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निजी की बजाय सरकारी एजेंसी करेगी शहर में विकास कार्य
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गुरुग्राम। नगर निगम में अब निजी एजेंसियों की बजाय सरकारी एजेंसी शहर में विकास कार्य करेंगी। निगम की ओर से सरकारी एजेंसी ने ऑनलाइन टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एजेंसी के जरिये निगम दायरे में सौंदर्यीकरण के साथ विकास कार्य भी निगमायुक्त के आदेश पर करवाए जाएंगे। दूसरी ओर टेंडर के विरोध में निगम ठेकेदारों ने भी अपना मोर्चा खोल दिया है। निगम के करीब 250 ठेकेदारों ने टेंडर के विरोध में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है। इसी के विरोध में निगम ठेकेदारों ने शनिवार को शहरी स्थानीय निकास मंत्री अनिल विज को भी इसकी शिकायत दी है।
एमसीजी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अनिल दहिया का आरोप है कि इस टेंडर के जरिये निगम अधिकारी एक बड़े घोटाले को अंजाम देने की फिराक में हैं। यही टेंडर प्रक्रिया रोहतक और करनाल में शुरू की गई थी, जिसकी जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। टेंडर को रद्द करवाने के लिए सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
दरअसल, नगर निगम की ओर से शहर में सौंदर्यीकरण, विकास कार्य, मरम्मत और खुदाई के काम के लिए पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) (जिसमें अधिकांश हिस्सा सरकार का होता है) को यह कार्य देने के लिए एक टेंडर ऑनलाइन लगाया गया है। इसमें सरकारी एजेंसी को सब चीजों के अपने मूल्य देने होते हैं। 17 फरवरी को यह टेंडर खोला जाएगा। निगम ठेकेदारों का आरोप है कि इस टेंडर को नियमों के विरुद्ध लगाया गया है। सरकारी एजेंसी को कार्य देने से निगम के 250 ठेकेदार बेरोजगार हो जाएंगे। टेंडर में मैन्युफैक्चरिंग और कार्य की गुणवत्ता को लेकर कोई नियम नहीं हैं। एजेंसी को कार्य पांच वर्ष के लिए दिया जाएगा, जिसमें वित्तीय खर्च का कोई अनुमान नहीं है, जबकि टेंडर फीस सिर्फ दो करोड़ रुपये की भरवाई गई है। कई निगम पार्षद भी इसके विरोध में उतर आए हैं।
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टेंडर सरकारी एजेंसियों के लिए इंपैनलमेंट सरकार की शर्तों के अनुसार किया गया है। टेंडर में एजेंसी से शहर के सौंदर्यीकरण और बागवानी के कार्य करवाए जाएंगे। अन्य कार्य निजी एजेंसियों से ही करवाए जाएंगे।
-विनय प्रताप सिंह, निगमायुक्त, नगर निगम, गुरुग्राम
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एमसीजी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अनिल दहिया का आरोप है कि इस टेंडर के जरिये निगम अधिकारी एक बड़े घोटाले को अंजाम देने की फिराक में हैं। यही टेंडर प्रक्रिया रोहतक और करनाल में शुरू की गई थी, जिसकी जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। टेंडर को रद्द करवाने के लिए सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
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दरअसल, नगर निगम की ओर से शहर में सौंदर्यीकरण, विकास कार्य, मरम्मत और खुदाई के काम के लिए पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) (जिसमें अधिकांश हिस्सा सरकार का होता है) को यह कार्य देने के लिए एक टेंडर ऑनलाइन लगाया गया है। इसमें सरकारी एजेंसी को सब चीजों के अपने मूल्य देने होते हैं। 17 फरवरी को यह टेंडर खोला जाएगा। निगम ठेकेदारों का आरोप है कि इस टेंडर को नियमों के विरुद्ध लगाया गया है। सरकारी एजेंसी को कार्य देने से निगम के 250 ठेकेदार बेरोजगार हो जाएंगे। टेंडर में मैन्युफैक्चरिंग और कार्य की गुणवत्ता को लेकर कोई नियम नहीं हैं। एजेंसी को कार्य पांच वर्ष के लिए दिया जाएगा, जिसमें वित्तीय खर्च का कोई अनुमान नहीं है, जबकि टेंडर फीस सिर्फ दो करोड़ रुपये की भरवाई गई है। कई निगम पार्षद भी इसके विरोध में उतर आए हैं।
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टेंडर सरकारी एजेंसियों के लिए इंपैनलमेंट सरकार की शर्तों के अनुसार किया गया है। टेंडर में एजेंसी से शहर के सौंदर्यीकरण और बागवानी के कार्य करवाए जाएंगे। अन्य कार्य निजी एजेंसियों से ही करवाए जाएंगे।
-विनय प्रताप सिंह, निगमायुक्त, नगर निगम, गुरुग्राम
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