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Gurugram News: कागजों में स्कूल, हकीकत में टूट रहे बच्चों के सपने
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प्रशासन की लापरवाही...यहां शिक्षा नहीं अव्यवस्थाओं का डेरा, गैलरी बनी क्लासरूम
नंबर गेम - 300 विद्यार्थियों के लिए सिर्फ तीन कमरे
स्वराजंलि
गुरुग्राम। शिवाजी नगर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कमरों और बेंचों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के कारण उन्हें गैलरी में जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। विद्यार्थियों का भविष्य बनाने वाला स्कूल सिर्फ कागजों तक सीमित है असल में तो स्कूल बच्चों के सपने तोड़ रहा है।
स्कूल में लगभग 300 बच्चे पढ़ते हैं, जिनके लिए सिर्फ चार कमरे हैं। इनमें से एक कमरा कंप्यूटर लैब के लिए इस्तेमाल होता है, इसलिए बाकी कक्षाओं के लिए केवल तीन ही कमरे बचते हैं। कमरे कम होने के कारण कई बार विद्यार्थियों को गैलरी में जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जाता है।
सर्दी के मौसम शुरू होने से विद्यार्थियों को ठंड में जमीन पर बैठने में भी मुश्किल होती है। इससे उनका स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कमरों की कमी के कारण स्कूल प्रशासन को कई बार कक्षाओं को मिलाकर पढ़ाना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों की सही तरीके से पढ़ाई भी नहीं हो पाती है। साथ ही शिक्षक भी विद्यार्थियों पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते हैं।
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इसके अलावा, स्कूल में बेंचों की कमी भी बनी हुई है। कई छात्रों को जमीन पर बैठकर पढ़ना पड़ रहा है, जिससे उनकी एकाग्रता कम होती है और उनकी लिखने-पढ़ने की गति भी प्रभावित होती है। बच्चों की बढ़ती संख्या के हिसाब से स्कूल में सुविधाएं नहीं बढ़ाई जा रही हैं, जिसके कारण पढ़ाई लगातार बाधित हो रही है।
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कमरों की कमी को देखते हुए स्कूल में दो कमरे बनाने के लिए विधायक मुकेश शर्मा द्वारा नींव भी रखी जा चुकी है। दिसंबर माह तक दोनों कमरे बनने की उम्मीद है। - सरोज दहिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी गुरुग्राम।
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नंबर गेम - 300 विद्यार्थियों के लिए सिर्फ तीन कमरे
स्वराजंलि
गुरुग्राम। शिवाजी नगर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कमरों और बेंचों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के कारण उन्हें गैलरी में जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। विद्यार्थियों का भविष्य बनाने वाला स्कूल सिर्फ कागजों तक सीमित है असल में तो स्कूल बच्चों के सपने तोड़ रहा है।
स्कूल में लगभग 300 बच्चे पढ़ते हैं, जिनके लिए सिर्फ चार कमरे हैं। इनमें से एक कमरा कंप्यूटर लैब के लिए इस्तेमाल होता है, इसलिए बाकी कक्षाओं के लिए केवल तीन ही कमरे बचते हैं। कमरे कम होने के कारण कई बार विद्यार्थियों को गैलरी में जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जाता है।
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सर्दी के मौसम शुरू होने से विद्यार्थियों को ठंड में जमीन पर बैठने में भी मुश्किल होती है। इससे उनका स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कमरों की कमी के कारण स्कूल प्रशासन को कई बार कक्षाओं को मिलाकर पढ़ाना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों की सही तरीके से पढ़ाई भी नहीं हो पाती है। साथ ही शिक्षक भी विद्यार्थियों पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते हैं।
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इसके अलावा, स्कूल में बेंचों की कमी भी बनी हुई है। कई छात्रों को जमीन पर बैठकर पढ़ना पड़ रहा है, जिससे उनकी एकाग्रता कम होती है और उनकी लिखने-पढ़ने की गति भी प्रभावित होती है। बच्चों की बढ़ती संख्या के हिसाब से स्कूल में सुविधाएं नहीं बढ़ाई जा रही हैं, जिसके कारण पढ़ाई लगातार बाधित हो रही है।
कमरों की कमी को देखते हुए स्कूल में दो कमरे बनाने के लिए विधायक मुकेश शर्मा द्वारा नींव भी रखी जा चुकी है। दिसंबर माह तक दोनों कमरे बनने की उम्मीद है। - सरोज दहिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी गुरुग्राम।