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Gurugram News: जहरीली हवाएं घोंट रही दम, एक्यूआई मापने के स्टेशन 11 माह से बंद
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तीन साल पहले स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में मिला था 24वां स्थान, इस बार एनकैप प्रोग्राम में सर्वे लायक भी न माना
चार ऑटोमेटिक स्टेशन लगे लेकिन तीन बंद
अमित कुलश्रेष्ठ
गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी की हवा में जहर घुला हुआ है। यह कितना है, इसे जानने के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) मापने के ऑटोमेटिक स्टेशन ही 11 माह से बंद पड़े हैं। मिलेनियम सिटी के बंद ऑटोमेटिक स्टेशनों के कारण स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में गुरुग्राम को शामिल ही नहीं किया गया। तीन साल पहले वर्ष 2022 में ही गुरुग्राम को देश में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 24वां स्थान मिला था लेकिन उसके बाद से गुरुग्राम को सर्वे लायक ही नहीं माना गया। हाल ये है कि टूटी सड़कों, वाहनों के जाम, गंदगी, कचरा जलाने के कारण गुरुग्राम के लोगों का दम जहरीली हवाएं घोंट रही हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का हिस्सा गुरुग्राम भवन निर्माण से उड़ती धूल, वाहनों के जाम, कचरा जलाने और सड़कों पर जमा मिट्टी के उड़ने के कारण वायु प्रदूषण के मामले में खतरनाक स्थिति में है। यहां क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत यहां चार स्टेशन लगाए गए थे लेकिन यहां जरूरत 15 से ज्यादा स्टेशनों की है जो वाहनों और फैक्टरियों से निकलने वाले धुंए, प्रदूषण की निगरानी कर सकें। 11 माह से चार में से तीन स्टेशन यहां बंद पड़े हैं जो मॉनिटरिंग ही नहीं कर रहे। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का गुरुग्राम इसी वजह से हिस्सा नहीं बन सका जबकि इसमें देश के 130 शहरों को शामिल किया गया था। हरियाणा का कोई शहर तीनों श्रेणियाें में टॉप 3 में जगह ही नहीं बना सका।
यह ऑटोमेटिक स्टेशन पड़े बंद
- टेरीग्राम ऑटोमेटिक स्टेशन
- विकास सदन
- सेक्टर 51
मानसून में भी खराब है गुरुग्राम की हवा
गुरुग्राम में वायु प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर है। यहां मानसून में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब मिली। एकमात्र चालू ऑटो स्टेशन ग्वाल पहाड़ी में 16 और 17 अगस्त को एयर क्वालिटी बेहद खराब दर्ज की गई जबकि जुलाई में यह 16 दिन बंद रहा था। मानसून में इस बार बारिश भी ज्यादा हुई लेकिन जिन दिनों बारिश नहीं हुई, उन दिनों टूटी सड़कों और जाम के कारण शहर की हवा में जबरदस्त जहर घुला रहा।
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हवा सांस लेने लायक नहीं है
वायु प्रदूषण के खिलाफ पिछले डेढ़ दशक से आवाज उठा रहीं सिटिजन फॉर क्लीन एयर की संस्थापक रुचिका सेठी बताती हैं कि प्रदूषण मापने की मशीनें ही खराब हैं तो निगरानी कैसे होगी। शहर के लोग किस खतरनाक स्तर की हवा में सांस ले रहे हैं, यह जानेंगे, तभी तो प्रदूषण से निपटने के उपाय हो सकेंगे। हर जगह खुले में रेत, निर्माण सामग्री पड़ी है। वाहनों के कारण जाम और टूटी सड़कों के कारण उड़ती धूल से पीएम-2.5 और पीएम-10 की मात्रा सामान्य से कई गुना ज्यादा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लगी तीन मशीन का टेंडर मुख्यालय से किया जाना है। जल्द ही मुख्यालय की ओर से नया टेंडर किया जाएगा। इसके बाद इनका रखरखाव शुरू किया जाएगा।
-आकांक्षा तंवर, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, गुरुग्राम
इन आधार पर मिलते हैं सर्वे में अंक
- सड़क के दोनों ओर फुटपाथ, टाइल्स
- मैकेनिकल सफाई, झाडू की व्यवस्था
- पुराने कचरे का बायोरेमेडिएशन
- सीएंडडी वेस्ट और कचरे का निस्तारण
- कचरा हटाकर ग्रीन बेल्ट, नगर वाटिका बनाना
- मियावाकी पौधरोपण के जरिए हरियाली
- सड़कों पर धूल नहीं, कचरा न जलाया जाए
- उद्योगों से प्रदूषण और पीएम-10 में कमी
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चार ऑटोमेटिक स्टेशन लगे लेकिन तीन बंद
अमित कुलश्रेष्ठ
गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी की हवा में जहर घुला हुआ है। यह कितना है, इसे जानने के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) मापने के ऑटोमेटिक स्टेशन ही 11 माह से बंद पड़े हैं। मिलेनियम सिटी के बंद ऑटोमेटिक स्टेशनों के कारण स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में गुरुग्राम को शामिल ही नहीं किया गया। तीन साल पहले वर्ष 2022 में ही गुरुग्राम को देश में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 24वां स्थान मिला था लेकिन उसके बाद से गुरुग्राम को सर्वे लायक ही नहीं माना गया। हाल ये है कि टूटी सड़कों, वाहनों के जाम, गंदगी, कचरा जलाने के कारण गुरुग्राम के लोगों का दम जहरीली हवाएं घोंट रही हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का हिस्सा गुरुग्राम भवन निर्माण से उड़ती धूल, वाहनों के जाम, कचरा जलाने और सड़कों पर जमा मिट्टी के उड़ने के कारण वायु प्रदूषण के मामले में खतरनाक स्थिति में है। यहां क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत यहां चार स्टेशन लगाए गए थे लेकिन यहां जरूरत 15 से ज्यादा स्टेशनों की है जो वाहनों और फैक्टरियों से निकलने वाले धुंए, प्रदूषण की निगरानी कर सकें। 11 माह से चार में से तीन स्टेशन यहां बंद पड़े हैं जो मॉनिटरिंग ही नहीं कर रहे। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का गुरुग्राम इसी वजह से हिस्सा नहीं बन सका जबकि इसमें देश के 130 शहरों को शामिल किया गया था। हरियाणा का कोई शहर तीनों श्रेणियाें में टॉप 3 में जगह ही नहीं बना सका।
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यह ऑटोमेटिक स्टेशन पड़े बंद
- टेरीग्राम ऑटोमेटिक स्टेशन
- विकास सदन
- सेक्टर 51
मानसून में भी खराब है गुरुग्राम की हवा
गुरुग्राम में वायु प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर है। यहां मानसून में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब मिली। एकमात्र चालू ऑटो स्टेशन ग्वाल पहाड़ी में 16 और 17 अगस्त को एयर क्वालिटी बेहद खराब दर्ज की गई जबकि जुलाई में यह 16 दिन बंद रहा था। मानसून में इस बार बारिश भी ज्यादा हुई लेकिन जिन दिनों बारिश नहीं हुई, उन दिनों टूटी सड़कों और जाम के कारण शहर की हवा में जबरदस्त जहर घुला रहा।
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हवा सांस लेने लायक नहीं है
वायु प्रदूषण के खिलाफ पिछले डेढ़ दशक से आवाज उठा रहीं सिटिजन फॉर क्लीन एयर की संस्थापक रुचिका सेठी बताती हैं कि प्रदूषण मापने की मशीनें ही खराब हैं तो निगरानी कैसे होगी। शहर के लोग किस खतरनाक स्तर की हवा में सांस ले रहे हैं, यह जानेंगे, तभी तो प्रदूषण से निपटने के उपाय हो सकेंगे। हर जगह खुले में रेत, निर्माण सामग्री पड़ी है। वाहनों के कारण जाम और टूटी सड़कों के कारण उड़ती धूल से पीएम-2.5 और पीएम-10 की मात्रा सामान्य से कई गुना ज्यादा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लगी तीन मशीन का टेंडर मुख्यालय से किया जाना है। जल्द ही मुख्यालय की ओर से नया टेंडर किया जाएगा। इसके बाद इनका रखरखाव शुरू किया जाएगा।
-आकांक्षा तंवर, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, गुरुग्राम
इन आधार पर मिलते हैं सर्वे में अंक
- सड़क के दोनों ओर फुटपाथ, टाइल्स
- मैकेनिकल सफाई, झाडू की व्यवस्था
- पुराने कचरे का बायोरेमेडिएशन
- सीएंडडी वेस्ट और कचरे का निस्तारण
- कचरा हटाकर ग्रीन बेल्ट, नगर वाटिका बनाना
- मियावाकी पौधरोपण के जरिए हरियाली
- सड़कों पर धूल नहीं, कचरा न जलाया जाए
- उद्योगों से प्रदूषण और पीएम-10 में कमी