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Gurugram News: आपातकाल की यातनाएं अभी भी पैदा कर देती हैं सिहरन
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महावीर भारद्वाज
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21 मार्च आपात काल समाप्ति दिवस पर विशेष....
शहर के सैकड़ों लोग सत्याग्रह करने पर भेजे गए थे जेल
21 मार्च 1977 को आपातकाल हटने पर हुए थे रिहा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। देश के अंदर आपातकाल 25 जून 1975 को लगाया गया था और 21 मार्च 1977 को 21 महीने बाद उसे हटा लिया गया। इस दौरान जो हुआ वह देश के इतिहास का काला पन्ना बन गया है। वह लोग जिन्हें इस दौरान सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, अब भी उस वक्त दी गई यातनाओं को याद करके सिहर जाते हैं। उनका कहना है कि यातना देने में उस समय की पुलिस अंग्रेजों से भी आगे निकल गई थी।
शहर के ऐसे ही एक बुजुर्ग हैं महावीर भारद्वाज जो शहर में सेक्टर-4 में रहते हैं। लोकतंत्र सेनानी संगठन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष महावीर भारद्वाज कहते हैं कि उस वक्त उनकी उम्र 21 वर्ष थी। सत्याग्रह करने पर उन्हें 14 नवंबर 1975 को 9 साथियों के साथ गिरफ्तार कर रेवाड़ी जेल में भेज दिया गया। जेल भेजने से पहले पुलिस ने उनको और उनके साथियों को कड़ी यातनाएं दीं। उनसे पूछा गया कि और कौन-कौन साथी हैं। अखबार कहां छप रहे हैं। उन्होंने यातनाएं सहीं लेकिन कुछ नहीं बताया। उस समय प्रदेश में बंशीलाल की सरकार थी। सरकार ने अखबारों के ऑफिस का बिजली कनेक्शन काट दिया। सेंसरशिप लागू कर दी थी।
आज भी हैं शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान
गुरुग्राम के राम विलास शर्मा को भी पुलिस ने यातनाएं दीं। उनके शरीर को जलती सिगरेट से दागा गया। उसके निशान आज भी उनके शरीर पर देखे जा सकते हैं। 21 मार्च 1977 को जब आपातकाल समाप्ति की घोषणा की गई तब इस दौरान जेल भेजे गए लोगों को रिहा किया गया।
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शहर के यह लोग भी गए जेल
महावीर भारद्वाज बताते हैं कि गुरुग्राम से जेल में बंद होने वालों में व्यवसायी श्रीचंद गुप्ता, विपिन सिंघल, प्रमोद वशिष्ठ, अनिल नागपाल, आत्म प्रकाश मनचंदा, प्रेम प्रकाश गिरधर, सोहनलाल गोगिया, राजवीर सिंह, कमला सिंगला, डॉ.. रमेश कुमार अग्रवाल, धर्मवीर सिंह, दिलीप सिंह आदि थे।
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शहर के सैकड़ों लोग सत्याग्रह करने पर भेजे गए थे जेल
21 मार्च 1977 को आपातकाल हटने पर हुए थे रिहा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। देश के अंदर आपातकाल 25 जून 1975 को लगाया गया था और 21 मार्च 1977 को 21 महीने बाद उसे हटा लिया गया। इस दौरान जो हुआ वह देश के इतिहास का काला पन्ना बन गया है। वह लोग जिन्हें इस दौरान सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, अब भी उस वक्त दी गई यातनाओं को याद करके सिहर जाते हैं। उनका कहना है कि यातना देने में उस समय की पुलिस अंग्रेजों से भी आगे निकल गई थी।
शहर के ऐसे ही एक बुजुर्ग हैं महावीर भारद्वाज जो शहर में सेक्टर-4 में रहते हैं। लोकतंत्र सेनानी संगठन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष महावीर भारद्वाज कहते हैं कि उस वक्त उनकी उम्र 21 वर्ष थी। सत्याग्रह करने पर उन्हें 14 नवंबर 1975 को 9 साथियों के साथ गिरफ्तार कर रेवाड़ी जेल में भेज दिया गया। जेल भेजने से पहले पुलिस ने उनको और उनके साथियों को कड़ी यातनाएं दीं। उनसे पूछा गया कि और कौन-कौन साथी हैं। अखबार कहां छप रहे हैं। उन्होंने यातनाएं सहीं लेकिन कुछ नहीं बताया। उस समय प्रदेश में बंशीलाल की सरकार थी। सरकार ने अखबारों के ऑफिस का बिजली कनेक्शन काट दिया। सेंसरशिप लागू कर दी थी।
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आज भी हैं शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान
गुरुग्राम के राम विलास शर्मा को भी पुलिस ने यातनाएं दीं। उनके शरीर को जलती सिगरेट से दागा गया। उसके निशान आज भी उनके शरीर पर देखे जा सकते हैं। 21 मार्च 1977 को जब आपातकाल समाप्ति की घोषणा की गई तब इस दौरान जेल भेजे गए लोगों को रिहा किया गया।
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शहर के यह लोग भी गए जेल
महावीर भारद्वाज बताते हैं कि गुरुग्राम से जेल में बंद होने वालों में व्यवसायी श्रीचंद गुप्ता, विपिन सिंघल, प्रमोद वशिष्ठ, अनिल नागपाल, आत्म प्रकाश मनचंदा, प्रेम प्रकाश गिरधर, सोहनलाल गोगिया, राजवीर सिंह, कमला सिंगला, डॉ.. रमेश कुमार अग्रवाल, धर्मवीर सिंह, दिलीप सिंह आदि थे।