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न रिफंड की शर्तें बता रहे, न फ्लैट दिए जा रहे
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गुरुग्राम। सेक्टर-37 डी स्थित एनबीसीसी ग्रीन व्यू सोसाइटी के रहने वालों के सामने कठिन स्थिति पैदा हो गई है। आगामी 1 मार्च तक उन्हें सोसाइटी के सभी फ्लैट खाली करने हैं। लेकिन फ्लैट मालिकों को उनका पैसा वापस करने की शर्तें बताई जा रहीं हैं और न ही फ्लैट खाली करने वालों को दूसरी जगह फ्लैट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार की संस्था नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) ने 2011 में ग्रीन व्यू सोसाइटी का निर्माण शुरू करवाया था। 2017 से फ्लैटों का कब्जा देना शुरू किया था। इसके बाद से ही यहां हुए घटिया निर्माण का खुलासा हो रहा है। यहां की सभी 7 टॉवरों की लगातार जर्जर हालत को ध्यान में रखते हुए आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद 1 मार्च तक सभी फ्लैट खाली करवाने के आदेश जिला प्रशासन ने दिए थे।
सोसाइटी की आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष जी मोहंती ने बताया कि एक सोसाइटी में उन्हें दो फ्लैट उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन जब मौके पर जाकर देखा तो वह पूरी तरह बने ही नहीं थे। रामप्रस्थ सोसाइटी में जो फ्लैट दिए हैं वह बहुत छोटे हैं।
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फ्लैट मालिक के लिए एनबीसीसी ने किराया उपलब्ध कराने का विकल्प रखा है लेकिन जब भी इनसे किराये की रकम आदि के संबंध में बात की जाती है तो यह सिर्फ इतना कहते हैं कि हो जाएगा। एनबीसीसी के इस रुख से यहां के रहने वाले करीब 140 से अधिक परिवारों के सामने मुश्किल पैदा हो गई है।
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केंद्र सरकार की संस्था नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) ने 2011 में ग्रीन व्यू सोसाइटी का निर्माण शुरू करवाया था। 2017 से फ्लैटों का कब्जा देना शुरू किया था। इसके बाद से ही यहां हुए घटिया निर्माण का खुलासा हो रहा है। यहां की सभी 7 टॉवरों की लगातार जर्जर हालत को ध्यान में रखते हुए आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद 1 मार्च तक सभी फ्लैट खाली करवाने के आदेश जिला प्रशासन ने दिए थे।
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सोसाइटी की आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष जी मोहंती ने बताया कि एक सोसाइटी में उन्हें दो फ्लैट उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन जब मौके पर जाकर देखा तो वह पूरी तरह बने ही नहीं थे। रामप्रस्थ सोसाइटी में जो फ्लैट दिए हैं वह बहुत छोटे हैं।
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फ्लैट मालिक के लिए एनबीसीसी ने किराया उपलब्ध कराने का विकल्प रखा है लेकिन जब भी इनसे किराये की रकम आदि के संबंध में बात की जाती है तो यह सिर्फ इतना कहते हैं कि हो जाएगा। एनबीसीसी के इस रुख से यहां के रहने वाले करीब 140 से अधिक परिवारों के सामने मुश्किल पैदा हो गई है।