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Gurugram News: अक्तूबर से लगेगा ग्रैप, निर्माण और तोड़फोड़ पर रहेगा प्रतिबंध
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प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए 500 वर्ग मीटर से अधिक के क्षेत्र वाली साइटों पर नहीं होगा काम
अनुमति के लिए साइटों को वेब पोर्टल पर करवाना होगा पंजीकृत, उपाय करने होंगे सुनिश्चित
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। पर्यावरण में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शहर में एक अक्तूबर से 500 वर्ग मीटर से अधिक के क्षेत्र वाली साइटों पर होने वाले निर्माण कार्यों पर रोक लग जाएगी। एक अक्तूबर से ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू हो रहा है, इसके लिए नगर निगम ने पूरी तैयारी कर ली है। ग्रैप लागू होने से शहर में निर्माण कार्यों की गति भी प्रभावित हो सकती है। इसमें निजी और सरकारी निर्माण दोनों ही तरह के कार्य शामिल हैं।
ग्रैप लागू करने के लिए नगर निगम ने कार्य और क्षेत्र के अनुसार अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। दायित्व भी निर्धारित किए हैं। प्रावधान लागू होने के बाद प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी। ग्रैप को चार चरणों में लागू किया जाएगा। इसमें अलग-अलग तरह के प्रतिबंध लागू रहेंगे।
पहले चरण में इन गतिविधियों पर रहेगी रोक
वायु गुणवत्ता सूचकांक 201-300 के बीच रहने पर पहला चरण लागू रहता है। इसमें निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। उनका पालन करना होता है। इसकी जिम्मेदारी नगर निगम ने कार्यकारी अभियंता (निर्माण और ध्वस्तीकरण) और सहायक अभियंता (अतिक्रमण) को सौंपी गई है। पहले चरण में 500 वर्ग मीटर प्लॉट एरिया से अधिक वाली साइटों को वेब पोर्टल पर पंजीकृत करवाना होगा। नियमों के तहत धूल को उड़ने से रोकने के प्रबंध सुनिश्चित करने होंगे। मलबा उठाने से पहले पानी का छिड़काव करना होगा। तंदूर में कोयला व लकड़ी के उपयोग पर भी प्रतिबंध होगा। नगर निगम क्षेत्र में निर्माण और ध्वस्त का वेस्ट का उठान सुनिश्चित करने की कार्यकारी अभियंता (सीएंडडी वेस्ट) और वरिष्ठ सफाई निरीक्षक (मुख्यालय) की जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है। मशीनों से स्वीपिंग और पानी का छिड़काव सुनिश्चित करने के लिए कार्यकारी अभियंता (बागवानी) तथा एसएसआई (मुख्यालय) काम करेंगे। मलबे और कूड़े को ले जाने वाले वाहनों काे ढंकना होगा। निर्माण साइटों पर एंटी स्मॉग गन भी लगाई जाएगी।
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दूसरे चरण में जनरेटरों पर भी लागू हो जाएगा प्रतिबंध
वायु गुणवत्ता सूचकांक 301 से 400 के बीच में होने पर ग्रैप का दूसरा चरण लागू हो जाएगा। इस दौरान जनरेटर के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा। केवल एलपीजी, नेचुरल गैस, बायो गैस, प्रोपेन व बूटेन से संचालित होने वाले जनरेटर उपयोग किए जा सकेंगे। इसके अलावा 10 केवीए क्षमता के न्यू पावर जनरेटर सेट तथा ड्यूल फ्यूल मॉड वाले ईसीडी रेट्रो फिटिड 125 किलोवाट से 10 केवीए की क्षमता के जनरेटर सेट का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही 19 किलोवाट से 125 किलोवाट तक के ड्यूल फ्यूल मॉड वाले जनरेटर तथा पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस लगे हुए व इससे अधिक क्षमता के जनरेटर प्रतिदिन केवल 2 घंटे चलाने की अनुमति होगी।
तीसरे चरण में दोनों चरणों के प्रतिबंध लागू रहेंगे
वायु गुणवत्ता सूचकांक 401 से 450 होने पर तीसरा चरण लागू हो जाएगा। इसमें दोनों चरणों में लागू प्रतिबंध जारी रहेंगे। सभी तरह की निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियां बंद रहेंगी, जिनमें अनुमति रहेगी उनमें शर्तों का पालन करना होगा।
450 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक पर चौथा चरण
वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 से अधिक होने पर चौथा चरण लागू हो जाएगा। इसमें सभी प्रकार के निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। तीनों चरणों में प्रदूषण को कम करने के लिए दिए गए प्रतिबंध भी लागू रहेंगे तथा धूल को उड़ने से रोकने के पर्याप्त प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे।
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अनुमति के लिए साइटों को वेब पोर्टल पर करवाना होगा पंजीकृत, उपाय करने होंगे सुनिश्चित
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। पर्यावरण में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शहर में एक अक्तूबर से 500 वर्ग मीटर से अधिक के क्षेत्र वाली साइटों पर होने वाले निर्माण कार्यों पर रोक लग जाएगी। एक अक्तूबर से ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू हो रहा है, इसके लिए नगर निगम ने पूरी तैयारी कर ली है। ग्रैप लागू होने से शहर में निर्माण कार्यों की गति भी प्रभावित हो सकती है। इसमें निजी और सरकारी निर्माण दोनों ही तरह के कार्य शामिल हैं।
ग्रैप लागू करने के लिए नगर निगम ने कार्य और क्षेत्र के अनुसार अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। दायित्व भी निर्धारित किए हैं। प्रावधान लागू होने के बाद प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी। ग्रैप को चार चरणों में लागू किया जाएगा। इसमें अलग-अलग तरह के प्रतिबंध लागू रहेंगे।
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पहले चरण में इन गतिविधियों पर रहेगी रोक
वायु गुणवत्ता सूचकांक 201-300 के बीच रहने पर पहला चरण लागू रहता है। इसमें निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। उनका पालन करना होता है। इसकी जिम्मेदारी नगर निगम ने कार्यकारी अभियंता (निर्माण और ध्वस्तीकरण) और सहायक अभियंता (अतिक्रमण) को सौंपी गई है। पहले चरण में 500 वर्ग मीटर प्लॉट एरिया से अधिक वाली साइटों को वेब पोर्टल पर पंजीकृत करवाना होगा। नियमों के तहत धूल को उड़ने से रोकने के प्रबंध सुनिश्चित करने होंगे। मलबा उठाने से पहले पानी का छिड़काव करना होगा। तंदूर में कोयला व लकड़ी के उपयोग पर भी प्रतिबंध होगा। नगर निगम क्षेत्र में निर्माण और ध्वस्त का वेस्ट का उठान सुनिश्चित करने की कार्यकारी अभियंता (सीएंडडी वेस्ट) और वरिष्ठ सफाई निरीक्षक (मुख्यालय) की जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है। मशीनों से स्वीपिंग और पानी का छिड़काव सुनिश्चित करने के लिए कार्यकारी अभियंता (बागवानी) तथा एसएसआई (मुख्यालय) काम करेंगे। मलबे और कूड़े को ले जाने वाले वाहनों काे ढंकना होगा। निर्माण साइटों पर एंटी स्मॉग गन भी लगाई जाएगी।
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दूसरे चरण में जनरेटरों पर भी लागू हो जाएगा प्रतिबंध
वायु गुणवत्ता सूचकांक 301 से 400 के बीच में होने पर ग्रैप का दूसरा चरण लागू हो जाएगा। इस दौरान जनरेटर के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा। केवल एलपीजी, नेचुरल गैस, बायो गैस, प्रोपेन व बूटेन से संचालित होने वाले जनरेटर उपयोग किए जा सकेंगे। इसके अलावा 10 केवीए क्षमता के न्यू पावर जनरेटर सेट तथा ड्यूल फ्यूल मॉड वाले ईसीडी रेट्रो फिटिड 125 किलोवाट से 10 केवीए की क्षमता के जनरेटर सेट का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही 19 किलोवाट से 125 किलोवाट तक के ड्यूल फ्यूल मॉड वाले जनरेटर तथा पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस लगे हुए व इससे अधिक क्षमता के जनरेटर प्रतिदिन केवल 2 घंटे चलाने की अनुमति होगी।
तीसरे चरण में दोनों चरणों के प्रतिबंध लागू रहेंगे
वायु गुणवत्ता सूचकांक 401 से 450 होने पर तीसरा चरण लागू हो जाएगा। इसमें दोनों चरणों में लागू प्रतिबंध जारी रहेंगे। सभी तरह की निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियां बंद रहेंगी, जिनमें अनुमति रहेगी उनमें शर्तों का पालन करना होगा।
450 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक पर चौथा चरण
वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 से अधिक होने पर चौथा चरण लागू हो जाएगा। इसमें सभी प्रकार के निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। तीनों चरणों में प्रदूषण को कम करने के लिए दिए गए प्रतिबंध भी लागू रहेंगे तथा धूल को उड़ने से रोकने के पर्याप्त प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे।