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Gurugram News: एनएचएआई की रिव्यू याचिका हुई खारिज, एनजीटी ने 45 करोड़ का जुर्माना बरकरार रखा
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फरवरी में एनजीटी ने नेशनल हाईवे बनाने के क्रम में पेड़ काटे जाने, जोहड़ बंद किए जाने और नाले को पाटे जाने संबंधित पर्यावरणीय नुकसान के हर्जाने के तौर पर 45 करोड़ की जुर्माना राशि लगाई थी।
संवाद न्यूज एजेंसी
गुुरुग्राम। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने फरवरी के महीने में 45 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इसकी रिव्यू याचिका एनएचएआई ने एनजीटी में दाखिल की थी। आठ बिंदुओं पर बहस के बाद एनजीटी ने इस याचिका को शुक्रवार को निरस्त कर दिया है। एनएचएआई द्वारा दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे निर्माण के दौरान गांवों के पेड़ काटे जाने, नाला बंद किए जाने और जोहड़ को पाट दिए जाने का आरोप लगाते हुए वर्ष 2022 में ग्रामीण एडवोकेट प्रेम मोहन गौड़ ने यह याचिका दायर की थी। इसकी रिव्यू याचिका पर विचार करते हुए एनजीटी ने पांच जुलाई रिव्यू पीटिशन पर सुनवाई के दौरान पुराने फैसले पर कायम रहने का निर्णय दिया है। एनजीटी के पुराने निर्णय को बरकरार रखते हुए पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाने के लिए एनएचएआई पर लगाए गए जुर्माने को बरकरार रखा है। चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, जस्टिस सुदीप अग्रवाल, विशेषज्ञ सदस्य डा. ए. सेथिंल की पीठ ने 9 मई 2024 को दी गई इस रिव्यू याचिका पर पांच जुलाई 2024 को निर्णय दिया है। पुराने फैसले के अनुसार एनजीटी ने एनएचएआई पर परियोजना के मूल्य 908 करोड़ का पांच प्रतिशत जुर्माना लगाया था इस तरह जुर्माने की राशि 45.4 करोउ़ हो सकती थी मगर इसे पूर्णांक करते हुए 45 करोड़ रखा गया था।
ये है मामला
एक्सप्रेस वे के निर्माण के क्रम में पर्यावरण संबंधित नियमों के उल्लंघन पर एचएचएआई पर एनजीटी के जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और डॉ ए. सेथिंल की पीठ ने हाजीपुर गांव के निवासी प्रेम मोहन गौड़ की याचिका पर इस साल 12 फरवरी को सुनवाई के दौरान 45 करोड़ का जुर्माना लगाया था। याचिका कर्ता ने गुरुग्राम की सोहना तहसील के हाजीपुर और नूंह के किरंज गांव में डीएनडी- फरीदाबाद- केएमपी (दिल्ली, बड़ोदरा,मुंबई) एक्सप्रेस वे के निर्माण के दौरान पेड़ काटे जाने , जल निकासी के नाले ध्वस्त किए जाने , पंचायती रास्ते बर्बाद किए जाने ,सरकारी संरक्षित तालाब को पाट दिए जाने का आरोप लगाया था। वर्ष 2022 में लगाई गई इस याचिका के फैसले में एनजीटी ने कहा था कि एनएचएआई तीन महीने में जुर्माने की राशि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा करे। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो राज्य के मुख्य सचिव दो महीन सड़क तोड़ कर नाले, जोहड़ और सड़क को फिर से पहले जैसा बना दें।
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इन आरोपों पर ठहराया गया था पर्यावरणीय नुकसान
हाजीपुर चारागाह से 263 पेड़ काटे गए थे। 100 पेड़ किरंज में काटे गए थे। किरंज में तालाब और अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण के तहत संरक्षित तालाब का अवैध तरीके से पाट दिया गया था। किरंज में सिंचाई के लिए बने नालों पर अतिक्रमण कर दिया गया था। हाजीपुर में चारागाह को सड़क बनाने के लिए इस्तेमाल किया।
याचिका कर्ता ने कहा
एनएचएआई ने रिव्यू याचिका के लिए भारत की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता को माधवी दीवान को अपना वकील नियुक्त किया था। इस पर आठ बिंदुओ पर बहस हुई मगर कोर्ट ने इन बिंदुओं को तर्क सम्मत नहीं माना और फैसला हमारे पक्ष में आया है। इससे ग्रामीणों में खुशी है। पर्यावरणीय नुकसान के लिए एनएचएआई को 45 करोड़ रुपये हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भरने होंगे। - प्रेम मोहन गौड़ याचिका कर्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुुरुग्राम। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने फरवरी के महीने में 45 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इसकी रिव्यू याचिका एनएचएआई ने एनजीटी में दाखिल की थी। आठ बिंदुओं पर बहस के बाद एनजीटी ने इस याचिका को शुक्रवार को निरस्त कर दिया है। एनएचएआई द्वारा दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे निर्माण के दौरान गांवों के पेड़ काटे जाने, नाला बंद किए जाने और जोहड़ को पाट दिए जाने का आरोप लगाते हुए वर्ष 2022 में ग्रामीण एडवोकेट प्रेम मोहन गौड़ ने यह याचिका दायर की थी। इसकी रिव्यू याचिका पर विचार करते हुए एनजीटी ने पांच जुलाई रिव्यू पीटिशन पर सुनवाई के दौरान पुराने फैसले पर कायम रहने का निर्णय दिया है। एनजीटी के पुराने निर्णय को बरकरार रखते हुए पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाने के लिए एनएचएआई पर लगाए गए जुर्माने को बरकरार रखा है। चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, जस्टिस सुदीप अग्रवाल, विशेषज्ञ सदस्य डा. ए. सेथिंल की पीठ ने 9 मई 2024 को दी गई इस रिव्यू याचिका पर पांच जुलाई 2024 को निर्णय दिया है। पुराने फैसले के अनुसार एनजीटी ने एनएचएआई पर परियोजना के मूल्य 908 करोड़ का पांच प्रतिशत जुर्माना लगाया था इस तरह जुर्माने की राशि 45.4 करोउ़ हो सकती थी मगर इसे पूर्णांक करते हुए 45 करोड़ रखा गया था।
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ये है मामला
एक्सप्रेस वे के निर्माण के क्रम में पर्यावरण संबंधित नियमों के उल्लंघन पर एचएचएआई पर एनजीटी के जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और डॉ ए. सेथिंल की पीठ ने हाजीपुर गांव के निवासी प्रेम मोहन गौड़ की याचिका पर इस साल 12 फरवरी को सुनवाई के दौरान 45 करोड़ का जुर्माना लगाया था। याचिका कर्ता ने गुरुग्राम की सोहना तहसील के हाजीपुर और नूंह के किरंज गांव में डीएनडी- फरीदाबाद- केएमपी (दिल्ली, बड़ोदरा,मुंबई) एक्सप्रेस वे के निर्माण के दौरान पेड़ काटे जाने , जल निकासी के नाले ध्वस्त किए जाने , पंचायती रास्ते बर्बाद किए जाने ,सरकारी संरक्षित तालाब को पाट दिए जाने का आरोप लगाया था। वर्ष 2022 में लगाई गई इस याचिका के फैसले में एनजीटी ने कहा था कि एनएचएआई तीन महीने में जुर्माने की राशि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा करे। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो राज्य के मुख्य सचिव दो महीन सड़क तोड़ कर नाले, जोहड़ और सड़क को फिर से पहले जैसा बना दें।
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इन आरोपों पर ठहराया गया था पर्यावरणीय नुकसान
हाजीपुर चारागाह से 263 पेड़ काटे गए थे। 100 पेड़ किरंज में काटे गए थे। किरंज में तालाब और अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण के तहत संरक्षित तालाब का अवैध तरीके से पाट दिया गया था। किरंज में सिंचाई के लिए बने नालों पर अतिक्रमण कर दिया गया था। हाजीपुर में चारागाह को सड़क बनाने के लिए इस्तेमाल किया।
याचिका कर्ता ने कहा
एनएचएआई ने रिव्यू याचिका के लिए भारत की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता को माधवी दीवान को अपना वकील नियुक्त किया था। इस पर आठ बिंदुओ पर बहस हुई मगर कोर्ट ने इन बिंदुओं को तर्क सम्मत नहीं माना और फैसला हमारे पक्ष में आया है। इससे ग्रामीणों में खुशी है। पर्यावरणीय नुकसान के लिए एनएचएआई को 45 करोड़ रुपये हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भरने होंगे। - प्रेम मोहन गौड़ याचिका कर्ता