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एक घंटे के ऑपरेशन के बाद मोर की आंखों से हटाया ट्यूमर
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गुरुग्राम। आंखों के ट्यूमर से जूझ रहे राष्ट्रीय पक्षी मोर का स्थानीय जैकबपुरा स्थित धर्मार्थ पक्षी अस्पताल में सफल ऑपरेशन किया गया। एक घंटे के ऑपरेशन में उसकी दोनों आंखों के चारों ओर बन रहे ट्यूमर को हटा दिया गया। कुछ दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद पूरी तरह स्वस्थ होने पर मोर को वापस उसके प्राकृतिक प्रवास में छोड़ दिया गया है।
धर्मार्थ पक्षी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राजकुमार कहते हैं कि करीब 12 दिन पहले गांव हजियाका से कुछ ग्रामीण एक मोर को लेकर अस्पताल आए थे। यह मोर ग्रामीणों को रास्ते के किनारे पर झाड़ियों में फंसा मिला था। किसी जानवर के पंजे से इसकी आंखों पर पहले जख्म बने थे, बाद में उन जख्मों ने ट्यूमर की शक्ल अख्तियार कर ली। जांच में पता चला कि उपचार नहीं होने पर यह ट्यूमर लगातार बढ़ता ही जा रहा था। अगर कुछ दिन और यह स्थिति रहती तो संभव था कि मोर मर जाता। ट्यूमर के चलते मोर को देखने में परेशानी हो रही थी। ऑपरेशन के बाद मोर को सघन निगरानी में रखा गया। दो तीन दिन बाद उसे अस्पताल के रीहैबिलिटेशन सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया।
डॉ. राजकुमार कहते हैं कि भर्ती करने से पहले इस बात की जानकारी कर ली थी कि मोर किस क्षेत्र में प्रवास करता था। स्वस्थ होने के बाद पक्षी अस्पताल की टीम उसे हजियाका क्षेत्र में उसी स्थान पर छोड़ने गई। इस दौरान मोर अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ के साथ सहज हो गया था। गांव के जंगल में पहुंचने पर भी उसने उड़ने की या जंगल में जाने की जल्दबाजी नहीं दिखाई थी।
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मोर को था घातक किस्म का ट्यूमर
डॉ. राजकुमार कहते हैं कि कैंसर या ट्यूमर एक ऊतक या अंग में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को दर्शाता है। एक पक्षी की भी ट्यूमर से ग्रस्त होने की संभावना उतनी ही है जितनी की मनुष्य की। सौम्य ट्यूमर फैलते नहीं है। घातक ट्यूमर फैलते हैं, मोर को दूसरे किस्म का ट्यूमर था।
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धर्मार्थ पक्षी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राजकुमार कहते हैं कि करीब 12 दिन पहले गांव हजियाका से कुछ ग्रामीण एक मोर को लेकर अस्पताल आए थे। यह मोर ग्रामीणों को रास्ते के किनारे पर झाड़ियों में फंसा मिला था। किसी जानवर के पंजे से इसकी आंखों पर पहले जख्म बने थे, बाद में उन जख्मों ने ट्यूमर की शक्ल अख्तियार कर ली। जांच में पता चला कि उपचार नहीं होने पर यह ट्यूमर लगातार बढ़ता ही जा रहा था। अगर कुछ दिन और यह स्थिति रहती तो संभव था कि मोर मर जाता। ट्यूमर के चलते मोर को देखने में परेशानी हो रही थी। ऑपरेशन के बाद मोर को सघन निगरानी में रखा गया। दो तीन दिन बाद उसे अस्पताल के रीहैबिलिटेशन सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया।
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डॉ. राजकुमार कहते हैं कि भर्ती करने से पहले इस बात की जानकारी कर ली थी कि मोर किस क्षेत्र में प्रवास करता था। स्वस्थ होने के बाद पक्षी अस्पताल की टीम उसे हजियाका क्षेत्र में उसी स्थान पर छोड़ने गई। इस दौरान मोर अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ के साथ सहज हो गया था। गांव के जंगल में पहुंचने पर भी उसने उड़ने की या जंगल में जाने की जल्दबाजी नहीं दिखाई थी।
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मोर को था घातक किस्म का ट्यूमर
डॉ. राजकुमार कहते हैं कि कैंसर या ट्यूमर एक ऊतक या अंग में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को दर्शाता है। एक पक्षी की भी ट्यूमर से ग्रस्त होने की संभावना उतनी ही है जितनी की मनुष्य की। सौम्य ट्यूमर फैलते नहीं है। घातक ट्यूमर फैलते हैं, मोर को दूसरे किस्म का ट्यूमर था।