फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Gurugram News ›   Many projects will be completed late due to Grape-4 restrictions

Gurugram News: ग्रैप-4 की पाबंदियों के कारण देरी से पूरे होंगे कई प्रोजेक्ट

Tue, 07 Nov 2023 11:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 07 Nov 2023 11:45 PM IST
विज्ञापन
Many projects will be completed late due to Grape-4 restrictions
पाबंदियों से पहले ही तीन शिफ्ट में काम पूरा करने में जुट गए थे बिल्डर, अब पूरी तरह रोक
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। एनसीआर में ग्रैप यानी ग्रेडिड एक्शन रिस्पोंस प्लान-4 के कारण रियल एस्टेट के रिहायशी और कामर्शियल प्रोजेक्ट पूरे करने में बिल्डर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। निर्माण कार्य पर लगे ब्लैंकट बैन (पूरी तरह से निर्माण कार्य पर रोक) से जिले के कई प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। कई प्रोजेक्ट पर मजदूरों को रोकने की चुनौतियां पैदा हो गई हैं। वहीं, कई जगहों पर दिन रात तीन शिफ्टों में जारी काम अब पूरी तरह से ठप पड़ गया है। ऐसे में ग्रैप-4 से रियल एस्टेट को बड़ा झटका लग सकता है।
जिले के कई प्रोजेक्ट डेवलपर असमंजस में हैं तो कई पूर्व नियोजित तरीके से ग्रैप-4 की स्थिति को भांपने के बावजूद प्रोजेक्ट पूरा करने में फेल हो रहे हैं। ऐसे में जिले के कई प्रोजेक्ट ग्रैप-4 के बैन के कारण देरी से पूरे होंगे। जिले में इन दिनों गोल्फ कोर्स रोड पर डीएलएफ के लग्जरी अपार्टमेंट सहित इसी क्षेत्र में बन रहे ट्रंप टावर का निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। हालांकि यह प्रोजेक्ट आगामी एक वर्ष में पूरे होने हैं, ऐसे में मौजूदा ग्रैप से यह समय सीमा तीन से चार माह बढ़ सकती है।
विज्ञापन

रियल एस्टेट मामलों के जानकार विनोद बहल बताते हैं कि ब्लैंकट बैन पूरी तरह से रियल एस्टेट के लिए हानिकारक है। एक बार निर्माण काम पूरी तरह से रोकने पर बड़े प्रोजेक्ट औसतन 90 दिनों की देरी से पूरे होते हैं। प्रोजेक्ट निर्माण दो चरणों में बांटा जा सकता है। इसमें बाह्य निर्माण पर ग्रैप-4 लागू होना चाहिए। इस दौरान आंतरिक निर्माण कार्य करने की छूट मिलनी चाहिए। इससे प्रोजेक्ट की समय सीमा में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिले में यूपी बिहार और उड़ीसा के कामगार रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के निर्माण में लगे थे। एक ओर त्योहारी सीजन और दूसरी ओर ग्रैप-4 की पाबंदी के कारण लगभग ज्यादातर मजदूरों ने घर लौटने की तैयारी कर ली है। बेहतर हो कि पूर्व तैयारी कर रियल एस्टेट को प्रभावित होने से रोका जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल निर्माण कार्य में मिवान कंस्ट्रक्शन तकनीक इस्तेमाल की जा रही है। इसमें धूल न के बराबर होती है। ऐसे में पराली, सड़क पर उड़ती धूल, बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल डीजी सेट सहित पावर हाउस (कोयले का इस्तेमाल) और अन्य कारकों पर ध्यान दें।
प्रोजेक्ट डिलिवर करने में होगी देरी
दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक के कारण ग्रैप-4 लागू किया गया है। इसमें भवन निर्माण सहित अन्य गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य के लिहाज से सरकार का फैसला सही है लेकिन इससे निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पूरे करने में देरी होगी। उपभोक्ता को समय पर प्रॉपर्टी नहीं दे सकेंगे। मौजूदा स्थिति को देखते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार के साथ हैं। - रजत गोयल, निदेशक, एमआरजी वर्ल्ड।
सॉफ्ट प्रक्रिया से कामगारों को रोकने के कर रहे हैं प्रयास
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए चुनौती पैदा हो सकती है। बढ़ते प्रदूषण स्तर को संतुलित करने के लिए ग्रैप-4 महत्वपूर्ण है। ऐसे में सॉफ्ट एक्टिविटी जारी रख कामगारों को रोकने के प्रयास कर रहे हैं। यह गतिविधि प्रदूषण में योगदान नहीं करती। इससे मैनपावर रोकने में मदद मिलेगी। कामगारों के घर जाने के बाद सामान्य स्थिति होने पर काम फिर से शुरू करने में मुश्किल आती हैं।- नयन रहेजा, रहेजा डेवलपर्स
तीन शिफ्टों में पूरा कराया गया काम
ग्रैप 4 के प्रतिबंध बीते कुछ वर्षों से वायु प्रदूषण को देखते हुए इमरजेंसी हालातों में लगाए जा रहे हैं। ऐसे में कई स्मार्ट बिल्डर पहले से तैयारी में लगे रहे। तीन शिफ्टों में कंस्ट्रक्शन का काम किया गया। ऐसे में बाह्य निर्माण काम समय रहते पूरा कर लिया गया। ऐसे प्रोजेक्ट जिसका निर्माण कार्य अगले तीन माह में पूरा होना हो, अब वह केवल इंटीरियर फाइनल करने में जुटे हैं। - सचिन गावरी, सीईओ राइस इंफ्रावेंचर लिमिटेड
ग्रैप-4 नियमों के बीच प्री फैबरिकेटिड कंटेनर बने विकल्प
आजकल रेस्त्रां, फार्म हाउस प्री फैबरिकेटिड कंटेनर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे कंस्ट्रक्शन का काम खत्म हो गया। इससे मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बन जाती है। प्रोजेक्ट इंजीनियर, हाईवे इंजीनियर्स प्री फैबरिकेटिड कंटेनर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कंटेनर मल्टी युटिलाइजेशन आजकल ट्रेंड में है। इंडस्ट्री लाइन में भी यह ट्रेंड में है। कंस्ट्रक्शन कोस्ट बचता है। लैंड की पिलरिंग करके इस कंटेनर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

-पीके सिंहा, सेल्स एंड मार्किटिंग मैनेजर ,जीआईसी थर्मल

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed