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लोन दिलाने के नाम पर लोगों से अधिक प्रोसेसिंग फीस लेकर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर के भंडाफोड़
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गुरुग्राम। ऑनलाइन लोन दिलाने वाले एप पर लोगों को झांसा देकर ठगी करने व उनके मोबाइल से व्यक्तिगत जानकारी चुरा कर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। साइबर थाना पुलिस ने सेक्टर-58 के एक टावर में आठवीं मंजिल पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। मौके से दो मोबाइल व एक लैपटॉप बरामद हुआ है। पुलिस ने दो संचालकों को भी गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर शुक्रवार को अदालत में पेश किया। जहां पर उनको दो दिन की रिमांड पर लेकर छानबीन शुरू कर दी है। साइबर थाना पुलिस की टीम का नेतृत्व एसीपी डीएलएफ करण गोयल कर रहे थे। पीएसपीआर इंटरप्राइजेज के नाम पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर की जांच में टीम ने पाया कि बिना आरबीआई में रजिस्ट्रेशन व नियमों का पालन किए गैर कानूनी तरीके से प्रोसेसिंग फीस वसूली जा रही थी। कॉल सेंटर के पास एनबीएफसी की ओर से लाइसेंस भी नहीं लिया गया है।
पुलिस टीम को मौके पर 16 युवक और 6 युवतियां काम करते हुए मिले। पुलिस ने छानबीन के बाद संचालक के रूप में संजय निवासी फतेहपुर बिल्लोच, फरीदाबाद व भरत निवासी गांव बिजवा, चरखीदादरी को गिरफ्तार किया।
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दो से पांच हजार का ऑनलाइन शार्ट टर्म लोन देते थे
पुलिस को छानबीन के दौरान पता चला कि कॉल सेंटर पर लोन देने के नाम पर माया कैश नाम के एप को गूगल प्ले से डाउनलोड करना होता था। बाद में साढ़े सात सौ से 1200 रुपये प्रोसेसिंग फीस लेकर सात दिन के लिए लोन दिया जाता था। बताते हैं कि प्रोसेसिंग के दौरान ही आरोपी लोन लेने वाले का डाटा चुरा लेते थे और सात दिन के भीतर पैसा न वापस देने वालों को उसकी गुप्त जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए एसएमएस भेजकर ब्लैकमेल करते थे।
अब तक 41 फर्जी कॉल सेंटर पकड़े जा चुके हैं।
साइबर सिटी में बढ़ रहे साइबर क्राइम पर नियंत्रण करने के लिए बने साइबर थाना पुलिस की ओर से अब तक कुल 41 फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हो चुका है।
साइबर थाना पुलिस को लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने व ब्लैकमेल करने की सूचना मिली थी। जिसके बाद टीम ने छापेमारी की। पुलिस की जानकारी के अनुसार चार माह से यह कॉल सेंटर चल रहा था।
- करण गोयल, एसीपी डीएलएफ, गुरुग्राम।
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पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर शुक्रवार को अदालत में पेश किया। जहां पर उनको दो दिन की रिमांड पर लेकर छानबीन शुरू कर दी है। साइबर थाना पुलिस की टीम का नेतृत्व एसीपी डीएलएफ करण गोयल कर रहे थे। पीएसपीआर इंटरप्राइजेज के नाम पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर की जांच में टीम ने पाया कि बिना आरबीआई में रजिस्ट्रेशन व नियमों का पालन किए गैर कानूनी तरीके से प्रोसेसिंग फीस वसूली जा रही थी। कॉल सेंटर के पास एनबीएफसी की ओर से लाइसेंस भी नहीं लिया गया है।
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पुलिस टीम को मौके पर 16 युवक और 6 युवतियां काम करते हुए मिले। पुलिस ने छानबीन के बाद संचालक के रूप में संजय निवासी फतेहपुर बिल्लोच, फरीदाबाद व भरत निवासी गांव बिजवा, चरखीदादरी को गिरफ्तार किया।
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दो से पांच हजार का ऑनलाइन शार्ट टर्म लोन देते थे
पुलिस को छानबीन के दौरान पता चला कि कॉल सेंटर पर लोन देने के नाम पर माया कैश नाम के एप को गूगल प्ले से डाउनलोड करना होता था। बाद में साढ़े सात सौ से 1200 रुपये प्रोसेसिंग फीस लेकर सात दिन के लिए लोन दिया जाता था। बताते हैं कि प्रोसेसिंग के दौरान ही आरोपी लोन लेने वाले का डाटा चुरा लेते थे और सात दिन के भीतर पैसा न वापस देने वालों को उसकी गुप्त जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए एसएमएस भेजकर ब्लैकमेल करते थे।
अब तक 41 फर्जी कॉल सेंटर पकड़े जा चुके हैं।
साइबर सिटी में बढ़ रहे साइबर क्राइम पर नियंत्रण करने के लिए बने साइबर थाना पुलिस की ओर से अब तक कुल 41 फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हो चुका है।
साइबर थाना पुलिस को लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने व ब्लैकमेल करने की सूचना मिली थी। जिसके बाद टीम ने छापेमारी की। पुलिस की जानकारी के अनुसार चार माह से यह कॉल सेंटर चल रहा था।
- करण गोयल, एसीपी डीएलएफ, गुरुग्राम।