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Gurugram News: हरेरा ने दुकान की बेसिक सेल प्राइस के अलावा 16.50 लाख देने का दिया आदेश
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अलॉटी को मानसिक परेशानी, मुकदमे और दूसरे नुकसान की फीस भी देना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) गुरुग्राम ने एक मामले में एनबीसीसी को निर्देश दिया है कि वह यूनिट (दुकान) के बेसिक सेल प्राइस (मूल विक्रय मूल्य) 19,42,200 रुपये के अलावा प्रॉपर्टी की कीमत में हुए नुकसान के लिए 16,50,000 रुपये का मुआवजा दे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए 1,00,000 रुपये, दुकान के अंदर के काम के नुकसान के लिए 2,00,000 रुपये और मुकदमे का खर्च 50,000 रुपये दे। रेरा ने एआई से प्रॉपर्टी का मूल्यांकन कराया जोकि अतिरिक्त मिला।
शिकायतकर्ता नंद लाल ने 2018 में गुरुग्राम के सेक्टर-37 में एनबीसीसी ग्रीन व्यू में 166 स्क्वायर फीट का एक कॉमर्शियल यूनिट बुक किया था। हरेरा गुरुग्राम के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर ने ऑर्डर में कहा कि मुआवजे की रकम इस ऑर्डर की तारीख से 10.85 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ दी जाए।
एनबीसीसी एक बड़ी रियल एस्टेट पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग कंपनी है। एनबीसीसी का सेक्टर-37 में एनबीसीसी ग्रीन व्यू प्रोजेक्ट लाया था। साल 2020 में एनबीसीसी ने सोसाइटी के टावरों का स्ट्रक्चरल असेसमेंट कराया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर सभी को यूनिट खाली करने की सलाह दी गई थी क्योंकि प्रोजेक्ट रहने लायक नहीं था। इस मामले में यूनिट मालिक खर्चों का रिफंड ऑफर कुछ शर्ताें के साथ किया था। शर्ताें से नाखुश नंद लाल ने प्रॉपर्टी की मौजूदा मार्केट वैल्यू के हिसाब से रिफंड की मांग करते हुए हरेरा गुरुग्राम का रुख किया। अथॉरिटी ने साल 2024 में नंद लाल के पक्ष में केस का फैसला सुनाया। इसके बाद पी़ड़ित एडजुडिकेटिंग ऑफिसर में चले गया। इसमें बताया गया है कि जिस यूनिट की बात हो रही है, जो एक कॉमर्शियल दुकान है, जिसका साइज 166 स्क्वायर फीट है, उसे शिकायत करने वाले को 19,42,200, बेसिक सेल प्राइस के सेल कंसीडरेशन पर अलॉट किया गया था और 11,700 रुपये स्क्वायर फीट था।
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एआई ओवरव्यू के अनुसार, इसी तरह की प्रॉपर्टीज के रेट 22,000 रुपये स्क्वायर फीट तक बढ़ गए हैं या दूसरे शब्दों में प्रॉपर्टी 88 परसेंट बढ़ गई है। शिकायतकर्ता को पेमेंट की गई रकम पहले ही रिफंड करने का ऑर्डर दिया जा चुका है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए शिकायतकर्ता को 16,50,000 की रकम लॉस ऑफ एप्रिसिएशन(मूल्यह्रास)के तौर पर देने होंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) गुरुग्राम ने एक मामले में एनबीसीसी को निर्देश दिया है कि वह यूनिट (दुकान) के बेसिक सेल प्राइस (मूल विक्रय मूल्य) 19,42,200 रुपये के अलावा प्रॉपर्टी की कीमत में हुए नुकसान के लिए 16,50,000 रुपये का मुआवजा दे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए 1,00,000 रुपये, दुकान के अंदर के काम के नुकसान के लिए 2,00,000 रुपये और मुकदमे का खर्च 50,000 रुपये दे। रेरा ने एआई से प्रॉपर्टी का मूल्यांकन कराया जोकि अतिरिक्त मिला।
शिकायतकर्ता नंद लाल ने 2018 में गुरुग्राम के सेक्टर-37 में एनबीसीसी ग्रीन व्यू में 166 स्क्वायर फीट का एक कॉमर्शियल यूनिट बुक किया था। हरेरा गुरुग्राम के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर ने ऑर्डर में कहा कि मुआवजे की रकम इस ऑर्डर की तारीख से 10.85 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ दी जाए।
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एनबीसीसी एक बड़ी रियल एस्टेट पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग कंपनी है। एनबीसीसी का सेक्टर-37 में एनबीसीसी ग्रीन व्यू प्रोजेक्ट लाया था। साल 2020 में एनबीसीसी ने सोसाइटी के टावरों का स्ट्रक्चरल असेसमेंट कराया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर सभी को यूनिट खाली करने की सलाह दी गई थी क्योंकि प्रोजेक्ट रहने लायक नहीं था। इस मामले में यूनिट मालिक खर्चों का रिफंड ऑफर कुछ शर्ताें के साथ किया था। शर्ताें से नाखुश नंद लाल ने प्रॉपर्टी की मौजूदा मार्केट वैल्यू के हिसाब से रिफंड की मांग करते हुए हरेरा गुरुग्राम का रुख किया। अथॉरिटी ने साल 2024 में नंद लाल के पक्ष में केस का फैसला सुनाया। इसके बाद पी़ड़ित एडजुडिकेटिंग ऑफिसर में चले गया। इसमें बताया गया है कि जिस यूनिट की बात हो रही है, जो एक कॉमर्शियल दुकान है, जिसका साइज 166 स्क्वायर फीट है, उसे शिकायत करने वाले को 19,42,200, बेसिक सेल प्राइस के सेल कंसीडरेशन पर अलॉट किया गया था और 11,700 रुपये स्क्वायर फीट था।
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एआई ओवरव्यू के अनुसार, इसी तरह की प्रॉपर्टीज के रेट 22,000 रुपये स्क्वायर फीट तक बढ़ गए हैं या दूसरे शब्दों में प्रॉपर्टी 88 परसेंट बढ़ गई है। शिकायतकर्ता को पेमेंट की गई रकम पहले ही रिफंड करने का ऑर्डर दिया जा चुका है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए शिकायतकर्ता को 16,50,000 की रकम लॉस ऑफ एप्रिसिएशन(मूल्यह्रास)के तौर पर देने होंगे।