कनेक्शन के माध्यम से दोबारा बिजली बहाल की गई है। इन मामलों की जांच 15 दिन के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह के निर्देशानुसार निगम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिजली बिलों की बकाया राशि जमा किए बिना अथवा निर्धारित नियमों की अनदेखी करके किसी परिसर में नए कनेक्शन के माध्यम से बिजली आपूर्ति का लाभ न लिया जा सके। ऐसे मामलों में संबंधित कनेक्शन के दस्तावेजों, परिसर की वास्तविक स्थिति, पुराने कनेक्शन के रिकॉर्ड और नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया की गहनता से जांच की जाएगी।
पुराने बकाया और नए कनेक्शन के रिकॉर्ड का होगा मिलान
निगम द्वारा ऐसे परिसरों की पहचान कर संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाएगी, जहां पहले बिजली बिलों का भुगतान न होने अथवा अन्य कारणों से कनेक्शन स्थायी रूप से काटा गया था और बाद में उसी परिसर में नए कनेक्शन के जरिये बिजली आपूर्ति शुरू की गई। जांच के दौरान पुराने उपभोक्ता की बकाया राशि, पूर्व कनेक्शन का विवरण, नए कनेक्शन के लिए प्रस्तुत आवेदन एवं दस्तावेजों और परिसर से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान किया जाना महत्वपूर्ण होगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं पुराने कनेक्शन की बकाया राशि से बचने के लिए नए कनेक्शन का सहारा तो नहीं लिया गया। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि नए कनेक्शन जारी करते समय निर्धारित नियमों और निगम की प्रक्रियाओं का पालन किया गया हो।
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15 दिन में जांच पूरी करने पर जोर
निगम प्रबंधन ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जा सकेगी। इस मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे उपलब्ध रिकॉर्ड का सत्यापन करें और जांच में किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य को नजरअंदाज न करें। निगम प्रबंधन की प्राथमिकता है कि बिजली आपूर्ति, बिलिंग और राजस्व वसूली से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित हो तथा किसी भी उपभोक्ता को नियमों से बचकर अनुचित लाभ लेने का अवसर न मिले।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दक्षिण एवं उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने बिजली बिलों की बकाया राशि की वसूली और डिफॉल्टर उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगम प्रबंधन ने ऐसे मामलों की जांच के निर्देश दिए हैं, जिनमें स्थायी रूप से बिजली कनेक्शन काटे जाने (पीडीसीओ) के बाद बकाया राशि वाले परिसरों में नए कनेक्शन के माध्यम से दोबारा बिजली बहाल की गई है। इन मामलों की जांच 15 दिन के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह के निर्देशानुसार निगम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिजली बिलों की बकाया राशि जमा किए बिना अथवा निर्धारित नियमों की अनदेखी करके किसी परिसर में नए कनेक्शन के माध्यम से बिजली आपूर्ति का लाभ न लिया जा सके। ऐसे मामलों में संबंधित कनेक्शन के दस्तावेजों, परिसर की वास्तविक स्थिति, पुराने कनेक्शन के रिकॉर्ड और नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया की गहनता से जांच की जाएगी।
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पुराने बकाया और नए कनेक्शन के रिकॉर्ड का होगा मिलान
निगम द्वारा ऐसे परिसरों की पहचान कर संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाएगी, जहां पहले बिजली बिलों का भुगतान न होने अथवा अन्य कारणों से कनेक्शन स्थायी रूप से काटा गया था और बाद में उसी परिसर में नए कनेक्शन के जरिये बिजली आपूर्ति शुरू की गई। जांच के दौरान पुराने उपभोक्ता की बकाया राशि, पूर्व कनेक्शन का विवरण, नए कनेक्शन के लिए प्रस्तुत आवेदन एवं दस्तावेजों और परिसर से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान किया जाना महत्वपूर्ण होगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं पुराने कनेक्शन की बकाया राशि से बचने के लिए नए कनेक्शन का सहारा तो नहीं लिया गया। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि नए कनेक्शन जारी करते समय निर्धारित नियमों और निगम की प्रक्रियाओं का पालन किया गया हो।
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15 दिन में जांच पूरी करने पर जोर
निगम प्रबंधन ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जा सकेगी। इस मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे उपलब्ध रिकॉर्ड का सत्यापन करें और जांच में किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य को नजरअंदाज न करें। निगम प्रबंधन की प्राथमिकता है कि बिजली आपूर्ति, बिलिंग और राजस्व वसूली से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित हो तथा किसी भी उपभोक्ता को नियमों से बचकर अनुचित लाभ लेने का अवसर न मिले।