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Gurugram News: जलभराव की समस्या से मिलेगी स्थायी राहत

Sun, 03 May 2026 12:55 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2026 12:55 AM IST
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Permanent relief from the problem of waterlogging.
बैठक में तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन संरचनाओं और माइक्रो एसटीपी परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा शहर में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए व्यापक स्तर पर कार्ययोजना तैयार की गई है। इसी कड़ी में निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में आयोजित पोंड रिवाइवल कमेटी की समीक्षा बैठक हुई।
इसमें तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच) संरचनाओं और माइक्रो एसटीपी परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि मानसून से पहले सभी आवश्यक कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना प्राथमिकता है, ताकि शहरवासियों को जलभराव जैसी समस्याओं से राहत मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए तय समयसीमा में कार्य पूर्ण किए जाएं। नगर निगम द्वारा प्राथमिकता के आधार पर 28 तालाबों को चिन्हित किया गया है, जो जलभराव वाले क्षेत्रों के पास स्थित हैं। इन तालाबों की क्षमता बढ़ाने, गाद निकालने, खुदाई और एंबैंकमेंट मजबूत करने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। पहले चरण में मानसून से पहले इन तालाबों की जल धारण क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि दूसरे चरण में इन्हें सुंदर, उपयोगी और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बनाया जाएगा। इसके तहत वॉकवे, सोलर लाइट, ओपन जिम, पौधरोपण और माइक्रो एसटीपी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं पर तेजी

शहर में कुल 468 पारंपरिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं हैं, जिनमें से 309 कार्यशील हैं जबकि 159 को सुधारने की दिशा में कार्य चल रहा है। निगम द्वारा विभिन्न जोनों में इन संरचनाओं की सफाई, मरम्मत और नए निर्माण के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा 206 मॉड्यूलर रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है, जिन्हें 15 मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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माइक्रो एसटीपी और ट्रीटेड वाटर का उपयोग

नगर निगम क्षेत्र में 49 माइक्रो एसटीपी स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 2275 केएलडी है। इनमें से 41 कार्यशील हैं, जबकि शेष को जल्द चालू करने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही ट्रीटेड पानी का उपयोग पार्कों और तालाबों में किया जा रहा है, जिससे पानी का संरक्षण और पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। निगमायुक्त ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और हर परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने विशेष रूप से जलभराव वाले हॉटस्पॉट क्षेत्रों में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा मानसून से पहले जलभराव की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई जा रही है। तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और ट्रीटेड वाटर के उपयोग से शहर को जल संकट और जलभराव दोनों समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है।
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