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Gurugram News: मौत के चार दिन बाद लौटाया प्रीमियम, अब एक लाख मुआवजा भी देना होगा
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-घर के लोन से जुड़ी बीमा पॉलिसी रद्द करने पर उपभोक्ता आयोग का आदेश
उपभोक्ता आयोग से
विराट त्यागी
गुरुग्राम। घर बनाने के लिए लिए गए लोन से जुड़ी बीमा पॉलिसी को बीमाधारक की मौत के चार दिन बाद प्रीमियम लौटाकर रद्द करना बैंक और बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा मानते हुए शिकायतकर्ता को बीमा क्लेम के साथ एक लाख रुपये मुआवजा और 55 हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता रेखा ने आयोग को बताया कि उनके पति ने रेवाड़ी स्थित पंजाब नेशनल बैंक से आठ लाख रुपये का होम लोन लिया था। इसके साथ 12,093 रुपये की जीवन सुरक्षा बीमा पॉलिसी भी ली गई थी। 12 सितंबर 2021 को उनके पति की मृत्यु हो गई, लेकिन चार दिन बाद बैंक ने पॉलिसी का प्रीमियम वापस कर पॉलिसी रद्द कर दी। इसके बाद भी परिवार से लोन की चार किस्तों समेत करीब 1.20 लाख रुपये वसूले गए।आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि बैंक का रवैया लापरवाहीपूर्ण था। आयोग ने बैंक को बीमा क्लेम और वसूली गई किस्तों की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने, मानसिक पीड़ा के लिए एक लाख रुपये तथा कानूनी खर्च के लिए 55 हजार रुपये देने का आदेश दिया। संवाद
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उपभोक्ता आयोग से
विराट त्यागी
गुरुग्राम। घर बनाने के लिए लिए गए लोन से जुड़ी बीमा पॉलिसी को बीमाधारक की मौत के चार दिन बाद प्रीमियम लौटाकर रद्द करना बैंक और बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा मानते हुए शिकायतकर्ता को बीमा क्लेम के साथ एक लाख रुपये मुआवजा और 55 हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता रेखा ने आयोग को बताया कि उनके पति ने रेवाड़ी स्थित पंजाब नेशनल बैंक से आठ लाख रुपये का होम लोन लिया था। इसके साथ 12,093 रुपये की जीवन सुरक्षा बीमा पॉलिसी भी ली गई थी। 12 सितंबर 2021 को उनके पति की मृत्यु हो गई, लेकिन चार दिन बाद बैंक ने पॉलिसी का प्रीमियम वापस कर पॉलिसी रद्द कर दी। इसके बाद भी परिवार से लोन की चार किस्तों समेत करीब 1.20 लाख रुपये वसूले गए।आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि बैंक का रवैया लापरवाहीपूर्ण था। आयोग ने बैंक को बीमा क्लेम और वसूली गई किस्तों की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने, मानसिक पीड़ा के लिए एक लाख रुपये तथा कानूनी खर्च के लिए 55 हजार रुपये देने का आदेश दिया। संवाद
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