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Gurugram News: बीमा कंपनी को मधुमेह क्लेम ब्याज सहित चुकाने का आदेश
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उपभोक्ता आयोग से
रद्द की गई पॉलिसी भी करनी होगी बहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मधुमेह बीमारी न बताने पर खारिज किया गया बीमा क्लेम कंपनी को ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। यह आदेश उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
पटेल नगर निवासी प्रभा चौहान ने टाटा एआईजी से ग्रुप मेडिकेयर इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, जो वर्ष 2021 से लगातार चल रही थी। जनवरी 2025 में पेट में तेज दर्द, उल्टी और चक्कर आने के बाद परिजनों ने उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जांच में पित्त की थैली में पथरी का पता चला, जिसके बाद उनका ऑपरेशन किया गया। उनके उपचार पर 1.03 लाख रुपये का खर्चा आया था। इसके बाद उन्होंने क्लेम के लिए कंपनी में आवेदन किया।
बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया और पॉलिसी रद्द कर दी। कंपनी ने प्रभा पर मधुमेह की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। आयोग ने कहा कि पथरी का मधुमेह से सीधा संबंध नहीं है। कंपनी की कार्रवाई को सेवा में कमी माना गया। आयोग ने कंपनी को 1.03 लाख रुपये नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित देने का निर्देश दिया। मानसिक प्रताड़ना के 30 हजार रुपये और मुकदमे के 11 हजार रुपये भी देने होंगे। रद्द की गई बीमा पॉलिसी भी बहाल की जाएगी।
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रद्द की गई पॉलिसी भी करनी होगी बहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मधुमेह बीमारी न बताने पर खारिज किया गया बीमा क्लेम कंपनी को ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। यह आदेश उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
पटेल नगर निवासी प्रभा चौहान ने टाटा एआईजी से ग्रुप मेडिकेयर इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, जो वर्ष 2021 से लगातार चल रही थी। जनवरी 2025 में पेट में तेज दर्द, उल्टी और चक्कर आने के बाद परिजनों ने उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जांच में पित्त की थैली में पथरी का पता चला, जिसके बाद उनका ऑपरेशन किया गया। उनके उपचार पर 1.03 लाख रुपये का खर्चा आया था। इसके बाद उन्होंने क्लेम के लिए कंपनी में आवेदन किया।
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बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया और पॉलिसी रद्द कर दी। कंपनी ने प्रभा पर मधुमेह की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। आयोग ने कहा कि पथरी का मधुमेह से सीधा संबंध नहीं है। कंपनी की कार्रवाई को सेवा में कमी माना गया। आयोग ने कंपनी को 1.03 लाख रुपये नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित देने का निर्देश दिया। मानसिक प्रताड़ना के 30 हजार रुपये और मुकदमे के 11 हजार रुपये भी देने होंगे। रद्द की गई बीमा पॉलिसी भी बहाल की जाएगी।
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