{"_id":"5f721fe28ebc3e9bfc4f67d1","slug":"mobile-tower-construction-stops-by-manvadhikar-aayog-gurgaon-news-noi5392148199","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानवाधिकार आयोग की सख्ती से रुका मोबाइल टावर का काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानवाधिकार आयोग की सख्ती से रुका मोबाइल टावर का काम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुग्राम। सेक्टर-4 स्थित आयुष डिस्पेंसरी में मोबाइल टावर लगाने का काम हरियाणा मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद रुक गया है। शिकायत मिलने के बाद आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया था। इसके बाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) प्रशासक ने टावर लगाने की अनुमति को रद्द कर दिया। आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने प्रशासक को चेतावनी देने के बाद इस मामले को बंद कर दिया है।
दरअसल, 12 अगस्त को छुट्टी के दिन सेक्टर-4 स्थित डिस्पेंसरी का स्टाफ कोविड बचाव कार्य के लिए आया था। यहां कर्मियों ने देखा कि एक निजी मोबाइल कंपनी अपना टावर लगा रही है। पूछताछ करने पर पता चला कि मोबाइल टावर लगाने की अनुमति एचएसवीपी के अधिकारियों ने दी है। स्टाफ ने डिस्पेंसरी प्रभारी समेत उच्चाधिकारियों को इस मामले की सूचना दी। प्रभारी ने शिकायत हरियाणा मानवाधिकार आयोग को भेज दी थी। आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने एचएसवीपी प्रशासक और सिविल सर्जन को इस मामले में नोटिस देकर जवाब तलब किया था। दीप भाटिया का कहना है कि टावर से निकलने वाले विकिरण का डिस्पेंसरी में आने वाले मरीजों पर बुरा प्रभाव होता। उन्होंने तेवर कड़े किए तो एचएसवीपी ने टावर लगाने की अनुमति को वापस लेते हुए काम रुकवा दिया। शिकायतकर्ता के आगे कार्रवाई न करने के आग्रह पर दीप भाटिया ने मामले को बंद करा दिया है।
विज्ञापन
दरअसल, 12 अगस्त को छुट्टी के दिन सेक्टर-4 स्थित डिस्पेंसरी का स्टाफ कोविड बचाव कार्य के लिए आया था। यहां कर्मियों ने देखा कि एक निजी मोबाइल कंपनी अपना टावर लगा रही है। पूछताछ करने पर पता चला कि मोबाइल टावर लगाने की अनुमति एचएसवीपी के अधिकारियों ने दी है। स्टाफ ने डिस्पेंसरी प्रभारी समेत उच्चाधिकारियों को इस मामले की सूचना दी। प्रभारी ने शिकायत हरियाणा मानवाधिकार आयोग को भेज दी थी। आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने एचएसवीपी प्रशासक और सिविल सर्जन को इस मामले में नोटिस देकर जवाब तलब किया था। दीप भाटिया का कहना है कि टावर से निकलने वाले विकिरण का डिस्पेंसरी में आने वाले मरीजों पर बुरा प्रभाव होता। उन्होंने तेवर कड़े किए तो एचएसवीपी ने टावर लगाने की अनुमति को वापस लेते हुए काम रुकवा दिया। शिकायतकर्ता के आगे कार्रवाई न करने के आग्रह पर दीप भाटिया ने मामले को बंद करा दिया है।
विज्ञापन