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Gurugram News: सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखी कहेहूं मुनिनाथ, लाभ-हानि, जीवन-मरण, यश-अपयश विधि हाथ
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रामलीलाओं में राम के वन गमन, दशरथ मरण, भरत मिलाप और शूर्पणखा प्रसंग का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। रामलीलाओं में राम वन गमन के बाद माहौल गमगीन हो चला है। अर्जुन नगर की न्यू आदर्श रामलीला क्लब की रामलीला में भरत की राम दर्शन यात्रा का मंचन किया गया। गुरु वशिष्ठ ने और सभी मंत्री मंडल ने भरत को राजा दशरथ की अंत्येष्टि क्रिया करने के बाद अयोध्या का राज्य संभालने को कहा तो भरत कहते हैं कि यदि तुम सब मुझ जैसे पापी को जबरदस्ती राज गद्दी पर बैठाएंगे तो ये पृथ्वी रसातल में चली जाएगी। वे फूट फूट कर रोने लगे। तब गुरु वशिष्ठ ने कहा कि सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखी कहेहूं मुनिनाथ, लाभ-हानि, जीवन-मरण, यश-अपयश विधि हाथ। इसके बाद भरत चित्रकूट जाते हैं और राम जी की चरण पादुकाएं अवलम्ब स्वरूप ले लाए और अयोध्या के सिंहासन पर स्थापित कर खुद नंदीग्राम कुटिया बना के कठोर तप करने लगे।
गुड़गांव गांव के श्री द्रोणाचार्य रामलीला क्लब में राम, सीता लक्ष्मण और सुमंत के निषादराज से मिलने का दृश्य केवट द्वारा राम को गंगा पार कराने, श्रवण कुमार पर दशरथ द्वारा शब्दभेदी बाण चलाए जाने और उनके नेत्रहीन माता-पिता द्वारा दशरथ को श्राप दिए जाने का दृश्य दर्शाया गया।
गोशाला मैदान में आयोजित श्री सिद्धेश्वर रामलीला कमेटी की लीला में प्रभु श्री राम अपने मित्र निषाद राज से मिलने और केवट राम प्रसंग ने सब का मन मोह लिया। दशरथ मरण के बाद भरत की अयोध्या वापसी हुई। राम केवट प्रसंग, सुमंत का विलाप और दशरथ मरण लीला के मुख्य आकर्षण रहे। श्री सनातन धर्म कृष्ण मंदिर भीम नगर की रामलीला में राम वन गमन से लेकर लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक और कान काटे जाने तक का दृश्य दर्शाया गया। शूर्पणखा द्वारा अपने भाइयों खरदूषण से अपनी पीड़ा बताने का प्रसंग दर्शाया गया।
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राम भक्त ले चला रे राम की निशानी
जैकबपुरा स्थित श्री दुर्गा रामलीला कमेटी ट्रस्ट में बृहस्पतिवार रात राम-भरत मिलाप की भावुक लीला का मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम और भरत के मिलन के दृश्य देखकर दर्शक भाव-विभोर हो उठे। वहीं, शूर्पणखा के प्रवेश के दौरान बारिश होने के कारण लीला के संवाद बीच में रोकने पड़े। भरत के आग्रह के बावजूद राम जब अयोध्या नहीं लौटते, तब तक वे श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटने का निर्णय लेते हैं। इस दौरान मंच पर राम भक्त ले चला रे राम की निशानी, अब इनकी छांव में रहेगी राजधानी… गीत गूंजता है, जिसने माहौल को और भी भावुक बना दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। रामलीलाओं में राम वन गमन के बाद माहौल गमगीन हो चला है। अर्जुन नगर की न्यू आदर्श रामलीला क्लब की रामलीला में भरत की राम दर्शन यात्रा का मंचन किया गया। गुरु वशिष्ठ ने और सभी मंत्री मंडल ने भरत को राजा दशरथ की अंत्येष्टि क्रिया करने के बाद अयोध्या का राज्य संभालने को कहा तो भरत कहते हैं कि यदि तुम सब मुझ जैसे पापी को जबरदस्ती राज गद्दी पर बैठाएंगे तो ये पृथ्वी रसातल में चली जाएगी। वे फूट फूट कर रोने लगे। तब गुरु वशिष्ठ ने कहा कि सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखी कहेहूं मुनिनाथ, लाभ-हानि, जीवन-मरण, यश-अपयश विधि हाथ। इसके बाद भरत चित्रकूट जाते हैं और राम जी की चरण पादुकाएं अवलम्ब स्वरूप ले लाए और अयोध्या के सिंहासन पर स्थापित कर खुद नंदीग्राम कुटिया बना के कठोर तप करने लगे।
गुड़गांव गांव के श्री द्रोणाचार्य रामलीला क्लब में राम, सीता लक्ष्मण और सुमंत के निषादराज से मिलने का दृश्य केवट द्वारा राम को गंगा पार कराने, श्रवण कुमार पर दशरथ द्वारा शब्दभेदी बाण चलाए जाने और उनके नेत्रहीन माता-पिता द्वारा दशरथ को श्राप दिए जाने का दृश्य दर्शाया गया।
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गोशाला मैदान में आयोजित श्री सिद्धेश्वर रामलीला कमेटी की लीला में प्रभु श्री राम अपने मित्र निषाद राज से मिलने और केवट राम प्रसंग ने सब का मन मोह लिया। दशरथ मरण के बाद भरत की अयोध्या वापसी हुई। राम केवट प्रसंग, सुमंत का विलाप और दशरथ मरण लीला के मुख्य आकर्षण रहे। श्री सनातन धर्म कृष्ण मंदिर भीम नगर की रामलीला में राम वन गमन से लेकर लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक और कान काटे जाने तक का दृश्य दर्शाया गया। शूर्पणखा द्वारा अपने भाइयों खरदूषण से अपनी पीड़ा बताने का प्रसंग दर्शाया गया।
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राम भक्त ले चला रे राम की निशानी
जैकबपुरा स्थित श्री दुर्गा रामलीला कमेटी ट्रस्ट में बृहस्पतिवार रात राम-भरत मिलाप की भावुक लीला का मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम और भरत के मिलन के दृश्य देखकर दर्शक भाव-विभोर हो उठे। वहीं, शूर्पणखा के प्रवेश के दौरान बारिश होने के कारण लीला के संवाद बीच में रोकने पड़े। भरत के आग्रह के बावजूद राम जब अयोध्या नहीं लौटते, तब तक वे श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटने का निर्णय लेते हैं। इस दौरान मंच पर राम भक्त ले चला रे राम की निशानी, अब इनकी छांव में रहेगी राजधानी… गीत गूंजता है, जिसने माहौल को और भी भावुक बना दिया।