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Gurugram News: दो महीने में 25 लाख से अधिक सरकारी राशि खर्च शिक्षा विभाग ने बनाई जांच कमेटी, नियमों की अनदेखी से मचा बवाल
Mon, 15 Sep 2025 11:06 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Updated Mon, 15 Sep 2025 11:06 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
तावड़ू। नगर के बाईपास स्थित राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय-2 में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक 7 जुलाई से 29 अगस्त तक यानी महज 54 दिनों में विद्यालय के बैंक खाते से 25 लाख 31 हजार 480 रुपये खर्च कर दिए गए। यह राशि किन कार्यों और मदों पर खर्च हुई, इसका स्पष्ट ब्योरा उपलब्ध नहीं है, जिससे शिक्षा विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है।
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश जारी किए और चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की अध्यक्षता खंड शिक्षा अधिकारी तावड़ू दीप्ति बोकन कर रही हैं। कमेटी में हथीन राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य योगेंद्र सिंह, शिक्षा विभाग के कनिष्ठ अभियंता फैजल हुसैन और लेखाकार मनीष कुमार शामिल हैं। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। विद्यालय में लंबे समय से डीडी पावर को लेकर विवाद चल रहा है। तीन महीनों में ही चार बार प्राचार्य बदले गए और अलग-अलग व्यक्तियों को डीडी पावर सौंप दी गई। यह लगातार बदलाव खुद ही कई सवाल खड़े करता है। सूत्रों का कहना है कि इसी विवाद के चलते विभाग की छवि धूमिल हो रही है और वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता पर भी संदेह गहरा गया है। बीते दिनों जब एक प्राचार्य को डीडी पावर दी गई और खाते की गतिविधियों की जांच की गई तो पाया गया कि दो महीने से भी कम समय में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। जब इस पर सवाल उठे तो विभाग ने तुरंत उस प्राचार्य से डीडी पावर वापस ले ली। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस प्राचार्य पर वित्तीय गड़बड़ी और घोटाले के आरोप लगे थे, उन्हें विभाग ने बिना जांच पूरी हुए दोबारा से डीडी पावर सौंप दी। यह कदम शिक्षा विभाग की नीति और नियमों की खुली उल्लंघन माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी राशि खर्च की गई है तो उसका ब्योरा सार्वजनिक होना चाहिए। विद्यालय में न तो कोई बड़ा निर्माण कार्य हुआ है और न ही कोई ऐसी खरीदारी सामने आई है, जिससे इतना खर्च उचित ठहराया जा सके। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है। इस मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी दीप्ति बोकन ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है। चार सदस्यीय कमेटी सभी दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। रिपोर्ट जल्द ही विभागीय अधिकारियों को भेजी जाएगी। विभाग किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगा और यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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तावड़ू। नगर के बाईपास स्थित राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय-2 में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक 7 जुलाई से 29 अगस्त तक यानी महज 54 दिनों में विद्यालय के बैंक खाते से 25 लाख 31 हजार 480 रुपये खर्च कर दिए गए। यह राशि किन कार्यों और मदों पर खर्च हुई, इसका स्पष्ट ब्योरा उपलब्ध नहीं है, जिससे शिक्षा विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है।
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश जारी किए और चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की अध्यक्षता खंड शिक्षा अधिकारी तावड़ू दीप्ति बोकन कर रही हैं। कमेटी में हथीन राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य योगेंद्र सिंह, शिक्षा विभाग के कनिष्ठ अभियंता फैजल हुसैन और लेखाकार मनीष कुमार शामिल हैं। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। विद्यालय में लंबे समय से डीडी पावर को लेकर विवाद चल रहा है। तीन महीनों में ही चार बार प्राचार्य बदले गए और अलग-अलग व्यक्तियों को डीडी पावर सौंप दी गई। यह लगातार बदलाव खुद ही कई सवाल खड़े करता है। सूत्रों का कहना है कि इसी विवाद के चलते विभाग की छवि धूमिल हो रही है और वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता पर भी संदेह गहरा गया है। बीते दिनों जब एक प्राचार्य को डीडी पावर दी गई और खाते की गतिविधियों की जांच की गई तो पाया गया कि दो महीने से भी कम समय में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। जब इस पर सवाल उठे तो विभाग ने तुरंत उस प्राचार्य से डीडी पावर वापस ले ली। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस प्राचार्य पर वित्तीय गड़बड़ी और घोटाले के आरोप लगे थे, उन्हें विभाग ने बिना जांच पूरी हुए दोबारा से डीडी पावर सौंप दी। यह कदम शिक्षा विभाग की नीति और नियमों की खुली उल्लंघन माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी राशि खर्च की गई है तो उसका ब्योरा सार्वजनिक होना चाहिए। विद्यालय में न तो कोई बड़ा निर्माण कार्य हुआ है और न ही कोई ऐसी खरीदारी सामने आई है, जिससे इतना खर्च उचित ठहराया जा सके। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है। इस मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी दीप्ति बोकन ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है। चार सदस्यीय कमेटी सभी दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। रिपोर्ट जल्द ही विभागीय अधिकारियों को भेजी जाएगी। विभाग किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगा और यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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