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मूर्तिकारों को कारोबार के श्रीगणेश की आस
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गुरुग्राम। कोरोना महामारी के कारण बाजारों से रौनक गायब है, वहीं मूर्तिकारों को कारोबार के श्रीगणेश की आस है। शहर की विभिन्न सड़कों किनारे मूर्तिकारों ने पिछले दो माह से भगवान गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां बना रहे हैं, लेकिन खरीदार नहीं आ रहे। ऐसे में वह भगवान गणेश से आस लगाए बैठे हैं कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर बनाई हुई मूर्तियां बिकेंगी और उनकी आमदनी होगी। लेकिन साथ ही कोरोना महामारी के प्रभाव को देखते हुए मूर्तिकारों को चिंता सता रही है कि अगर ज्यादा मूर्तियां नहीं बिकी तो परिवार का भरण-पोषण कैसे हो पाएगा।
गणेश उत्सव 10 सितंबर से शुरू हो रहा है। आने वाले दस दिन तक गणपति बप्पा का पूजन की जाती है। परंपरा अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को पवित्र नदियों या जलाशय में विसर्जित किया जाता है। ऐसे में मूर्तिकार उम्मीद लगाए बैठे हैं कि 8 व 9 सितंबर को भगवान गणेश की मूर्तियां बिकेंगी।
मिट्टी और पीओपी मिलाकर बनाई मूर्तियां
गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मिट्टी और पीओपी मिलाकर बनाई गई हैं, जोकि पानी में विसर्जित करते ही पिघल जाएंगी। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। मूर्तियों के दाम उनकी ऊंचाई व आकार के हिसाब से तय किए हैं। इसमें 100 रुपये से 5000 रुपये की मूर्तियां तैयार की हुई हैं। राजस्थान के बाड़मेर जिले के चेतन ने बताया कि दो माह से मेहनत करके यह मूर्तियां बनाई गई हैं। गणेश चतुर्थी पर मूर्तियों के बिकने की उम्मीद है। लेकिन कोरोना के कारण लोगों के रोजगार व नौकरी छूटी हैं, जिसका असर उनके काम पर पड़ा है। वहीं मूर्तिकार माला राम ने बताया कि उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर गणेश की मूर्तियां तैयार की है, अगर उनकी मूर्ति नहीं बिक पाती हैं तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट आ जाएगा। वर्तमान की स्थिति को देखकर लग रहा है कि लोग अबकी बार भी गणेश महोत्सव को छोटे स्तर पर ही मनाएंगे। ऐसे में मूर्तियां कम ही बिकने के आसार नजर आ रहे हैं।
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गणेश उत्सव 10 सितंबर से शुरू हो रहा है। आने वाले दस दिन तक गणपति बप्पा का पूजन की जाती है। परंपरा अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को पवित्र नदियों या जलाशय में विसर्जित किया जाता है। ऐसे में मूर्तिकार उम्मीद लगाए बैठे हैं कि 8 व 9 सितंबर को भगवान गणेश की मूर्तियां बिकेंगी।
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मिट्टी और पीओपी मिलाकर बनाई मूर्तियां
गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मिट्टी और पीओपी मिलाकर बनाई गई हैं, जोकि पानी में विसर्जित करते ही पिघल जाएंगी। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। मूर्तियों के दाम उनकी ऊंचाई व आकार के हिसाब से तय किए हैं। इसमें 100 रुपये से 5000 रुपये की मूर्तियां तैयार की हुई हैं। राजस्थान के बाड़मेर जिले के चेतन ने बताया कि दो माह से मेहनत करके यह मूर्तियां बनाई गई हैं। गणेश चतुर्थी पर मूर्तियों के बिकने की उम्मीद है। लेकिन कोरोना के कारण लोगों के रोजगार व नौकरी छूटी हैं, जिसका असर उनके काम पर पड़ा है। वहीं मूर्तिकार माला राम ने बताया कि उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर गणेश की मूर्तियां तैयार की है, अगर उनकी मूर्ति नहीं बिक पाती हैं तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट आ जाएगा। वर्तमान की स्थिति को देखकर लग रहा है कि लोग अबकी बार भी गणेश महोत्सव को छोटे स्तर पर ही मनाएंगे। ऐसे में मूर्तियां कम ही बिकने के आसार नजर आ रहे हैं।
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